इमरान के मोदी प्रेम के मायने

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Imran Khan PM Narendra Modi

राज एक्सप्रेस,भोपाल। बहरहाल, पहले चरण के मतदान से ठीक पहले आए इमरान खान (Imran Khan PM Narendra Modi)के इस बयान को लेकर अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल है कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे कड़े फैसले के बावजूद इमरान खान मोदी को फिर प्रधानमंत्री क्यों देखना चाहते हैं? असल में इसके पीछे पाकिस्तान की दूसरी मजबूरी है। इमरान का नया पाकिस्तान इस समय चौतरफा समस्याओं से घिरा है, उसे भारत ही पार लगा सकता है।

पाकिस्तान के चुनाव में भारत का मुद्दा बनना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन भारत के आम चुनाव-2019 में पाक का नाम बार-बार विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से जिस तरह से उठाया जा रहा है वह निश्चित तौर पर रोचक हो गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का यह बयान, अगर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोबारा चुनाव जीतकर आते हैं तो भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता की ज्यादा संभावना है से दिलचस्पी और बढ़ गई है। यह अटकल भी लगाई जाने लगी है कि आखिर नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान बालाकोट का झटका खा चुके इमरान ने ऐसा बयान क्यों दिया है। वह भी तब जबकि मोदी साफ कह चुके हैं कि पाकिस्तान आतंकी को पनाह देगा तो भारत घर में घुसकर मारेगा। इमरान खान का यह बयान पहले चरण के मतदान से ठीक पहले आया। तमाम चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में भाजपा के सत्ता में लौटने की संभावना जताई गई है। माना जा रहा है कि छवि को दुरुस्त करने में जुटे इमरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह किसी के विरोधी नहीं हैं, बल्कि ईमानदारी से शांति की पहल चाहते हैं।

बहरहाल, पहले चरण के मतदान से ठीक पहले आए इमरान खान के इस बयान को विपक्षी पार्टियों ने बड़ा मुद्दा बना लिया है। हालांकि, अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल है कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे कड़े फैसले के बावजूद इमरान खान मोदी को फिर प्रधानमंत्री क्यों देखना चाहते हैं? असल में इसके पीछे पाकिस्तान की दूसरी मजबूरी है। माना जा रहा है कि आर्थिक रूप से बदहाल पाक के प्रधानमंत्री इमरान ने यह बयान पश्चिमी देशों और बड़ी शक्तियों के बीच अपनी छवि सुधारने की कोशिश के तहत दिया। इमरान सरकार के सामने पाकिस्तान की इकोनॉमी को पटरी पर लाने की एक बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान को फाइनैंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफटीए) की ओर से ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। अमेरिकी सांसदों के विरोध के कारण पाक को इंटरनैशनल मॉनेटरी फंड से राहत पैकेज मिलना भी मुश्किल होता जा रहा है।

पाक अभी तक आर्थिक संकट का मुकाबला खाड़ी देशों से वित्तीय मदद के लिए करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन यह मदद उसके लिए पर्याप्त नहीं है। पाकिस्तान की इकोनॉमी में सुधार के लिए इमरान खान पश्चिमी देशों से मदद लेना चाहते हैं और इस वजह से वह अपनी साख मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान को अपने परंपरागत सहयोगी चीन से भी मदद मिल रही है लेकिन इसके बावजूद पाक की इकोनॉमी के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। आईएमएफ ने 2018-19 के लिए पाक की ग्रोथ क अनुमान घटाकर 2.8 फीसदी व 2019-20 के लिए 2.9 फीसदी किया है। पाकिस्तानी रुपए में कमजोरी आने के बाद पाकिस्तान का फ्यूल इम्पोर्ट बिल भी बढ़ रहा है। इसके अलावा रेटिंग एजेंसियों की ओर से सॉवरेन रेटिंग डाउनग्रेड करने से भी आर्थिक मुश्किलें बढ़ी हैं। एफएटीएफ की ओर से पाक को ग्रे लिस्ट में रखने से नए विदेशी फंड के साथ ही इन्वेस्टमेंट पर भी रोक लगी है।

