तनाव टालें ईरान और अमेरिका

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Saudi Oil Tanker Attack

राज एक्सप्रेस, भोपाल। सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों ( Saudi Oil Tanker Attack) को यूएई के समुद्री तट के पास निशाना बनाए जाने का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। इस घटनाक्रम का असर भारत में भी दिखा है व तेल की कीमतों में 1.78 फीसदी तक की वृद्धि देखी गई। यह स्थिति आने वाले दिनों में और बिगड़ेगी।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर होता दिख रहा है। सोमवार को सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को यूएई के समुद्री तट के पास निशाना बनाया गया। हालांकि, अब तक न तो सऊदी अरब और न ही यूएई ने इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया है। हॉमरूज जलडमरूमध्य के बाहरी हिस्से में स्थित फुजैरा पोर्ट पर यह घटना हुई है। फुजैरा पोर्ट तेल निर्यात के लिहाज से महत्वपूर्ण है और ज्यादातर खाड़ी देशों का तेल निर्यात इसी पोर्ट के रास्ते से होकर गुजरता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और ईरान से भी ज्यादातर तेल का निर्यात हॉमरूज जलडमरूमध्य से होता है और यह आंकड़ा कम से कम 15 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। समुद्र में पैदा होने वाला विश्व का लगभग 30 फीसदी तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। 2017 में इसी रास्ते से 17.2 मिलियन क्रूड और कच्चा तेल निर्यात हुआ था। हॉमरूज जलडमरूमध्य ओपेक देशों के लिए बहुत हद तक एकमात्र रास्ता है जिसके जरिए वह तेल निर्यात कर सकते हैं।

इस जलमार्ग के रास्ते से लिक्विफाइज नैचुरल गैस (एलएनजी) भी होकर गुजरता है और दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक कतर भी इसी मार्ग का प्रयोग करता है। कतर लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है। सोमवार को हुए इस घटनाक्रम का असर भारत में भी दिखा और तेल की कीमतों में 1.78 फीसदी तक की वृद्धि भी देखी गई। हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि सऊदी के तेल टैंकरों पर किसने हमला किया, लेकिन इसके बावजूद यह घटना बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों में हुई है। अमेरिका और ईरान के संबंध पिछले एक साल में बेहद खराब हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन में ईरान के साथ हुए न्यूक्लियर डील को खत्म कर दिया और ईरान पर कठोर प्रतिबंध फिर से लागू हो गए। भारत और चीन जैसे देशों को दी गई रियायत भी खत्म हो गई और इन सबका असर ईरान के अर्थव्यवस्था पर बुरी तरह से पड़ा।

अमेरिका ने अपने युद्धपोत यूएसएस आरलिंगटन और यूएसएस अब्राहम लिंकन को पश्चिमी एशिया क्षेत्र में तैनात किया है। अमेरिका के रक्षा सलाहकार ने पहले ही कहा था कि अमेरिका के खिलाफ ईरान युद्ध की तैयारी कर रहा है। ईरान के आक्रमण करने की आशंका का हवाला देते हुए अमेरिका ने पश्चिम एशिया में पैट्रियट मिसाइलें भी तैनात की हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा का जायजा लेने इराक का दौरा भी किया था। अगले साल ट्रंप को फिर से चुनाव के लिए जाना है। हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ और प्रतिबंध एवं प्रॉक्सी वॉर की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हो सकता है कि इस साजिश में ईरान का वाकई कोई हाथ न हो, लेकिन ऐसी स्थिति का खामियाजा दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।

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