मुद्दों की बात करें आजम खान

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Azam Khan's Statement

राज एक्सप्रेस, भोपाल। सपा नेता आजम खान (Azam Khan’s Statement) और भाजपा नेता जयाप्रदा के बीच अदावत आज की नहीं है बल्कि दुश्मनी की खाई काफी पहले पैदा हो गई थी। इस अदावत को रामपुर के लोग 2009 के लोकसभा चुनाव में देख चुके हैं। अब 2019 में फिर देखने को मिल रही है। आजम खान ने जयाप्रदा को लेकर जो कुछ कहा है, वह बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है। नेताओं की जुबान पर लगाम न लगा पाने का खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।

समाजवादी पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरा आजम खान ने 17 साल पहले रामपुर की सियासत में अपने सबसे बड़े सियासी दुश्मन नूर बानो को मात देने के लिए जिस तुरुप के पत्ते का इस्तेमाल किया था। आज जब उसी तुरुप के पत्ते को भाजपा ने उन्हीं के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार दिया है तो आजम खान उनके खिलाफ बदजुबानी पर उतर आए हैं और सारी सीमांए पार कर दी हैं। आजम खान की ताजा टिप्पणी को लेकर जया प्रदा ने कहा है कि इस बार तो उन्होंने हद पार दी है। जया प्रदा ने कहा कि अब मेरी क्षमता खत्म हो गई है और आजम खान ने इतनी दुश्मनी पैदा कर दी है कि अब वो भाई क्या, मेरे कुछ नहीं बचे हैं। दोनों नेताओं के बीच अदावत आज की नहीं है बल्कि दुश्मनी की खाई काफी पहले पैदा हो गई थी। इस अदावत को रामपुर के लोग 2009 के लोकसभा चुनाव में देख चुके हैं। दरअसल, आजम खान के विरोध के बावजूद जया प्रदा को मुलायम ने सपा के टिकट पर रामपुर लोकसभा सीट से 2009 का चुनाव लड़ाया। आजम खान इससे नाराज हो गए और उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर जया प्रदा का पुरजोर विरोध किया। हालांकि, वो जया प्रदा को हराने में सफल नहीं हो पाए, लेकिन दोनों के बीच की तल्खी हर तरफ चर्चा का विषय बनी।

यहां तक कि सपा से आजम खान का साथ भी छूट गया और उन्हें निष्कासित कर दिया गया। जया प्रदा की अश्लील तस्वीरें भी रामपुर में बांटने के आरोप लगे। अब चुनाव प्रचार में जया प्रदा खुद यह दावा कर रही हैं कि आजम खान कुछ भी कर सकते हैं और मुझे बदनाम करने के लिए मेरी अश्लील फोटोग्राफ्स फैलाई गईं। हालांकि, आजम खान और जया प्रदा के बीच विवाद की बड़ी वजह पूर्व सपा नेता अमर सिंह को माना जाता है। सपा के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह बेहद करीबी रहे हैं। 2004 में अमर सिंह के कहने पर आजम खान ने ही जया प्रदा को रामपुर से लोकसभा चुनाव लड़वाया, जिसमें उन्हें जीत मिली, लेकिन जल्द अमर सिंह व आजम खान के रिश्तों में आई खटास का असर जया प्रदा और आजम खान के बीच दिखाई देने लगा। जब 2009 में दोबारा जया प्रदा को सपा ने टिकट दिया तो आजम खान खान नाराज हो गए और उन्होंने टिकट से लेकर चुनाव लड़ने तक जया प्रदा की मुखालफत की। दोनों नेताओं के बीच की नाराजगी उनके बयानों में भी अक्सर देखने को मिलती रही है। चुनाव से पहले साल 2018 में जब पद्मावत फिल्म आई तो उसमें खिलजी के रूप में दिखाए गए विलेन की तुलना जया प्रदा ने आजम खान से की। आजम खान भी जया प्रदा को नचनिया कहकर उनकी आलोचना करते रहे। यहां तक कि जया प्रदा सार्वजनिक मंच से रोते हुए आजम खान के व्यवहार की आलोचना करती रही हैं।

