World Heritage Day 2019: जो हमें सांस्कृतिक विरासत से कराता है परिचित

0
41
World Heritage Day 2019

राज एक्‍सप्रेस। विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day 2019) पूरी दुनिया में हर साल आज ही के दिन 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानव विरासत को संरक्षित करना और क्षेत्र के सभी प्रासंगिक संगठनों के प्रयासों को पहचानना है। वर्ष 1982 में (आईसीओ एमओएस) ने 1983 में यूनेस्को की महासभा द्वारा अनुमोदित विश्व धरोहर दिवस के रूप में 18 अप्रैल को मनाने घोषणा की, ताकि मानव जाति की सांस्कृतिक विरासत के महत्व के बारे में लोगों की जागरूकता बढ़े।

सांस्कृतिक विरासत का मनाते हैं जश्न

इसके साथ ही इसके उद्देश्य से मानव विरासत की रक्षा और संरक्षण करने के मुख्य कारण भी लोग समझ सकें। विश्व विरासत दिवस पूरे विश्व में अपने देश की मूल्यवान संपत्ति और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण के लिए तथा आम जनता के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। पूरी दुनिया में रोजाना लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हैं। बस अपने जीवन के बारे में कहते हैं कि, वे कौन हैं और वे कहां से आए हैं, लेकिन मानव जाति के संयुक्त इतिहास और विरासत का जश्न मनाने के लिए एक वर्ष में एक दिन अलग किया गया है।

विश्व धरोहर दिवस का महत्व और भारत की वल्र्ड हेरिटेज साइट

शुक्रवार को दुनियाभर में विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day) मनाया जा रहा है। यह दिन दुनियाभर की स्मारकों और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों के लिए खास होता है। इस अवसर पर हर साल एक थीम बनाई जाती है। विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त स्थलों के महत्व, सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरुकता फैलाने के मकसद से ही यह विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है।

दरअसल यह एक मौका है जब हम लोगों को बताएं कि, हमारी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाए रखने के लिए कितनी कोशिश हो रही है। इसके साथ ही यह दिन यह भी बताता है कि, हमारी यह धरोहरों को अब कितने रख-रखाव की जरूरत है।

विश्व धरोहर स्थल क्या होता है?

विश्व धरोहर या विरासत सांस्कृतिक महत्व और प्राकृतिक महत्व के स्थल होते हैं। यह वह स्थल होते हैं, जो ऐतिहासिक और पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होते हैं। इनका अंतरराष्ट्रीय महत्व होता और इन्हें बचाए रखने के लिए खास कदम उठाए जाने की जरूरत होती है। ऐसे स्थलों को आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को विश्व धरोहर की मान्यता प्रदान करती है। कोई भी स्थल जिसे यूनेस्को समझता है कि, यह मानवता के लिए जरूरी है। वहां का सांस्कृतिक और भौतिक महत्व है, उसे विश्व धरोहर के तौर पर मान्यता दी जाती है। विश्व धरोहर दिवस हमें सभी संसार संस्कृतियों का जश्न मनाने और महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्मारकों और स्थल पर जागरूकता लाने और दुनिया की संस्कृतियों को संरक्षित करने के महत्व को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

पहला विश्व विरासत दिवस कब मनाया गया

अगर हम बात करें कि, विश्व धरोहर दिवस पहली बार कब मनाया गया था, तो यहां हम आपकों बता दें कि, 18 अप्रैल 1982 को ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स द्वारा पहला विश्व विरासत दिवस मनाया गया था। वर्ष 1983 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था युनेस्को ने इसे मान्यता प्रदान की। इससे पहले प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व पुरातत्व स्थल और स्मारक दिवस के रुप में मनाया जाता था।

मूल्यवान स्थानों की रक्षा के लिए एक संगठन गठित

इन मूल्यवान स्थानों की रक्षा के लिए एक संगठन की स्थापना की गई थी और इसमें सैकड़ों संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ वहां एक साथ आये, इनमें आर्किटेक्ट इंजीनियरों, भूगोलकार, सिविल इंजीनियरों, कलाकारों के साथ ही पुरातत्वविद भी शामिल किए गए। प्रत्येक वर्ष वे यह सुनिश्चित करने में मदद के लिए काम करते हैं, जिससे दुनिया की कुछ सबसे खूबसूरत स्थल और महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्मारक भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहें। इसमें दुनिया भर में 150 से अधिक देशों से लगभग 10,000 सदस्यों को शामिल किया गया है। 10,000 सदस्यों में से 400 से अधिक सदस्य संस्थानों, राष्ट्रीय समितियों और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समितियों के सदस्य हैं। यह सभी महत्वपूर्ण स्थल को बचाने और उनकी पहचान करने के लिए मिलकर काम करते हैं।

ऐतिहासिक इमारतों का बॉलीवुड कनेक्शन

इसके साथ ही आज हम विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day 2019) के इस मौके पर हम आपको दिल्ली की कुछ ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरु करवाएंगे, जो बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा बनीं। भारतीय फिल्मों का भी हमारी धरोहर से बहुत ही पुराना रिश्ता है। कई फिल्मों में दिखाए गए महत्वपूर्ण स्थल फिल्मों की पहचान बन गए।

हुमायूं का मकबरा-
  • सैफ अली खान और करीना कपूर अभिनीत ‘फिल्म कुर्बान’ (2009) में दोनों हुमायूं के मकबरे पर इश्क लड़ाते दिखे थे।
  • इस फिल्म का गाना शुकरान अल्लाह इस शानदार इमारत के परिसर में फिल्माया गया था।
  • यहीं नहीं ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ (2011) का गाना छूमतंर भी इस हैरिटेज साइट पर फिल्माया गया।
  • इसके आलावा ‘टू स्टेट’ (2014) फिल्म में इस मकबरे की झलक देखी जा सकती है।
  • आमिर ख़ान की मूवी ‘पीके’ में भी इस इमारत की झलक देखने को मिलती है।
कुतुब मीनार-
  • आपको आमिर ख़ान और काजोल की सुपरहिट ‘फिल्म फना’ (2006) का चांद सिफारिश गाना तो याद होगा ही, जिसमें आमिर ख़ान कुतुब मीनार के परिसर में वह शानदार गाना गाते दिखते हैं। यह सिलसिला यहीं नहीं थमता वे फिल्म की काजोल को दिल्ली के कई ऐतिहासिक इमारतों को दिखाने ले जाते हैं।
  • इसके अलावा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की ‘फिल्म चीनी कम’ के एक गाने में भी कुतुब मीनार को दिखाया गया है।
  • वहीं इमरान हाशमी अभिनीत ‘फिल्म जन्नत-2’ में कुतुब मीनार को दिखाया गया है।
यह भी पढ़ें: विरासत सहेजने में मददगार बनें हम
लाल किला

दिल्ली की जिस इमारत का फिल्मों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया है वह ‘लाल किला’, इस इमारत को सैंकड़ों फिल्मों में दिखाया जा चुका है, लेकिन इस इमारत का पहली बार किसी गाने में उपयोग 2015 में आई सलमान खान की ‘फिल्म बजरंगी भाईजान’ में किया गया।

5/5 (1)

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image