विवादित बयानबाजी कर चर्चा में बने रहने की सोच नेता, देश के लिए बेहद घातक

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उत्तरप्रदेश के भाजपा विधायक संगीत सोम के ताजमहल को लेकर दिए गए बयान के बाद मचे बवाल को शांत कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ लौट भी नहीं पाए थे कि अब उन्हीं की पार्टी के सांसद हुकुम सिंह ने विवाद खड़ा कर दिया है। हुकुम सिंह ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के युवकों का मकसद सिर्फ रेप करना है। जब हिंदुस्तान में रेप जैसी घटना करने से वे बाज नहीं आ रहे तो पाकिस्तान में हिंदुओं का क्या हाल होगा। साथ ही कहा, हमने कभी किसी हिंदू को मुसलमान का रेप करने की घटना नहीं सुनी। केंद्र और प्रदेश में हमारी सरकार है, ऐसे लोगों में खौफ होना जरूरी है। बता दें कि यह वही हुकुम सिंह हैं, जिन्होंने कैराना पलायन को हवा दी थी। सांसद ने बयान भले ही चर्चा में बने रहने के लिए दिया हो, पर यह तय है कि आने वाले दिनों में सियासी पारा फिर चरम पर रहेगा। बयान के बाद जिस तरह की तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उनसे ऐसा ही संकेत मिल रहा है। कुछ भी हो, पर अभी ऐसे बयान की जरूरत नहीं थी। जब केंद्र व प्रदेश दोनों सरकारें ताजमहल को लेकर उठे विवाद को ठंडा करने की कोशिश में जुटी हों।
देश में हिंदू और मुस्लिमों को लेकर राजनीति का ट्रेंड काफी पुराना रहा है। कई मौकों पर यह राजनीति सत्ता तक पहुंचने का माध्यम भी बनी है। मगर अब वह दौर नहीं है। लेकिन हमारे नेता समय-समय पर इस मुद्दे को ऐसे उठाते हैं, जैसे बाकी बातें गौण हों। यह सही नहीं है। अब समाज को बांटने और सौहाद्र्र को बिगाड़ने वाले बयानों से पीछा छुड़ाना ही होगा। चर्चा में बने रहने के लिए हुकुम सिंह ने बयान तब दिया है, जब संगीत सोम अपनी ही सरकार से फटकार खा चुके हैं। सवाल यह उठता है कि क्या एक गलती के लिए सभी को बारी बारी से बुलाकर नसीहत दी जाए? अगर किसी पार्टी या सरकार ने अपने एक नेता को उसकी गलती के लिए सजा दी है, तो क्या दूसरों का फर्ज नहीं बनता कि वे उसे न दोहराएं? मगर नैतिकता का बोध न होना ही नेताओं पर बंदिश नहीं लगा पाता। हुकुम सिंह को शायद यह नहीं पता कि जिस तरह आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता, वैसे ही अपराधी को भी मजहब से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
सिर्फ चर्चा में बने रहने के कारण नेताओं की बयानबाजी अब समाज के लिए घातक होती जा रही है। इससे जल्द से जल्द छुटकारा पाने की जरूरत है, लेकिन यह तभी हो पाएगा, जब नेता खुद से ऐसा चाहेंगे। इस दिशा में सभी राजनीतिक दलों को भी सोचना पड़ेगा और कड़ा कानून बनाने के लिए संसद में मिल बैठकर प्रयास करना होगा। यह ऐसी समस्या है, जो पार्टी का स्तर तो गिराती ही है, समाज एवं धर्म विशेष के प्रति वैमनस्यता का बीज भी बोती है। लिहाजा, सरकार को चाहिए कि वह बेतुके बयान देने वाले नेताओं पर सख्ती करने के लिए कड़ा कानून बनाए, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान हो। किसी भी धर्म या समाज के प्रति बयान देने से पहले नेताओं को यह बात याद रखनी ही चाहिए कि उनकी बात का असर कहां तक जाएगा। किसी समाज का प्रतिनिधित्व करने के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी नेताओं की ही होती है।

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