अब जबकि दोनों 2019 का लोकसभा चुनाव आमने-सामने लड़ रहे हैं तो बयानबाजी का यह दौर सीमा पार करने लगा है। जया प्रदा चुनाव प्रचार में वर्ष 2009 का जिक्र करते हुए आजम खान पर अपनी अश्लील फोटो शेयर करने के आरोप लगा रही हैं। आजम खान ने तो अंडरवियर तक को लेकर टिप्पणी कर दी है, जिसे लेकर हर तरफ से उनकी आलोचना हो रही है। हालांकि, अब रामपुर से भारतीय जनता पार्टी्र की उम्मीदवार जया प्रदा पर विवादित बयान को लेकर चौतरफा घिरने के बाद सपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रत्याशी आजम खान ने कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। आजम ने कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया और अगर वह दोषी साबित होते हैं तो चुनाव से हाथ पीछे कर लेंगे। उल्लेखनीय है कि रविवार को रामपुर की शाहबाद तहसील में आयोजित एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खान ने बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने जया का नाम लिए बगैर वहां मौजूद लोगों से पूछा, क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 साल जिसने रामपुर वालों का खून पिया, जिसे उंगली पकड़कर हम रामपुर में लेकर आए, उसने हमारे ऊपर क्या-क्या इल्जाम नहीं लगाए। क्या आप उसे वोट देंगे? आजम ने आगे कहा कि आपने 10 साल जिनसे अपना प्रतिनिधित्व कराया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे। मैं 17 दिन में पहचान गया कि..।

बयान पर घिरे आजम ने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था और अगर वह दोषी साबित हुए तो चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा, मैं रामपुर से नौ बार विधायक और एक बार मंत्री रहा हूं। मुझे पता है क्या कहना है। अगर कोई यह साबित कर दे कि मैंने किसी नाम लिया और किसी का नाम लेकर अपमान किया। अगर यह साबित होता है, तो मैं चुनाव से हाथ पीछे कर लूंगा। आजम खान के इस बयान पर महिला आयोग ने आपत्ति जताई है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने खान की टिप्पणी को बेहद शर्मनाक करार दिया और कहा कि महिला आयोग उन्हें एक कारण बताओ नोटिस भेज रहा है। वहीं, बीजेपी ने इसे निहायत अभद्र और आपत्तिजनक करार देते हुए कहा कि यह राजनीति के स्तर में गिरावट की पराकाष्ठा है। इतना ही नहीं, आयोग ने चुनाव आयोग से गुजारिश की है कि वह आजम खान के चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करे। भाजपा भी आजम को बख्शने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने द्रौपदी के चीरहरण से तुलना करते हुए मुलायम सिंह यादव से कहा है कि वह भीष्म पितामह की तरह मौन साधने की गलती न करें। सुषमा ने ट्वीटर पर लिखा, मुलायम भाई- आप पितामह हैं समाजवादी पार्टी के। आपके सामने रामपुर में द्रौपदी का चीरहरण हो रहा है। आप भीष्म की तरह मौन साधने की गलती मत करिए। सुषमा ने ट्वीट में अखिलेश यादव, जया भादुरी और डिंपल यादव को भी टैग किया है।

चुनाव आते ही नेताओं को जनता की याद आने लगती है। वहीं नेताओं में एक नये जोश का संचार भी हो जाता है। जोश आता है, तो बयानबाजियां होने लगती हैं। फिर शुरू होते हैं बिगड़े बोल। देश में आम चुनाव होने वाले हैं, नेताओं की जुबान फिर से फिसलने लगी है। फिर टपकने लगा है उनकी जुबान से अपने विरोधियों के लिए विष। कभी सांप्रदायिक, तो कभी आपत्तिजनक और अपमानजनक बयान लगातर सामने आ रहे हैं। इस बयानबजी में कोई भी पार्टी पीछे नहीं है। लेकिन, इन बयानों का क्या असर पड़ता है, इससे नेताओं को कोई सरोकार नहीं होता। वे तो बस टीवी पर अपनी टीआरपी बढ़ाने, अखबार की सुर्खियां बनने व जनता की तालियां बटोरने तक ही खुद को केंद्रित रखते हैं। यह भी कहा जा सकता है कि येन-केन-प्रकरेण नेता चर्चा में बना रहना चाहते हैं। हमारे देश में नेताओं की बदजुबानी तो आम बात है। चुनाव आते ही नेताओं की फौज जनता का रुख करती है। इस दौरान अपने भाषणों में कब उनके बोल बिगड़ जाएं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

वर्तमान में ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों अमर्यादित बयानों की बाढ़ सी आ गई हो। अनैतिक भाषा का प्रयोग करके हर पार्टी अपने-अपने स्तर पर इसमें योगदान दे रही है। अगर किसी को याद होगा तो वह इस तथ्य से भलीभांति परिचित होगा कि असहमतियां और विरोध शुरू से राजनीति का अभिन्न अंग रहे हैं। कई कद्दावर नेता ठोस तर्को के आधार पर विभिन्न विषयों पर जोरदार ढंग से अपना विरोध जताते रहे हैं। आजम के बयान को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
जयप्रकाश (वरिष्ठ पत्रकार)

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