नोटबंदी के डेढ़ साल बाद कानपुर से एक अरब रुपए के पुराने नोटों का मिलना अचंभा

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नोटबंदी के डेढ़ साल बाद कानपुर से एक अरब रुपए के पुराने नोटों का मिलना अचंभा

सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी से जुड़े एक मामले में केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि किसी की मेहनत की कमाई को यूं अकारण रद्दी में तब्दील नहीं होने दिया जा सकता। कोर्ट के इस दखल ने उन तमाम लोगों के मन में उम्मीदें जगा दी थीं, जो किसी जायज वजह से हजार और पांच सौ के अपने पुराने नोटों को बैंकों में जमा नहीं करवा पाए थे। नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले को चाहे जितना भी जरूरी बताया जाए, पर इसमें दो राय नहीं कि इसने देश में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल मचा दी थी। अब इसी तरह की उथल पुथल कानपुर ने पूरे देश में मचा रखी है, जहां से करीब एक अरब रुपए के पुराने नोटों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है। एनआईए और उत्तर प्रदेश पुलिस ने संयुक्त रूप से छापा मार कर कानपुर से 96 करोड़ 62 लाख के पुराने नोट जब्त किए हैं। इस खेल के तार दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद समेत विदेशों से भी जुड़ रहे हैं। इस मामले में हैदराबाद के कोटेश्वर राव, कानपुर के बिल्डर व कपड़ा कारोबारी आनंद खत्री, संतोष यादव और वाराणसी में रेल विभाग के इंजीनियर संजय राय को गिरफ्तार किया गया है।
कुछ वक्त पहले ही मेरठ पुलिस ने परतापुर थाना इलाके के राजकमल एन्क्लेव में प्रॉपर्टी डीलर और बिल्डर संजीव मित्तल के मकान में बने एक ऑफिस से लगभग 25 करोड़ रुपए की पुरानी करेंसी बरामद की थी। मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बताया था कि संजीव इस पैसे को एक नामी तेल कंपनी के जरिए आरटीजीएस करना चाहता था। इन दो मामलों ने सरकार की योजना को पलीता लगाने का एक और उदाहरण पेश किया है। नोट बदल पाने में नाकाम रहे लोगों ने जब सुप्रीम कोर्ट में फरियाद लगाई थी, तभी सरकार ने समयसीमा आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया था। तब सरकार ने कहा था कि अगर एक बार खिड़की खुली तो अवांछित तत्व भी इसका फायदा उठाने आ जाएंगे। यानी सरकार को इस बात का पता था कि अब भी बड़ी संख्या में पुराने नोट लोगों के पास हैं और वे उन्हें बदलवाना चाह रहे हैं। इन पुराने नोटों में लोगों की खून पैसे की कमाई कम, कालाधन ज्यादा है। जैसा कि अब कानपुर और इससे पहले मेरठ में देखने को मिला था।
यकीनन, अगर पुराने नोट बदलने की बात सरकार मान लेती तो कानपुर से बरामद किए गए नोट भी नई मुद्रा के रूप में परिवर्तित हो जाते। मगर इससे नोटबंदी की सार्थकता सिद्ध नहीं हो पाती। अब जबकि कानपुर से भ्रष्टाचार का एक बड़ा गोरखधंधा सामने आया है, तो सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा और ज्यादा मजबूत हो सके। नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो संकल्प जताया था, उसे कुछ बैंक कर्मी पहले ही ध्वस्त कर चुके हैं। अगर उन्होंने उस समय नैतिकता दिखाई होती, तो आज तस्वीर कुछ और होती। बहरहाल, कानपुर से आने वाले दिनों में ऐसे राज सामने आएंगे, जो हतप्रभ करने वाले होंगे।

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