आर्थिक भगोड़ों पर कसा शिकंजा

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Vijay Mallya Extradition

राज एक्सप्रेस, भोपाल। ब्रिटेन की ओर से विजय माल्या के प्रत्यर्पण (Vijay Mallya Extradition)का आदेश मिलना भारत सरकार की बड़ी उपलब्धि है। अब उम्मीद यह भी जगी है कि देर-सबेर उन लोगों को भी भारत लाया जाएगा, जो देश का पैसा लेकर विदेशों में छिपे हैं। फिलहाल यही कहा जा सकता है कि माल्या के प्रत्यर्पण के लिए भारत ने बड़ी बाधा पार कर ली है। यह नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और ललित मोदी सहित दूसरे आर्थिक भगोड़ों के लिए कड़ा संदेश है।

ब्रिटेन की ओर से विजय माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश मिलना भारत सरकार की जितनी बड़ी उपलब्धि है उससे कहीं ज्यादा बड़ी सरकार से देशवासियों की उम्मीदें हैं। ये उम्मीदें हैं कि सरकार और भारतीय जांच एजेंसियां इसी तरह अन्य आर्थिक भगोड़ों को देश वापस आने, देश की पाई-पाई का हिसाब सूद समेत देने व उन्हें सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी। हमारी एजेंसियां ऐसे लोगों को इतना विवश कर देंगी की वे विश्व के किसी भी कोने में अपना मुंह न छिपा पाएं। देश को लूट कर जाने वाले ऐसे आर्थिक भगोड़ों को हर कहीं से अपने देश जाने और यहां प्रत्यर्पण करने बाध्य होना पड़े। फिर वो विजय माल्या हो, नीरव मोदी या मेहुल चोकसी इन भगोड़ों को भारत आकर अपना हिसाब देना होगा। विजय माल्या के प्रत्यर्पण के आदेश पर ब्रिटेन के गृहमंत्री साजिद जावीद के हस्ताक्षर को भारत की कूटनीतिक जीत तौर पर भी देखा जाना चाहिए। लंदन की निचली अदालत में लंबी लड़ाई के बाद भारत को 10 दिसंबर को कामयाबी मिली थी।

लंदन के कोर्ट ने उस समय माल्या की सारी दलीलें खारिज कर दीं। माल्या के पक्ष में वहां बड़े-बड़े वकील जिरह कर रहे थे। जब सारी दलीलें विफल हो गईं तो मानवाधिकार का मुद्दा उठाया गया और बताया गया था कि भारत की जेलों में अमानवीय स्थिति है। इसमें भी भारत की जीत हुई थी। कोर्ट के आदेश के बाद से ही भारतीय विदेश मंत्रालय ब्रिटिश सरकार से संपर्क में था। इससे यह संदेश जाता है कि मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध करने वालों को सख्त सजा दिलाने के लिए कटिबद्ध है। हालांकि, माल्या का प्रत्यर्पण अब भी फाइनल नहीं हुआ है। उसके पास इस आदेश के विरुद्ध अपील करने के लिए दो हफ्ते का समय है। यदि अपील मंजूर नहीं होती है तो उसे हर हाल में 20 दिनों के भीतर भारत को सौंपना होगा। पर अब उच्च न्यायालय माल्या के पक्ष में कोई फैसला देगा ऐसा मानने का कोई कारण नहीं दिखता है। चूंकि निचली न्यायालय में मामला जितना उलझाया जा सकता है उतना उच्च न्यायालय में नहीं।

यदि हम गौर करें तो पाएंगे कि देश में माल्या की तरह विदेश भागने वाले आर्थिक आपराधियों की अच्छी खासी संख्या है। जिनसे यदि वसूली की जाए तो रकम कई लाखों करोड़ों तक जा सकती है। माल्या के बाद नीरव मोदी जो 11 हजार 400 करोड़ रुपए का घोटाला करके भागा है और उसका साथी हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने प्रत्यर्पण से बचने की कोशिश की है। मेहुल ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। चोकसी पीएनबी घोटाले में वांछित है। उसने एंटीगुआ में भारतीय उच्चायोग को पासपोर्ट के साथ ही 177 डॉलर का ड्राफ्ट भी सौंपा है। वहीं ललित मोदी पर 2008 से 2010 तक आईपीएल का कमिश्नर रहते भ्रष्टाचार का आरोप लगा। आरोप था कि उन्होंने दो नई टीमों की नीलामी के दौरान गलत तरीके अपनाए और किसी लाभ के बदले एक पक्ष को फायदा पहुंचाया। इसके अलावा मोदी ने आईपीएल का ठेका 425 करोड़ में मॉरिशस की कंपनी वल्र्ड स्पोर्ट्स को दिया था। मोदी पर इस सौदे के बदले 125 करोड़ रुपए का कमीशन लेने का भी आरोप है। इन आरोपों के बाद मोदी को वर्ष 2010 में आईपीएल कमिश्नर के पद से हटा दिया गया था। उसी साल वह देश छोड़कर ब्रिटेन भाग गए। तब से भारत सरकार इन सबके प्रत्यर्पण की कोशिशें करने का दावा कर रही है।

