विज्ञान में, ट्विन पैराडॉक्स (Twin Paradox) ऐसी घटनायें, ऐसी सूचना होती है जो एक ही समय में सही और एक ही समय में गलत भी हो सकती है। हम निश्चित ही एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते है। ब्रह्माण्ड में ऐसे ही अनेकों पैराडॉक्स भरे पड़े है उनमे से एक पैराडॉक्स है टवीन पैराडॉक्स।

ट्विन पैराडॉक्स (Twin Paradox) क्या है ? टवीन पैराडॉक्स ( Twin Paradox ) से होती है समय की यात्रा, जानिए कैसे ?

ट्विन पैराडॉक्स का अर्थ है जुड़वाँ पैराडॉक्स का होना। जिसका तात्पर्य यह है कि इसमें दो जुड़वाँ पैराडॉक्स होते है जिसमे से एक पैराडॉक्स वास्तविक समय में होता है और दूसरा पैराडॉक्स ब्रह्माण्ड के समय में इसलिए इसको ट्विन पैराडॉक्स कहा जाता है।

वैज्ञानिकों द्वारा दी गयी थ्योरी –
न्‍यूटन –

सर न्‍यूटन के अनुसार, समय और प्रकाश की गति पूरे ब्रह्माण्ड में एक जैसी ही है। तो इसका अर्थ यह हुआ कि जो हमारी पृथ्वी पर समय हो रहा है, वो पूरे ब्रह्माण्ड में भी एक जैसा ही होगा।

पॉल लेंगेविन (Paul Langevin) –

1911 में, इन्होने अपने एक्सपेरिमेंट के द्वारा यह समझाने की कोशिश की दूरी फ्रेम पर निर्भर करती है। पॉल का कहना था कि पृथ्वी पर रह रहे व्यक्ति का विज़न और फ्रेम ब्रह्माण्ड की तुलना में अलग होगा। यानि कि पृथ्वी वाला ट्विन अपने ब्रह्माण्ड वाले ट्विन को अलग विज़न और फ्रेम से देख रहा होगा। (यह थ्योरी थोड़ी उलझी हुई थी, जो सही से पैराडॉक्स का दृष्टिकोण नहीं समझा पायी )

मेक्सवॉन लुईस –

1913 में, इन्होने बताया की दोनों जुड़वाँ का फ्रेम ही अलग अलग डायमेंशन पर चल रहा है। यानि कि इनका कहना था पृथ्वी वाला जुड़वाँ एक अलग समय के डायमेंशन में रह रहा है वही ब्रह्माण्ड वाला जुड़वाँ एक अलग समय के डायमेंशन में रह रहा है। आसान भाषा में समझे तो लुईस का कहना था कि, इन जुड़वाँ का समय एक दूसरे से एक दम अलग है। यह थ्योरी काफी हद तक आइंस्टीन की जनरल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी से मिलती जुलती थी।

आइंस्टीन –टवीन पैराडॉक्स ( Twin Paradox ) से होती है समय की यात्रा, जानिए कैसे ?

1915 में, आइंस्टीन ने अपनी जनरल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी को दुनिया के सामने पेश किया जिसने विज्ञान की दुनिया को बदल कर रख दिया। जिसमे टाइम डाइलेशन की बात कही गयी थी।

आइंस्टीन की थ्योरी ने बताया कि प्रकाश की गति पुरे ब्रह्माण्ड में कांस्टेंट है पर समय प्रकाश की गति के प्रतिलोम अनुपात है। अर्थात हम जितनी तेज़ी से मूव करेंगे और प्रकाश की गति के करीब पहुंचेंगे टाइम उतना ही धीमा होता जायेगा। इसका सीधा साधा मतलब था जो न्‍यूटन ने थ्योरी दी थी, वो पूरी गलत थी।

उदाहरण –

ट्विन पैराडॉक्स को एक उदाहरण से भी समझ सकते है। मान लीजिये, दो जुड़वाँ भाई है। जिनका नाम A एवं B है। जब A वाला भाई ब्रह्माण्ड के ट्रेवल से वापस आएगा तो, पृथ्वी पर रुके हुए भाई B की उम्र, ब्रह्माण्ड में गए भाई A की तुलना में ज़्यादा होगी। कैसे जानते है ?टवीन पैराडॉक्स ( Twin Paradox ) से होती है समय की यात्रा, जानिए कैसे ?

