क्या आयामों द्वारा आप समय की यात्रा कर सकते है ?

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आयाम यानि कि डाइमेंशन (Dimension), ब्रह्माण्ड की घटनाओं को मापने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जिस प्रकार हम भौतिक विज्ञान में किसी भी वस्तु को मापने के लिए अलग-अलग पैरामीटर का उपयोग करते है उसी प्रकार ब्रह्माण्ड में घटने वाली सभी घटनाओं को मापने के लिए आयाम का उपयोग किया जाता है। आयाम को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा अनेकों सिद्धांत दिए है। वैज्ञानिकों के सिद्धांतों की माने तो, आयाम बहुत तरह के होते है जो हमारी पहुंच से बाहर है।

वैज्ञानिकों के सिद्धांत अनुसार डाइमेंशन – 
  1. सुपर स्ट्रिंग सिद्धांत के अनुसार, इस ब्रह्माण्ड में 10 आयाम हो सकते है।
  2. एम सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्माण्ड में 11 आयाम हो सकते है।
  3. बोजोनिक के सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्माण्ड में कुल 26 आयाम हो सकते है।

इन आयामों की चर्चा विज्ञान की दुनिया में बहुत ही आम-बात है। किन्तु असल जीवन में हम केवल चार से पांच आयाम को जानते है। हमारे वैज्ञानिक भी अभी चार आयाम एवं पांच आयाम पर ही शोध कर रहे है। जो वास्तविक कहे जा सकते है, लेकिन पांच आयाम से अधिक वाले आयाम बस किताबों में ही दर्ज है।

कैसे बनते है आयाम (Dimension)?
  • हर डाइमेंशन अपने निचले स्तर के डाइमेंशन से मिलकर ही बनता है।
  • उदाहरण के लिए हम बिना पॉइंट के लाइन नहीं बना सकते है।
  • बिना लाइन के हम वन-डाइमेंशन नहीं बना सकते है।
  • बिना दो टु-डाइमेंशन को जोड़े थ्री –डाइमेंशन नहीं बना सकते है।
  • हम यह कह सकते है कि, हर एक डाइमेंशन दूसरे डाइमेंशन पर निर्भर है।
जीरो डायमेंशन (शून्य आयाम) 0-D :

यह ऐसा डायमेंशन होता है जो केवल एक पॉइंट का होता है। जिसमे न लम्बाई होती है, न चौड़ाई होती है, न ऊंचाई होती है और न ही गहराई होती है। इसको हम जीरो डायमेंशन भी कहते है।

वन डायमेंशन (पहला आयाम) 1-D :क्या Dimension द्वारा आप समय की यात्रा कर सकते है ?

यह ऐसा डायमेंशन होता है, जिसमे दो पॉइंट होते है। जब यह दोनों पॉइंट आपस में जुड़ते है तब एक लाइन बनती है जिसमे केवल लम्बाई होती है। वन डायमेंशन में न चौड़ाई होती है, न ऊंचाई होती है और न ही गहराई होती है। यह वन डायमेंशन दो अलग पॉइंट को आपस में जोड़ता है इसलिए इसकी लम्बाई की कोई सीमा नहीं हो सकती है। इसे वन डायरेक्शन भी कहा जाता है।

टू डायमेंशन (दूसरा आयाम) 2-D :

यह ऐसा डायमेंशन होता है। जब लम्बाई को आपस में सीधा जोड़ते है, तब एक आकृति बनती है जिसे हम टू डायमेंशन भी कहते है। इसमें लम्बाई एवं चौड़ाई होती है, किन्तु इसमें ऊंचाई एवं गहराई नहीं होती है।

थ्री डायमेंशन (तीसरा आयाम) 3-D :

यह ऐसा डायमेंशन होता है, जब हम दो “टु डायमेंशन” वाली आकृति को आपस में जोड़ते है तब इन आकृतियों के जुड़ने पर एक क्यूब बनता है। जिसे हम थ्री डायमेंशन भी कहते है। इस डायमेंशन में यह एलिमेंट होंगे जोकि इस प्रकार है इसमें लम्बाई, गहराई, चौड़ाई एवं ऊंचाई होती है इसलिए इसे थ्री डायमेंशन भी कहा जाता है।

फोर्थ डायमेंशन (चौथा आयाम) 4-D :क्या Dimension द्वारा आप समय की यात्रा कर सकते है ?

यह ऐसा डायमेंशन होता है, जो दो थ्री डायमेंशन से मिल कर बनता है। आपको बता दे, लम्बाई, ऊंचाई, चौड़ाई के समन्वय को स्पेस कहा जाता है। वैज्ञानिकों द्वारा माना जाता है कि, इसका चौथा एलिमेंट समय हो सकता है। क्योंकि स्पेस और समय एक दूसरे के बिना अस्तित्व में नहीं हो सकते है। स्पेस और समय का एक साथ होना अनिवार्य है।

इंसान समय के साथ जीता है। जैसे-जैसे समय गुजरता जाता है हम बूढ़े होते जाते है। अगर समय को हम फोर्थ एलिमेंट माने तो, फोर्थ डायमेंशन जो बनेगा वो अन्य तीनो डायमेंशन से मिलकर बनेगा जिसका अर्थ यह होता है कि, फोर्थ डायमेंशन की आकृति अन्य तीन डायमेंशनो  से मिलकर एक अलग ही तरह की आकृति का निर्माण करेगी। जिसमे व्यक्ति वर्तमान समय से भूत एवं भविष्य के समय में जा सकता है। इसका अर्थ एक यह भी हुआ की फोर्थ डायमेंशन में समय यात्रा संभव है। हम जहाँ रहते है, वो थ्री डायमेंशन वाली दुनिया है, जहाँ फोर्थ डायमेंशन मौजूद नहीं है।

सबके के मन में यह प्रश्न उठता है कि, क्या हम डायमेंशन का उपयोग करके समय की यात्रा कर सकते है ?

इसका उत्तर होगा हाँ ! हम सभी डायमेंशन का उपयोग करके समय यात्रा कर सकते है। लेकिन ऐसा करने के लिए हमे फोर्थ डायमेंशन बना कर, इसको फिफ्थ डायमेंशन में ट्रिगर करना होगा। तभी ऐसा संभव हो सकता है कि, हम समय यात्रा कर पाए, साथ ही समय को अपने अनुसार बदल भी पाए।

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