चीन के माल पर बैन आसान नहीं

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Chinese Goods Boycott

राज एक्सप्रेस, भोपाल। संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी मसूद अजहर को बचाने के लिए भारत में (Chinese Goods Boycott) चीन का जमकर विरोध हो रहा है। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि चीन के सामानों पर बैन लगा दिया जाए। मगर यह संभव नहीं है। भारत अगर ऐसा करने जाएगा, तो अपना ही नुकसान कर बैठेगा।

चीन एक बार फिर पुलवामा आतंकी हमले के गुनहगार जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मसूद अजहर का सुरक्षा कवच बन गया, जिससे भारतीयों में चीन के खिलाफ गुस्सा है। सोशल मीडिया पर भारतीय चीनी सामान के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं। कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश भर के व्यापारियों से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया है। व्यापारी 19 मार्च को चीन के सामानों की होली जलाएंगे। कैट का कहना है कि समय आ गया है जब चीन को पाकिस्तान का साथ देने के लिए और हर तरह से पाकिस्तान की मदद करने जो भारत के विरुद्ध काम आती है उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। कैट ने केंद्र सरकार से मांग की है कि चीनी वस्तुओं के आयात पर 300 से 500 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगा दी जाए। देखा जाए तो जब भी चीन के साथ तनाव की स्थिति पैदा होती है, तो चीनी वस्तुओं पर बैन लगाने की अपील होने लगती है। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है, जितना समझा जा रहा है। सवाल यह भी है कि क्या भारत चीनी वस्तुओं पर बैन लगा सकता है? भारत ऐसा करता है तो अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा और क्या तब चीन पर दबाव बनाने में भारत सफल हो पाएगा?

सबसे पहले तो भारत के हाथ विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के नियमों से बंधे हैं। डब्लूटीओ किसी भी देश को आयात पर भारी-भरकम प्रतिबंध लगाने से रोकता है। साल 2016 में राज्यसभा में तत्कालीन वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद कहा था कि भारत विश्व व्यापार संगठन के नियमों की वजह से चीनी वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकता है। दूसरी तरफ यह गारंटी नहीं है कि चीनी सामान के बहिष्कार से उसके रुख में तब्दीली जरूर आएगी। भारत आर्थिक रूप से चीन के लिए बहुत कम अहमियत रखता है क्योंकि चीन ने व्यापार के मामले में किसी एक देश पर निर्भर न होकर कई देशों पर निर्भर है। 2017 में चीन के कुल निर्यात में भारत का सिर्फ तीन फीसदी ही योगदान है। चीन की अर्थव्यवस्था का आकार भी भारत की अर्थव्यवस्था का पांच गुना है। ऐसा माना जाता है कि व्यापार के मामले में चीन की तुलना में भारत ज्यादा मजबूत स्थिति में है क्योंकि भारत चीन के मोबाइल फोन के लिए बड़ा बाजार है। यह सच है कि चीन मोबाइल फोन का सबसे ज्यादा निर्यात भारत को करता है।

इसमें कोई शक नहीं है कि भारतीय बाजार चीनी कंपनियों के लिए एक मौका है, लेकिन भारत ही चीन का एकमात्र बाजार नहीं है, जबकि इसके विपरीत, भारत अब चीनी कंपनियों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। 2017 में भारत के कुल टेलीफोन आयात में 71.2 फीसदी आयात चीन से किया गया। 2018 की अंतिम तिमाही में भारत के कुल मोबाइल फोन की खपत में 44 फीसदी चीन का हिस्सा था। इन आंकड़ों को देखें तो दोनों देशों के बीच यह व्यापार असंतुलन चीन के पक्ष में ही है। अगर चीन पर दबाव बनाना है तो भारत को चीन के साथ आयात-निर्यात में कायम असंतुलन को पाटना होगा।

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