दोनों भाईयो की आयु 20 वर्ष है। 2000 में, इन दो जुड़वाँ भाई में से एक भाई A ब्रह्माण्ड में अल्फा स्टार पर जाने के लिए निकलता है और जाने के लिए 90 % प्रकाश की गति से वो अल्फा स्टार की तरफ आगे बढ़ता है। वही दूसरा भाई पृथ्वी पर ही रहता है। तब क्या होगा ?

हम बता दे, पृथ्वी से अल्फा स्टार की दूरी लगभग 4.4 प्रकाश वर्ष दूर है। भाई A प्रकाश की 90 % गति से आगे बढ़ रहा है। तब भाई A के लिए समय की गति काफी धीमी हो जाएगी। मतलब ब्रह्माण्ड में जाने वाले भाई A का समय और दूरी, पृथ्वी पर रह रहे भाई B से एक दम भिन्न होगी।

अगर हम थोड़ी सी कैलकुलेशन करे, तब हम यह पाएंगे कि,ट्विन A अल्फा स्टार पर 3 वर्ष में पहुँचता है, उसे वापस आने में तीन वर्ष लगते है। यानि कि, पृथ्वी के हिसाब से देखे तो 8.8 साल गुजर चुके होंगे। क्योंकि हमारे नज़रिये से देखे तो, ट्विन भाई A की उम्र ट्विन भाई B के मुकाबले 2.8 साल कम हो गयी या यह कहे कि, 2.8 साल ट्विन भाई A भविष्य में आ गया। अब टवीन भाई A की फाइनल उम्र 26 वर्ष होगी और टवीन भाई B की उम्र 28.8 वर्ष होगी।

समय की गति हो जाएगी धीमी  –

इसका मतलब यह हुआ, हम जितना प्रकाश की गति के समीप जायेंगे, समय हमारे लिए उतना ही धीमा होता जायेगा। अगर कोई ऑब्जेक्ट प्रकाश की गति से चल रही है तो, उसके लिए तो समय रुक ही जायेगा पर किसी भी ऑब्जेक्ट का थोड़ा भी द्रवमान हो तो, आइंस्टीन के अनुसार, वो प्रकाश की गति कभी प्राप्त ही नहीं कर सकता क्योंकि जैसे-जैसे ऑब्जेक्ट प्रकाश की गति से आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे उसका द्रवमान बढ़ता ही जायेगा। जैसे-जैसे ऑब्जेक्ट की गति प्रकाश की गति के 99.999 % तक पहुंचेगी ऑब्जेक्ट का द्रवमान अनंत हो जायेगा। उस समय उस ऑब्जेक्ट को चलाने के लिए अनंत ऊर्जा की आवश्यकता होगी। आपको बता दे, प्रकाश का कोई मास नहीं होता इसलिए प्रकाश बहुत तेज़ गति से चलता है।

“टवीन पैराडॉक्स ऐसे ही काम करता है। यह हमें बतलाता है कि, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में समय की गति एक जैसी नहीं है।”

इसके बहुत सारे उदाहरण है जैसे कि-टवीन पैराडॉक्स ( Twin Paradox ) से होती है समय की यात्रा, जानिए कैसे ?
  • बुद्ध ग्रह पर पृथ्वी की तुलना में समय की गति अधिक है।
  • इसका कारण बुद्ध ग्रह का सूर्य ग्रह के सबसे समीप होना है।
  • मंगल ग्रह पर पृथ्वी की तुलना में समय की गति काफी धीमी है। क्योंकि मंगल ग्रह सूर्य एवं पृथ्वी दोनों से दूर है यहाँ पर प्रकाश थोड़ी धीमी गति से पहुँचता है।
  • मिलर प्लेनेट पर समय की गति काफी धीमी है, कहते है मिलर प्लेनेट का 1 घंटा पृथ्वी पर 7 साल के बराबर होता है।
  • पृथ्वी से ग्रहों की दूरी एवं प्रकाश की गति से यात्रा करने पर समय यात्रा संभव है।
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