मोदी ने साधे एक तीर से दो निशाने

0
26
PM Narendra Modi's Second Maldives Tour

राज एक्सप्रेस, भोपाल। PM Narendra Modi’s Second Maldives Tour: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदीव के इस दौरे से दूसरे कार्यकाल में अपनी पहली यात्रा की औपचारिकता नहीं पूरी की है, बल्कि उन्होंने अपने उन दो पड़ोसी देशों को भी साध लिया है जो सामरिक और आर्थिक तौर पर भारत के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी माने जाते हैं।

दोबारा शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली विदेश यात्रा पर शनिवार को मालदीव पहुंचे। मालदीव ने भी मोदी को विदेशी शख्सियतों को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान रूल ऑफ निशान इज्जुद्दीन से सम्मानित किया। सम्मानित किए जाने के बाद पीएम मोदी ने मालदीव का आभार व्यक्ति किया और लिखा, मालदीव ने मुझे अपने देश का सर्वोच्च सम्मान दिया है और मैंने विनम्रता से इसे स्वीकार किया। यह सिर्फ मेरा सम्मान नहीं है बल्कि दोनों देशों की दोस्ती का सम्मान है। कुछ दिन पहले दोनों देशों के बीच रिश्तों की तस्वीर ऐसी नहीं थी। पिछले कुछ वर्षो में मालदीव से भारत के रिश्ते बेहतर नहीं रहे, इसी का फायदा उठाकर चीन ने मालदीव में अच्छा खासा दबदबा बनाया। मगर मालदीव में 2018 के बाद जब सरकार बदली उसके बाद से भारत के साथ रिश्तों की पहल हुई। इसी रिश्ते को और प्रगाढ़ करने के लिए पीएम मोदी ने मालदीव का दौरा करने में देर नहीं दिखाई।

मोदी ने वहां की संसद को संबोधित किया और आतंकवाद के मुद्दे पर आक्रामकता से अपनी बात रखी। बहरहाल, पीएम मोदी ने मालदीव के इस दौरे से दूसरे कार्यकाल में पहली यात्रा की औपचारिकता नहीं पूरी की है बल्कि उन्होंने अपने उन दो पड़ोसी देशों को भी साध लिया है जो सामरिक और आर्थिक तौर पर भारत के बड़े प्रतिद्वंदी हैं। मालदीव की संसद में मोहम्मद नशीद को स्पीकर के रूप में भारतीय प्रधानमंत्री के साथ बैठे देखना अच्छा लगा। पिछले साल फरवरी में अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने जब देश में आपातकाल लगाया था तो इन्हीं नशीद ने तब भारत सरकार को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। नशीद ने यह चिट्ठी श्रीलंका से लिखी थी। मोदी द्वारा भी अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में मालदीव को चुनना इस बात का दृढ़ संकेत है कि हिंद महासागर में चीनी फुटप्रिंट को किसी भी हाल बढ़ने नहीं देना है। मालदीव से अच्छे रिश्ते रखना भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि चीन मालदीव के रास्ते भारत के नजदीक आने के जुगाड़ में है।

चीन लगातार मालदीव पर अपना प्रभाव बना रहा है। दूसरा कि मोदी के शपथ ग्रहण में बिम्स्टेक देशों को आमंत्रित किया था जिसका मतलब था कि पाकिस्तान को दरकिनार करना। पाकिस्तान बातचीत शुरू करने की अपील कर रहा है, लेकिन भारत उसकी अनदेखी करते हुए आगे बढ़ रहा है। भारत की यह रणनीति सही है कि अंतरराट्रीय मंचों पर उसे अलग थलग किया जा रहा है जबकि दूसरे पड़ोसी देशों को तरजीह दी जा रही है। मालदीव और श्रीलंका की यात्रा इसकी अगली कड़ी है और पाक को सबक सिखाने का बढ़िया तरीका भी है। मालदीव और भारत अपने बेहतर रिश्ते की ओर बढ़ चले हैं। दोनों देशों के लिए आंतक से लड़ना मुख्य मुद्दों में शामिल है। शायद इसीलिए मालदीव की संसद से पीएम मोदी ने आतंक पर सीधा प्रहार किया, ताकि उसकी गूंज दूर तक जाए।

No ratings yet.

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image