अमेरिकी संकट से दुनिया परेशान, अब ट्रंप इस संकट से कैसे उबार पाते हैं, देखना होगा

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अमेरिकी संकट से दुनिया परेशान, अब ट्रंप इस संकट से कैसे उबार पाते हैं, देखना होगा

अमेरिका एक बार फिर बड़े आर्थिक संकट में है। पांच साल में दूसरी बार शटडाउन की घोषणा से दुनिया चिंतित है। सीनेट के डेमोक्रेट सांसदों द्वारा संघीय सरकार के एक अल्पकालिक व्यय उपाय पर रोक लगाने के बाद अमेरिकी सरकार ने पांच सालों बाद पहली बार शनिवार को शटडाउन की घोषणा की। अमेरिका में ऐंटी डेफिशिएंसी ऐक्ट लागू है, जिसके तहत फंड की कमी होने पर संघीय एजेंसियों को अपना कामकाज रोकना पड़ता है। दूसरी तरफ, सरकार इस फंड की कमी पूरी करने के लिए एक अल्पकालिक व्यय समझौता विधेयक लाती है, जिसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट में पारित कराना पड़ता है। यह विधेयक प्रतिनिधि सभा ने तो पारित कर दिया, पर सीनेट ने नामंजूर कर दिया। सीनेट से मंजूरी न मिलने की वजह से अमेरिका संकट में आ गया। अमेरिकी सीनेट द्वारा व्यय विधेयक खारिज कर दिए जाने के कारण पांच साल बाद अमेरिका को इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
वैसे, अमेरिका के आर्थिक इतिहास में इसका सामना कई बार करना पड़ा है। इससे ठीक पहले अक्टूबर-2013 में शटडाउन की स्थिति पैदा हुई थी, जब सत्ता में डेमोक्रेट्स की सरकार थी और बराक ओबामा राष्ट्रपति थे। तब शटडाउन 16 दिनों तक चला था और आठ लाख कर्मचारियों को इस दौरान घर बैठना पड़ा था। इससे पहले 1981, 1984, 1990 और 1995-96 के दौरान अमेरिका के पास खर्च करने तक के लिए पैसा नहीं बचा था। 1995-96 की अवधि में 21 दिनों तक शटडाउन चला था, जो 6 जनवरी 1996 को समाप्त हुआ था। राष्ट्रपति ट्रंप को शपथ ग्रहण करने के साल पूरा होने के वक्त आए इस संकट के कारण जश्न से दूरी बरतनी पड़ी और छुट्टियां भी रद्द करनी पड़ीं। शटडाउन के चलते अब पूरे देश में सरकारी कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। ऐसे में एक बार फिर देश में नौकरियों का संकट पैदा होगा। ट्रंप ने शटडाउन के लिए डेमोक्रेटों को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब तक की सबसे अच्छी स्थिति में है और देश बेहतर काम कर रहा है।
अमेरिका में सरकारी कामकाज के ठप होने से भारत को भी बड़ा झटका लगा है, क्योंकि इसका सीधा असर दोनों देशों के कारोबार पर भी पड़ेगा। अमेरिका की संघीय सरकार के ठप हो जाने से देश का निर्यात प्रभावित होगा, क्योंकि अमेरिका सबसे ज्यादा निर्यात किए जाने वाले देशों में से एक है। अमेरिकी संघीय सरकार की बंदी की खबर निश्चित रूप से भारतीय निर्यातकों के लिए बुरी खबर है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर की अवधि के दौरान अमेरिका को किए जाने वाले इंजीनियरिंग निर्यात में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी रही है। अब अमेरिका के वाणिज्य और परिवहन विभाग के 60 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को बंदी के दौरान छुट्टी पर भेज दिया जाएगा। अब देखना है कि ट्रंप इस संकट से जल्दी उबर पाएंगे या नहीं। यदि इसमें देर हुई तो दुनिया पर मंदी का संकट आएगा।

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