भारत ने परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-5 का सफल परीक्षण कर से टेंशन में चीन और पाकिस्तान

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भारत ने परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-5 का सफल परीक्षण कर से टेंशन में चीन और पाकिस्तान

पहली नजर में इसमें कोई नई बात नहीं लगती है। पृथ्वी, आकाश और नाग से लेकर अग्नि तक भारत कई तरह की मिसाइलें बना चुका है। उन सबके परीक्षण कामयाब रहे हैं और कम से कम मिसाइल व रॉकेट तकनीक के क्षेत्र में भारत की महारत पर किसी को कभी शक नहीं रहा। लेकिन गुरुवार को हुआ अग्नि-5 का परीक्षण एक अलग महत्व रखता है। ताजा परीक्षण के बाद भारत उन पांच देशों के साथ खड़ा हो गया है, जो इंटर-कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता रखते हैं। अग्नि-5 मिसाइल 5 हजार से 5,500 किलोमीटर तक मार कर सकती है। यानी इस लिहाज से यह पूरे एशिया और यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक मार कर सकती है। इसकी जद में पूरा पाकिस्तान और चीन भी आएंगे। परमाणु बम की क्षमता वाली अग्नि-5 का कामयाब परीक्षण यह संदेश भी देता है कि भारत अब रक्षा आवश्यकताओं को पाकिस्तान के संदर्भ में ही नहीं देख रहा, बल्कि अब वह उससे कहीं आगे बढ़कर सोच रहा है। यही रास्ता है, जो हमें विश्व शक्ति बनने की ओर ले जाता है।
अग्नि-5 के इस परीक्षण को मिसाइल तकनीक व नियंत्रण संधि से भी जोड़कर देखा जाएगा। पिछले साल अक्टूबर में ही भारत इस संधि में शामिल हुआ था। इसके पहले तक जब भारत कोई मिसाइल परीक्षण करता था, तो पश्चिमी देश उसका विरोध इस बिना पर करते थे कि वह बिना मिसाइल संधि पर दस्तखत किए परीक्षण कर रहा है। हालांकि, इस संधि में शामिल होना न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल होने जितना कठिन भी नहीं था, जहां चीन भारत का रास्ता रोककर खड़ा है। कुछ अन्य कारणों से इटली ने जरूर भारत को इसमें शामिल होने से रोका, अन्यथा भारत के लिए कोई बाधा थी ही नहीं, क्योंकि चीन अभी तक इस संधि में शामिल ही नहीं हुआ है। भारत अब बिना रोक-टोक इस तरह की मिसाइल तकनीक विकसित कर सकता है, बल्कि संधि के सदस्य देशों से तकनीक ले भी सकता है या उन्हें तकनीक दे भी सकता है। एक समय था, जब इस संधि पर दस्तखत न करने के कारण भारत को रूस से मिसाइल तकनीक हासिल करने से रोक दिया गया था। तब भारत ने खुद इसकी तकनीक विकसित की।
मिसाइल तकनीक के मामले में भारत की कामयाबी हमें हैरत में भी डालती है और गौरव बोध भी देती है, लेकिन कुछ सवाल भी खड़े करती है। इतनी उन्नत तकनीक विकसित करने वाला हमारा देश छोटी-छोटी रक्षा तकनीक के मामले में क्यों दूसरे देशों का मुंह देखता है? क्यों हम आज भी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक बने हुए हैं? हम आकाश से मार करने वाली मिसाइल बना रहे हैं, लेकिन छोटी तोप और मशीन गन तक में हम दूसरे देशों पर निर्भर हैं। मिसाइल व रॉकेट तकनीक के क्षेत्र में हमने जो सफलता हासिल की है, उसे रक्षा के दूसरे क्षेत्रों तक कैसे ले जाया जाए, यह बड़ी चुनौती है।

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