जहर घोलना बंद करें आजम खान

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Azam Khan's Controversial Statement

राज एक्सप्रेस,भोपाल। जया प्रदा (Azam Khan’s Controversial Statement)पर दिए गए एक विवादित बयान को लेकर आजम खान बुरी तरह घिर गए हैं। बवाल के बाद वे सफाई दे रहे हैं, तो भाजपा बख्शने के मूड में नहीं है। बयान की गर्मी जो भी असर दिखाए, मगर इस तरह के बयानों के लिए लक्ष्मणरेखा जरूर खींचनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के दौरान अपनी रैलियों में विवादित बयान देने वाले नेताओं पर कार्रवाई न करने को लेकर चुनाव आयोग की सीमित शक्तियों को लेकर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट की यह नाराजगी ऐसे समय आई है, जब सपा नेता आजम खान के बयान पर हंगामा मचा हुआ है। आजम खान ने भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसका तूफान लगातार बढ़ता जा रहा है। आजम ने जो कहा, उसका उल्लेख यहां करना तो ठीक नहीं होगा, मगर उनके बयान को अश्लील या बेहद निचले दर्जे का मानकर खारिज करना सही नहीं होगा। आजम की गिनती उन नेताओं में होती है, जो अपने काम से ज्यादा जुबान के लिए जाने जाते हैं। अक्सर विवादित बायनों की वजह से चर्चा में रहने वाले आजम खान रामपुर से भाजपा प्रत्याशी जया प्रदा के खिलाफ मर्यादा लांघने के बाद चौतरफा घिर गए हैं। अखिलेश यादव की मौजूदगी में आजम ने जया प्रदा का नाम लिए बिना जो कहा उसको लेकर पार्टी की किरकिरी हो रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने द्रौपदी के चीरहरण से तुलना करते हुए मुलायम सिंह यादव से कहा है कि वह भीष्म पितामह की तरह मौन साधने की गलती न करें।

जया प्रदा पर दिए गए विवादित बयान को लेकर आजम खान ने कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। आजम ने कहा कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया और अगर वह दोषी साबित होते हैं तो चुनाव से हाथ पीछे कर लेंगे। बयान पर घिरे आजम ने कहा, मैं रामपुर से नौ बार विधायक और एक बार मंत्री रहा हूं। मुझे पता है क्या कहना है। अगर कोई यह साबित कर दे कि मैंने किसी का नाम लिया और किसी का नाम लेकर अपमान किया। अगर यह साबित होता है, तो मैं चुनाव से हाथ पीछे कर लूंगा। अब इस बात का क्या फायदा? आजम ने जो कहा, उसका संदेश तो साफ था। फिर नाम लेना या न लेना मायने नहीं रखता। सवाल यह है कि क्या नेता अब जनता से विकास या उनकी दूसरी समस्याओं को दूर करने का वादा करने के बजाय घटिया बयानों को ही आधार बनाकर चुनाव जीतना चाहते हैं? देश में इस तरह की बयानबाजी करने वाले नेताओं की कमी नहीं है। हर पार्टी में न जाने कितने ‘आजम खान’ हैं। मगर आज तक एक भी पार्टी ने उदाहरण पेश नहीं किया है।

बहरहाल, आजम खान के जिस बयान पर आज तूफान मचा है, उसे समय के साथ भुला दिया जाएगा। ऐसा हर उस बयान के साथ किया गया है, जिसने विवाद पैदा किया या समाज में जहर घोला। अगर पहली बार ही इस तरह के बयान पर चुनाव आयोग या जनता की तरफ से सख्ती दिखाई गई होती तो आज आजम की फिर से विवाद खड़ा करने की जुर्रत नहीं होती। रामपुर का चुनाव इस बयान के बाद क्या करवट लेगा, वहां की जनता आजम को खारिज करेगी या नहीं, यह समय के साथ पता चलेगा, लेकिन अभी इस तरह के बयानों के लिए एक लक्ष्मणरेखा जरूर खींचनी होगी।

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