यात्रियों की सुरक्षा कब होगी दुरुस्त

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Train Crime

राज एक्सप्रेस, भोपाल। गुजरात के पूर्व विधायक जयंती भानुशाली की चलती ट्रेन में हत्या के बाद अब दिल्ली से भागलपुर जा रही ट्रेन में डकैती ने चिंता बढ़ा दी है (Train Crime)। आखिर हमारे सुरक्षा बल ट्रेनों में इस तरह की घटनाओं को रोकने में हर बार नाकाम क्यों साबित हो जाते हैं, यह बड़ा सवाल तो है।

गुजरात के पूर्व विधायक जयंती भानुशाली की चलती ट्रेन में हत्या के बाद अब नई दिल्ली से भागलपुर जा रही ट्रेन में डकैती ने यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठा दिया है। ट्रेन में बुधवार रात चार दर्जन से ज्यादा सशस्त्र डकैतों ने दो घंटों तक उत्पात मचाया। डकैतों ने महिलाओं के जेवर उतरवा लिए। दर्जनों मोबाइल, नकद सहित करीब 30 लाख की लूट की। इस दौरान विरोध करने पर करीब आधा दर्जन यात्रियों को चाकू मारकर घायल कर दिया। वहीं, दो यात्रियों को गोली भी मारी। आलम यह रहा कि ट्रेन में डकैत करीब ढाई घंटे तक उत्पात मचाते रहे, मगर यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात एक भी जवान मौके पर नहीं पहुंचा। रेल और जिले की पुलिस सोती रही। इस दौरान ट्रेन का चालक भी डकैतों के शिकंजे में रहा। बताते हैं कि रेल और जिले की पुलिस को ट्रेन में नक्सली हमले की सूचना मिली थी। इस कारण पुलिस के जवान ट्रेन में होने के बाद भी यात्रियों की सुरक्षा करने नहीं गए।

यह तथ्य साबित करता है कि हमारे रखवालों के कलेजे कितने कमजोर हैं। जवानों पर ही सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वे अगर खतरा देखकर आगे बढ़ना है या नहीं, तय करेंगे, तो फिर सुरक्षा रामभरोसे ही मानी जानी चाहिए और सुरक्षा के दावे बंद किए जाने चाहिए। सोचि, सीमा पर तैनात हमारे सैनिक अगर ऐसा करने लग गए तो कल्पना भी नहीं की जा सकती कि क्या होगा। जब वे अपना काम मुस्तैदी से करते हैं और आतंकियों से लोहा लेने बिना कुछ सोचे-समझे आगे बढ़ जाते हैं, तो फिर पुलिस के जवानों को भी यह कतई नहीं देखना चाहिए कि सामने नक्सली है या फिर कोई छुटभैया। रेल यात्रियों के साथ लूट, चोरी और झपटमारी की वारदात में इजाफा हुआ है। खासतौर से लूट की वारदात बढ़ी हैं। यात्रियों के साथ ये वारदात चलती ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर हुई हैं। इनमें महिला यात्रियों के साथ रेप और छेड़छाड़ जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। रेल यात्रियों के साथ 2015 में रोजाना औसतन छह वारदात हुईं, वहीं साल 2016 में यह ग्राफ बढ़कर सात पर पहुंच गया। सूत्रों का कहना है कि इससे साफ जाहिर है कि ट्रेनों में सफर करने वालों की हिफाजत बढ़ने के बजाय घटी है।

आरपीएफ और जीआरपी यात्रियों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के हर साल दावा करती है। इनमें लूट की वारदात में सबसे अधिक इजाफा हुआ है। ये वारदात मूविंग ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों में हुई हैं। खास बात यह है कि जहां वारदात बढ़ी हैं, वहीं सुरक्षा इंतजाम के ग्राफ में कमी आई है। ट्रेनों में होने वाली जहरखुरानी एक आम समस्या है। जाने कितने लोग अपना धन व कीमती सामान तो खोते ही हैं, जान से भी हाथ धो बैठते हैं। रेलवे इससे निपटने के लिए कई स्टेशनों पर ट्रेनों की वीडियोग्राफी करेगा। यह प्रयास सराहनीय है और अगर उसके सुरक्षा बल भी पूरी तरह मुस्तैद हो जाएं तो ट्रेनों में होने वाली लूटपाट को बहुत हद तक रोका जा सकेगा।

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