एएन-32 विमान आखिर गया कहां

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AN-32 Aircraft

राज एक्सप्रेस, भोपाल। तीन जून से अदृश्य वायु सेना के एंटोनोव एएन-32 विमान (AN-32 Aircraft) और सवार 13 लोगों का पता नहीं चल सका है, तो इससे बड़ी दुखद त्रसदी आधुनिक मानवीय जीवन की और क्या हो सकती है! अब तो वायुसेना ने विमान के बारे में पुख्ता जानकारी देने वालों को 5 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा कर दी है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर विमान गया तो कहां?

तीन जून से अदृश्य वायु सेना के एंटोनोव एएन-32 विमान और इसमें सवार कुल 13 लोगों का यदि पता नहीं चल सका है, तो इससे बड़ी दुखद त्रसदी आधुनिक मानवीय जीवन की और क्या हो सकती है! अब तो वायुसेना ने विमान के बारे में पुख्ता जानकारी देने वालों को 5 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा कर दी है। विमान ने असम के जोरहाट से अरुणाचल के मेंचुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के लिए उड़ान भरी थी। इसमें वायुसेना का विंग कमांडर, चार फ्लाइट लेफ्टिनेंट, एक स्क्वाड्रन लीडर और सात एयर मैन सवार थे। वायु सेना के अनुसार विमान ने जोरहाट से दोपहर 12.25 बजे उड़ान भरी थी। विमान का यातायात नियंत्रण कक्ष से अंतिम संपर्क दोपहर एक बजे हुआ था। जहां से विमान अदृश्य हुआ, वह क्षेत्र चीन की सीमा से 35 किलोमीटर दूर स्थित है। जब विमान मेंचुका नहीं पहुंचा तो जांच शुरू हुई।

अदृश्य विमान और सवार 13 लोगों की खोज के लिए सुखोई-30 एसी130 विमानों के अलावा क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक एवं वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी से युक्त अनेक विमानों और दूसरे खोजी साधनों संसाधनों की सहायता ली जा रही है लेकिन तब भी विमान और उसमें बैठे लोगों से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली है। इतना ही नहीं विमान व लोगों की खोज में सेना के साथ आईटीबीपी, विभिन्न सरकारी व नागरिक एजेंसियों की सहायता भी ली जा रही है तब भी सफलता नहीं मिल पा रही। हालांकि खोए विमान को ढूंढने के क्रम में अब सरकार का ज्यादा ध्यान उसमें सवार 13 लोगों को ढूंढने पर है। जिस स्थान से विमान गायब हुआ वहां काफी घना जंगल है, जिसके भीतर के क्षेत्र को उपग्रह तक भी नहीं ढूंढ पा रहे। सैटेलाइट के कैमरे घने जंगल के भीतर के स्पष्ट दृश्य नहीं ले पा रहे हैं।

वैसे भारतीय थल सेना के लिए घने जंगल में खोज अभियान चलाना कोई बड़ी बात नहीं। देर-सबेर सेना घने जंगल को भी छान मारेगी, किंतु प्रश्न यह है कि क्या विमान वास्तव में इसी घने जंगल के भीतर गिरकर गायब हुआ या कहीं और से गायब हुआ। वास्तव में एएन-32 भारतीय वायु सेना का परिवहन विमान है। इसमें दो इंजन हैं। वायु सेना में इसका उपयोग 1984 से हो रहा है। वायु सेना की आवश्यकताओं के अनुसार निरंतर आधुनिकीकरण भी किया जाता रहा है। यह विमान भारतीय वायु सेना में बड़े काम का माना जाता है। एएन-32 विमान रूसी एएन-26 विमान का ही आधुनिक संस्करण है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि यह किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है। 1984 में इंदिरा गांधी की सरकार के समय भारतीय वायु सेना की तत्कालीन आवश्यकताओं को देखते हुए रूस से एएन-32 विमान मंगाया गया था। विमान का मुख्य उपयोग कम एवं मध्यम हवाई दूरी तक सैन्य उपकरण पहुंचाने, आपदाकाल में पीड़ितों को चिकित्सालय या अन्य सुरक्षा स्थलों तक लाने-ले जाने और युद्धकाल में सैन्यकर्मियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने में होता है।