संजय भंडारी हथियारों के एक विवादित दलाल के तौर पर जाना जाता है। उस पर सेना के हथियार खरीद में गलत तरीके से शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। भंडारी और एक ऑफसेट कंपनी के खिलाफ टैक्स चोरी के मामले में संजय भंडारी के आवास की तलाशी के दौरान आयकर विभाग को सेना के हथियारों की खरीद से संबंधित गोपनीय दस्तावेज मिले थे। इन दस्तावेजों में सैन्य साजो सामान के खरीद के लिए बनाई गई अनुबंध समिति की बैठक के कुछ मिनट की प्रतियां भी थीं। इसी साल दिल्ली की एक अदालत ने के संजय भंडारी को सरकारी गोपनीय अधिनियम के मामले में घोषित अपराधी ठहराया है। बताया जाता है कि भंडारी नेपाल के रास्ते देश से भागने में कामयाब रहा है। बीते वर्ष मोदी सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ नया कानून बनाकर एजेंसियों को काफी मजबूती दी है। इसके तहत भगोड़ा घोषित होने के बाद उसकी विदेशों में संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं। भारत सरकार ने इस कानून के तहत विजय माल्या को पहला भगोड़ा घोषित किया। उसकी विदेशी संपत्ति भी जब्त करने की कोशिश हो रही है।

मोदी सरकार के आर्थिक अपराध विधेयक 2018 के अनुसार भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने पर विशेष न्यायालय द्वारा व्यक्ति की भारत में या भारत के बाहर कोई संपत्ति (जो अपराधी के स्वामित्व वाली है या नहीं और जो उसकी बेनामी संपत्ति है) उसे जब्त करने का आदेश देने का प्रावधान है। इस विधेयक में प्रावधान है कि 100 करोड़ रुपए या उससे अधिक की रकम के ऐसे अपराध करने के बादए जो व्यक्ति फरार है या फिर भारत में दंडनीय अभियोजन से बचने या उसका सामना करने के लिए भारत वापस आने से इंकार करता है, उसकी संपत्ति और अपराध से अर्जित संसाधनों की कुर्की की जा सकती है। इसमें किसी भगोड़े आर्थिक अपराधी की कोई सिविल दावा करने या बचाव करने की हकदारी नहीं होने का भी प्रावधान है। मोदी सरकार जब यह विधेयक ला रही थी तब विधेयक के उद्देश्यों में यह बात साफ की थी कि देश में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जिसमें लोग आर्थिक अपराध की दंडनीय कार्यवाही शुरू होने की संभावना में या कभी कभी कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान अदालतों के अधिकार क्षेत्र से पलायन कर गए हैं।

भारतीय अदालतों से ऐसे अपराधियों की अनुपस्थिति के अनेक हानिकारक परिणाम हुए और मामलों में जांच में बाधा उत्पन्न होती है। इससे न्यायालयों का समय व्यर्थ होता है और इससे विधि शासन तक कमजोर होता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए और आर्थिक अपराधियों को भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर बने रहने के माध्यम से भारतीय कानूनी प्रक्रिया से बचने से हतोत्साहित करने के उपाय के लिए भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 अधिनियमित करने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि यह तमाम प्रक्रियाएं जितनी सहज और आसान दिखाई दे रही हैं यह उतनी ही कठिन है। केंद्र सरकार भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक तो ले आई पर चुनौतियों ने साथ नहीं छोड़ा। सबसे बड़ी चुनौती है दूसरे देशों के कानून व उन कानूनों के जरिए वहां की नागरिकता ले लेने वाले लोगों को मिली सुरक्षा से निपटना। यदि देखा जाए तो विजय माल्या के मामले में ये कानूनी पेचीदगी भी सामने आई है।

माल्या के पास विदेशी नागरिकता है जिस कारण वहां के कानून से मिली सुरक्षा कानूनी कार्रवाई में देरी का कारण बन रही है। नीरव मोदी भी नागरिकता का स्टेटस एनआरआई करवा चुका है। अब देश से फरारी के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई आसान नहीं है। मोदी सरकार ये कानून विजय माल्या, नीरव मोदी व मेहुल चोकसी जैसे कारोबारियों द्वारा बैंकों का अरबों रुपए का कर्ज नहीं लौटाने और देश से बाहर चले जाने की पृष्ठभूमि में लेकर आई है। बहरहाल, यह सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि स्विट्जरलैंड सरकार ने माल्या के बैंक खातों की जानकारी देने पर भी सहमति दे दी है। देर-सबेर माल्या का भारत आना तथा उसकी संपत्तियां जब्त करना अब निश्चित हो गया है।
अक्षय नेमा मेख (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

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