होली के दिन भूलकर भी न करें यह काम

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Holi Beliefs

राज एक्सप्रेस। रंगों का त्योहार होली बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मानाया जाता है। इस बड़ों का आशीर्वाद भी प्राप्त किया जाता है, लेकिन कुछ कामों को होली के दिन करने से बचना चाहिए। होली के त्योहार को लेकर कई मान्यताएं (Holi Beliefs) जुड़ी हुई हैं। लौकिक मान्यताओं के अनुसार होली के दिन इन चीजों का बहुत ध्यान रखना चाहिए। आज ही के दिन हमारे देश की अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर एवं महापुरुष, श्री चैतन्य महाप्रभु की जयंती मनाई जाती है। जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व में हरिनाम के उच्चारण की महिमा का बखान किया था।

यहां हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही बातें:
  • होली के दिन प्रात: काल उठते ही किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा दी गई वस्तु नहीं खानी चाहिए।
  • सिर पर साफा, टोपी पहननी चाहिए।
  • कोई व्यक्ति आपका पहना हुआ वस्त्र, रुमाल आदि मांगे तो इसे नहीं देना चाहिए।
  • होली के दिन और होलाष्टक से घर में लड़ाई झगड़ा न करें। माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो घर में खुशहाली का माहौल रखें।
  • विधि विधान से होलिका की पूजन करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। होलिका पूजन से पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।
  • शास्त्रों की विधि से होली के पूजन के समय पितरों की पूजा पाठ करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। इससे घर में सुख-शांति आती है और कष्टों से छुटकारा मिलता है।
समृद्धि में वृद्धि होगी:
  • होलिका दहन वाले दिन प्रात: काल में 108 मखानों की माला बनाकर मंदिर में लक्ष्मी जी को अर्पित करें। इससे आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होगी।
  • होली के दिन सवा किलो चावल की खीर बनाकर कुष्ठाश्रम में देने से धन प्राप्ति और समृद्धि में वृद्धि होगी।
  • होलिका दहन के समय एक सूखे गोले में बूरा भरकर उसे जलती हुई होली की अग्नि में रख दें। होलिका दहन के बाद रात्रि में घर के पूजा स्थल पर श्री सूक्त का 11 बार पाठ करने से समृद्धि की प्राप्ति होगी।
  • होलिका दहन वाले दिन संध्या के समय अपने घर की उत्तर दिशा में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। यह रातभर जलता रहे ऐसा करने से घर में सुख शांति आती है।
  • नारद पुराण के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन पितर पूजा के लिए सबसे बेहतर दिन है। इस दिन तर्पण-पूजा करने से सभी दोषों का निदान हो जाता है।
कब करें होली का दहन:

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार होलिका दहन पूर्णमासी तिथि में प्रदोष काल के दौरान करना चाहिए। भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि होलिका दहन के लिए उत्तम है। यदि ऐसा योग नहीं बैठ रहा हो तो भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन किया जा सकता है। इस साल 20 मार्च को रात 08.58 तक भद्रा है। जिस वजह से भद्रा खत्म होने पर होलिका दहन किया जा सकेगा।

बुराई पर अच्छाई की जीत होली है :

हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक हिरण्याकश्यप की बहन होलिका के पास ऐसा कपड़ा था, जिसे पहनने के बाद वह आग में नहीं जल सकती थी। इसलिए होलिका अपने भाई के कहने पर उसके बेटे प्रह्लाद को लेकर चिता पर बैठ गई। मगर प्रह्लाद की भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा से होलिका भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सकुशल निकल आए। मानते हैं कि, होलिका के नाम पर ही होली शब्द रखा गया। तब से ही लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में हर साल होलिका दहन करते हैं। इसके अगले दिन रंगों और प्यार से होली का त्योहार मनाते हैं। लोगों का मानना है कि, इस दिन लोग आपस के मन-मुटावों को भूलकर आपस में प्रेम भी भावना से मिलते हैं, लेकिन इसके साथ एक और मान्यता मानी जाती है।

होली की भस्म का महत्व :
  • लोग होलिका दहन के अगले दिन सुबह होली जलने के स्थान पर जाते हैं और वहां होली की भस्म उड़ाकर धुलेंडी मनाते हैं।
  • होली की भस्म का काफी महत्व है, इसलिए लोग इसे घर लाते हैं।
  • मान्यता है कि, होली की भस्म शुभ होती है और इसमें कई देवताओं की कृपा होती है।
  • इसको माथे पर लगाने से भाग्य अच्छा होता है और बुद्धि बढ़ती है।
  • ये भस्म शरीर के अंदर स्थित दूषित द्रव्य सोख लेती है।
  • भस्म लेपन करने से कई तरह के चर्म रोग खत्म हो जाते हैं।
  • एक अन्य मान्यता में होली की भस्म को अगले दिन प्रात: घर में लाने से घर को नकारात्मक शक्तियों और अशुभ शक्तियों से बचाया जा सकता है।
  • कुछ लोग ताबीज में भरकर इसे पहनते हैं, ताकि बुरी आत्माओं और तंत्र-मंत्र का उन पर असर नहीं हो।

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