एएन-32 विमान में 540 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उड़ने की क्षमता है। यह एक बार में 16 हजार 800 किलोग्राम तक भार ढो सकता है। यह 2500 किलोमीटर की दूर तक उड़ सकता है। इसकी लंबाई 78 फीट है। इसमें एक बार में 50 यात्री बैठ सकते हैं। इसकी ऊंचाई 28 फीट है। वायु सेना के विमान के अदृश्य होने की यह पहली घटना नहीं है। दस वर्ष पूर्व नौ जून 2009 को भी इसी स्थान से एक विमान लापता हुआ था और दुर्भाग्यवश उसमें भी 13 लोग ही सवार थे। उस दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा नियंत्रण रेखा से 60 किलोमीटर दूर रिंची पहाड़ी पर मिला था। एनएन-32 विमानों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान के लिए उड़ान भरने के क्रम में इनके अचानक गायब होने की अनेक घटनाएं भारत में घट चुकी हैं। वर्ष 2016 में भी चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा एएन-32 विमान बंगाल की खाड़ी के ऊपर से उड़ते हुए लापता हो गया था। उस विमान में वायुसेना कर्मियों सहित कुल 29 लोग सवार थे। कई दिनों तक उस गायब विमान को ढूंढा गया। उसे ढूंढने के लिए एक पनडुब्बी, 8 विमानों और 13 पोतों की सहायता ली गई थी।

देशी-विदेशी आधुनिक संचार, सूचना और वैज्ञानिक तकनीक और प्रौद्योगिकी की सहायता से प्रशांत महासागर में महीनों तक विमान को ढूंढा गया, पर विडंबना ही है कि विमान का न तो अंशमात्र का कोई अवशेष मिला और न ही उसमें सवार लोगों की ही कोई जानकारी मिली। बंगाल की खाड़ी से रहस्यमयी तरीके से गायब एएन-32 विमान के बारे में देश में आधिकारिक और सहमा-सहमा विमर्श तो जरूरत हुआ था, पर इस विषय पर सरकार और जनता के स्तर पर कोई विशेष चिंता या चिंतन कहीं भी देखने को नहीं मिला। वही स्थिति अब भी है। कांग्रेस की हार मीडिया के लिए बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसकी वास्तव में जरूरत ही नहीं और रहस्यमयी तरीके से गायब विमान के बारे में मीडिया कोई रिपोर्ट ही नहीं कर रहा। मीडिया ने गायब विमान को केवल एक या दो कॉलमों की खबरों तक समेट दिया है। मीडिया के इस दृष्टिकोण पर बहुत दुख और क्षोभ होता है।

हालांकि एएन श्रेणी का कोई विमान पहली बार 25 मार्च 1986 को लापता हुआ था। तब एएन विमान सोवियत संघ से एक डिलीवरी उड़ान के समय हिंद महासागर में गायब हो गया था। लापता विमान और इसमें सवार लोगों का कोई अवशेष नहीं मिलने की स्थिति में इसके रहस्यमयी तरीके से लापता होने को कभी भी प्रामाणिक सत्य नहीं माना गया। दुनिया ने हमेशा यही माना कि विमानों में तकनीकी कमी उभरने के कारण ही ये गायब और दुर्घटनाग्रस्त हुए। लेकिन यदि ऐसा है तो इस युग में जब अंतरिक्ष की अज्ञात चीजों को ढूंढने के तमाम वैज्ञानिक दावे किए जा रहे हैं, तब हमारे सामने लहराते महासागर और स्पष्टत: दृष्टिगत एक भू-पठार पर फैले घने जंगल के ऊपर से उड़ान भरनेवाले विमानों के गायब होने और गायब होने के बाद अथक खोज अभियान चलाए जाने पर भी उनके किसी अवशेष के न मिलने को क्या समझा जाए!

क्या इसे आधुनिक विकास का एक अयोग्य पहलू समझा जाए और यदि ऐसा नहीं है तो दुनिया में रहस्य के पीछे के जादू पर कोई भी विमर्श कहीं क्यों नहीं होता, जिसे आधुनिक विद्वता के दंभ में हम सदैव उपेक्षित समझते रहे हैं। यही रहस्यमयी शक्तियां हमारी आधुनिक कलाकारी के प्रतिदशोर्ं में से एक एएन-32 विमानों को गायब कर देती हैं और हम वर्षो तक गायब विमानों और उसमें सवार लोगों का कोई अंशमात्र का अवशेष भी नहीं खोज पाते। क्या यह माना जाए कि एएन-32 विमान में कोई बड़ी तकनीकी या अन्य समस्या है और इसी कारण ही दुर्घटनाग्रस्त होकर गायब हो रहे हैं? अदृश्य विमानों को आधुनिक तरीकों से खोजने के बाद भी विमान और सवार लोगों का कोई अवशेष नहीं मिलना सिद्ध करता है कि आधुनिक विकास का पैमाना सर्वश्रेष्ठ नहीं है। इसमें भी कमियां हैं जिसका पर्याप्त चिंतन-मनन हो ही नहीं रहा है।

विकेश कुमार बडोला (वरिष्ठ पत्रकार)

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