फरवरी में पाकिस्तान का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व आठ अरब डॉलर से कुछ अधिक था, जो लगभग दो माह के इम्पोर्ट के लिए ही पर्याप्त है। एक वर्ष पहले पाकिस्तान का फॉरेन रिजर्व 12 अरब डॉलर का था। पिछले दो वर्षो में डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया भी लगभग 40 फीसदी गिरा है। आईएमएफ का कहना है कि पाकिस्तान का अनुमानित बजट घाटा 7.2 फीसदी रह सकता है और अगले वर्ष इसमें और बढ़ोतरी होने की आशंका है। पाकिस्तान में महंगाई दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान दिया गया है। गौरतलब है कि इमरान खान सरकार ने आठ माह पहले सत्ता संभाली थी और इस अवधि में देश की इकोनॉमी चरमरा गई है। महंगाई अब 9.41 फीसदी पर है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया भी बहुत कमजोर हो गया है। पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से लेकर फूड आइटम्स तक प्रत्येक चीज महंगी हो रही है। सरकार कोई विदेशी निवेश लाने में नाकाम रही है। वह देश में कारोबार के मौके बनाने में भी बुरी तरह असफल हुई है।

पाकिस्तान की जनता की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। महंगाई की वजह से सब्जियों, पेट्रोल, डीजल की ऊंची कीमत को लेकर जनता पहले से ही हलकान थी, अब वहां दूध के दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। कराची डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने अचानक दूध के दाम में 23 रुपए लीटर तक बढ़त कर दी है और अब दाम 120 रुपए लीटर तक पहुंच चुका है। वहीं खुदरा बाजार में दूध 100 से 180 रुपए लीटर तक बिक रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तानी रुपए का वैल्यू भारतीय रुपए के मुकाबले करीब आधा ही है। महंगाई से पहले से ही त्रस्त पाकिस्तान की जनता इससे काफी गुस्से में है। डेयरी एसोसिएशन ने कहा कि सरकार से उसने पहले कई बार अनुरोध किया था कि दाम बढ़ाया जाए, लेकिन सरकार की तरफ से किसी तरह की प्रतिक्रिया न मिलने पर उसे खुद ही यह निर्णय लेना पड़ा है।

पाक का चालू खाता घाटा बढ़कर करीब 18 अरब डॉलर हो गया है, जो इतिहास का सबसे बड़ा घाटा है। वहीं विदेशी निवेश पूंजी भंडार घटकर नौ अरब डॉलर पर आ गया है। इससे दो महीने से ज्यादा का आयात बिल भी नहीं चुकाया जा सकता। यह चिंता का विषय इसलिए है कि पाकिस्तान को जितने पेट्रोलियम पदार्थो की जरूरत है, उसका चौथा हिस्सा आयात किया जाता है। जल्दी वह समय आएगा, जब पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें नजर आएंगी। पाक का व्यापार घाटा भी 25 अरब डॉलर हो गया है। पिछले एक साल में पाक का आयात काफी बढ़ा है, जबकि निर्यात बहुत कम हुआ है। इस वित्त वर्ष में उसके आयात में करीब छह अरब डॉलर की वृद्धि हुई है, जबकि निर्यात केवल दो अरब डॉलर का हुआ। पाक का सार्वजनिक कर्ज भी पिछले एक साल में 13 अरब डॉलर बढ़ा है, जिसमें बाहरी कर्ज करीब आठ अरब डॉलर है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 1.3 प्रतिशत घटा है। उसकी जीडीपी के बारे में अलग-अलग तरह की बातें हो रही है। आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) के मुताबिक, पाकिस्तान की जीडीपी की दर 3.6 फीसदी है, जबकि पाक सत्ता प्रतिष्ठान उसे 5.4 प्रतिशत बता रहा है।

इमरान खान को जिताने में युवाओं ने बड़ी भूमिका अदा की है। पाकिस्तान का युवा अब दोनों देशों के बीच तनाव को पसंद नहीं कर रहा है। वहां का युवा कई मौकों पर अपनी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तक कर चुका है। नई सरकार को देश के 64 प्रतिशत युवाओं का समर्थन चाहिए, तो उसे हर साल 13 लाख रोजगार का इंतजाम करना होगा, जिसके लिए बड़ी रकम की जरूरत होगी। यह भारत के बिना तो संभव नहीं है। इमरान जानते हैं कि युवाओं को लेकर मोदी का जो विजन है, वह उनके भी काम आ सकता है। इसीलिए वे चुनाव में मोदी की जीत की कामना कर रहे हैं। फिर इमरान के सामने ‘फौज के आदमी’ की छवि तोड़ने की भी चुनौती है। कुल मिलाकर, इमरान इस समय ऐसे चौराहे पर खड़े हैं, जहां से उन्हें भारत ही रास्ता दिखा सकता है। अगर इमरान ने मोदी की तारीफ की है, तो उसके मायने उनके लिए बेहद गंभीर हैं।
राजेश विश्वकर्मा (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

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