पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज पुण्यतिथि, वे हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत व पथ प्रदर्शक

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अपने दृढ़ फैसलों के लिए पहचानी जाने वालीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज पुण्यतिथि है। आज ही के दिन उनके अंगरक्षकों ने उन्हें गोली मार दी थी। खालिस्तान समर्थकों ने उनके द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ब्लू-स्टार का बहुत विरोध किया लेकिन इंदिराजी ने इस ऑपरेशन को वापस नहीं लिया व उनके इस फैसले से खालिस्तानी नाराज थे। बहरहाल, इंदिरा गांधी की पहचान यहीं तक सीमित नहीं है। यह घटना सिर्फ इंदिराजी एवं भारत देश के लिए एक काला अध्याय भर है। इंदिरा गांधी का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। देश पर इमरजेंसी लगा मानवाधिकारों का हनन करना हो या खालिस्तान के विरोध में चलाया गया ऑपरेशन ब्लू-स्टार जैसे कदमों पर आलोचकों व समाजशास्त्रियों द्वारा उनकी आलोचनाएं की जाती रहीं। आलोचकों का मानना है कि खालिस्तान के समर्थन में आंदोलन पहले इंदिरा गांधी और ज्ञानी जैल सिंह ने ही शुरू किया था, लेकिन फिर बाद में इंदिरा ने इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन ब्लू-स्टार चलाया, पर अपनी आलोचनाओं से वे घबराई नहीं बल्कि उनका सामना किया और आगे बढ़ीं। अपने फौलादी व्यक्तित्व और सकारात्मक दृष्टिकोण की वजह से विश्व में उन्हें सबसे ताकतवर महिलाओं की श्रेणी में गिना जाता है। भारतीय राजनीति में उनके निर्णयों को मिसाल के तौर पर देखा जाता है।
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को नेहरू परिवार में हुआ था। भारतीय राजनीति के इतिहास में इंदिरा गांधी की भूमिका कभी भुलाई नहीं जा सकती है। तेज तर्रार और हर फैसलों को सोच विचार करके तुरंत लेने की क्षमता रखने वालीं इंदिरा गांधी को आयरन लेडी कहा जाता था। इंदिरा गांधी ने 1969 में देश के 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था। उस समय कांग्रेस में दो गुट थे इंडिकेट और सिंडिकेट। वे इंडिकेट की नेता थीं, उनका मानना था कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण की बदौलत ही देश भर में बैंक क्रेडिट दी जा सकेगी और अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। इंदिरा गांधी के करीबी कहते हैं कि वह अपने सभी सहयोगियों और अधीनस्थों से सलाह लेकर देश के हित में अटल फैसला लेती थीं। इंदिरा गांधी के निजी सचिव रहे आरके धवन कहते हैं कि वे ऐसे फैसले करती थीं, जिनमें लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता का ख्याल रखा जाए। उनके फैसले अपने होते थे। जो भी फैसला लिया देश हित में लिया और उस पर अटल रहीं। इंदिराजी के जीवन में हर दिन दिक्कतें आईं, पर उन्होंने हमेशा आम जनता के लिए ही सोचा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपने कुशल नेतृत्व से देश को जीत दिलाई और उनकी कूटनीति की बदौलत बांग्लादेश का गठन हुआ। अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर उनकी पकड़ इतनी जबर्दस्त थी कि उस युद्ध के मामले में महाशक्ति देश अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को भी मुंह की खानी पड़ी थी।
भारत-पाक युद्ध में इंदिरा गांधी के सही समय पर किए फैसलों के कारण जंग में हस्तक्षेप करने के अमेरिका के मंसूबों पर पानी फिर गया। उस दौरान अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े के पहुंचने से पहले बांग्लादेश को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया गया। इस तरह अमेरिकी सामरिक नीति को भारत ने करारा झटका दिया। इंदिरा गांधी को हरित क्रांति का जनक भी कहा जाता है। जब देश में खाद्य की कमी आ गई थी, तब उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए हरित क्रांति की शुरुआत की थी। उनका ये फैसला आज भी याद किया जाता है। प्रति व्यक्ति भोजन की उपलब्धता व खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इसका आगाज किया था। इंदिरा के शासनकाल में हुईं कई ऐतिहासिक घटनाओं ने भारत में न केवल राजनीतिक बल्कि कई सामाजिक परिवर्तन भी किए। आज भी देश और दुनिया इंदिरा गांधी को मजबूत नेता के रूप में जानती-मानती है। गूंगी गुड़िया के नाम से बुलाई जाने वालीं इंदिराजी ने देश का परचम दुनिया भर में उस समय लहराया जब अस्थिरता का दौर था। इंदिरा गांधी अपनी प्रतिभा और राजनीतिक दृढ़ता के लिए विश्व राजनीति के इतिहास में जानी जाती हैं और इंदिरा गांधी को लौह महिला के नाम से संबोधित किया जाता है। वे देश की तीसरी व भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री थीं।
देखा जाए तो कोई भी देश अपने विपक्षी की सराहना कभी नहीं करता, पर लोकसभा में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध पर चल रही एक चर्चा के दौरान अटलजी ने सदन में कहा था कि जिस तरह से इंदिरा ने इस लड़ाई में अपनी भूमिका अदा की है वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने कहा भी था कि हमें बहस को छोड़कर इंदिरा जी की भूमिका पर बात करनी चाहिए, जो किसी दुर्गा से कम नहीं थी। उन्होंने उस समय यह बात कह कर राजनीति की एक नई मिसाल कायम की थी। एक सख्त प्रशासक के तौर पर उन्होंने अपनी एक अलग छवि बनाई थी। इसलिए आज भी उन्हें देश के सबसे मजबूत प्रधानमंत्रियों में से एक माना जाता है। नि:संदेह इंदिराजी का निधन ऐसे समय हुआ, जब देश को उनकी बहुत ही जरूरत थी। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनकी नीति, उनके द्वारा लिए गए फैसले और उनका व्यक्तित्व हमें गर्व करने का मौका देता है। इंदिरा गांधी के निधन को आज 33 साल हो गए हैं, लेकिन हमारे दिलों में उनके लिए सम्मान हमेशा बना रहेगा।
श्वेता मंडोतिया (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

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