Buddha Purnima 2019: बुद्धत्व की प्राप्ति एवं महापरिनिर्वाण का दिन है बुद्ध पूर्णिमा

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Buddha Purnima 2019

राज एक्सप्रेस। देशभर में बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती 18 मई को मनाई जाएगी। इस दिन गौतम बुद्ध की 2581वीं जयंती मनाई जाएगी। बुद्ध पूर्णिमा हर साल वैशाख महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन 563 ईसा पूर्व में बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति भी हुई थी, यानी कि वे सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बने थे। पूरी दुनिया में महात्मा बुद्ध को सत्य की खोज के लिए जाना जाता है। राजसी ठाठ बाट छोड़कर सिद्धार्थ सात सालों तक सच को जानने के लिए वन में भटकते रहते हैं। उसे पाने के लिए कठोर तपस्या करते हैं और सत्य को खोज निकालते हैं। फिर उस संदेश को पूरी दुनिया तक ले जाते हैं। सबको मानवता का पाठ पढ़ाते हैं, सृष्टि को समझने की एक नई नजर पैदा करते हैं। दु:खों का कारण और निवारण बताते हैं।

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ऐसी महान आत्मा जिन्हें आज भगवान बुद्ध कहा जाता है, का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा को हुआ। इसी कारण वैशाख मास की इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है, लेकिन बुद्ध पूर्णिमा का संबंध बुद्ध के साथ केवल जन्म भर का नहीं है, बल्कि, इसी तिथि को वर्षो वन में भटकने एवं कठोर तपस्या करने के बाद बोध गया में बोधिवृक्ष के नीचे बुद्ध को सत्य का ज्ञान हुआ। कह सकते हैं उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति भी वैशाख पूर्णिमा को हुई। इसके बाद महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान के प्रकाश से पूरी दुनिया में एक नई रोशनी दी और वैशाख पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। कुल मिलाकर जन्म, सत्य का ज्ञान और महापरिनिर्वाण के लिए भगवान गौतम बुद्ध को एक ही दिन हुआ। वैशाख पूर्णिमा के दिन।

गौतम बुद्ध विष्णु के नौंवे अवतार

भगवान बुद्ध केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए आराध्य नहीं है, बल्कि उत्तरी भारत में गौतम बुद्ध को हिंदुओं में भगवान श्री विष्णु का नौवां अवतार भी माना जाता है। विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण माने जाते हैं। हालांकि दक्षिण भारत में बुद्ध को विष्णु का अवतार नहीं माना जाता है। दक्षिण भारतीय बलराम को विष्णु का आठवां अवतार तो श्री कृष्ण को 9वां अवतार मानते हैं। हिंदुओं में भी वैष्णवों में बलराम को 8वां अवतार माना गया है। बौद्ध धर्म के अनुयायी भी भगवान बुद्ध के विष्णु के अवतार होने को नहीं मानते, लेकिन इन तमाम पहलुओं के बावजूद वैशाख पूर्णिमा का दिन बौद्ध अनुयायियों के साथ-साथ हिंदुओं द्वारा भी पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के लिए भी बुद्ध पूर्णिमा खास पर्व है।

कहां-कहां मनाई जाती है बुद्ध जयंती

वर्तमान में पूरी दुनिया में लगभग 180 करोड़ लोग बुद्ध के अनुयायी हैं। भारत के साथ साथ चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, पाकिस्तान जैसे दुनिया के कई देशों में बुद्ध पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है। भारत के बिहार राज्य में स्थित बोद्ध गया बुद्ध के अनुयायियों सहित हिंदुओं के लिए भी पवित्र धार्मिक स्थल है। कुशीनगर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लगभग एक माह तक मेला लगता है। श्रीलंका जैसे कुछ देशों में इस उस्तव को वेसाक उत्सव के रूप में मनाते हैं, जो वैशाख शब्द का अपभ्रंश है। बौद्ध के अनुयायी इस दिन अपने घरों में दिए जलाते हैं, फूलों से घर सजाते हैं। प्रार्थनाएं करते हैं, बौद्ध धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाता है। स्नान-दान का वैशाख पूर्णिमा को महत्व माना जाता है।

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यह भी जानें
  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन दिल्ली संग्रहालय बुद्ध की अस्थियों को बाहर निकालता है और बौद्ध अनुयायी वहां आकर प्रार्थना करते हैं।
  • इस दिन बोधगया में काफी लोग आते हैं। दुनिया भर से बौद्ध धर्म को मानने वाले यहां आते हैं।
  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है। बोधिवृक्ष बिहार के गया जिले में बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में है। वास्तव में यह एक पीपल का पेड़ है। मान्यता है कि इसी पेड़ के नीचे इसा पूर्व 531 में भगवान बुद्ध को बोध यानी ज्ञान प्राप्त हुआ था।
  • इस दिन बोधिवृक्ष की टहनियों को भी सजाया जाता है। इसकी जड़ों में दूध और इत्र डाला जाता है और दीपक जलाए जाते हैं।
  • कुछ लोग बुद्ध पूर्णिमा के दिन पंछियों को भी पिंजरों से आजाद करते हैं और विश्वभर में स्वतंत्रता का संदेश फैलाते हैं।
कैसे मनाते हैं बुद्ध पूर्णिमा

दुनिया भर में फैले हुए बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन बौद्ध अपने घरों को फूलों से सजाकर दीपक जलाते हैं। इस दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया जाकर विशेष प्रार्थना करते हैं। मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगता है। सभी बुद्ध की प्रतिमा का जलाभिषेक करते हैं और फल, फूल, धूप इत्यादि चढ़ाते हैं। बौध श्रद्धालु इस दिन जरुरतमंदों की मदद करते हैं। इस दिन मांसाहार वर्जित है। वहीं हिंदू घरो में इस दिन सत्य विनायक पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। इस दिन गंगा स्नान अत्यंत शुभ माना जाता है। मिठाई, सत्तू, बर्तन और कपड़ों का दान कर पितरों का तर्पण भी किया जाता है।

जानिए इस पर्व का महत्व

गौतम बद्ध का जन्म एक राज परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने समस्त सांसारिक सुखों का त्याग कर कठिन तपस्या के बल पर ज्ञान प्राप्त किया। बौद्ध धर्म न सिर्फ भारत में फैला बल्कि दुनिया भर में इसने अपनी जगह बनाई। आज बौद्ध धर्म दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है। वैसाख महीने की पूर्णिमा को भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।

इसी दिन बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। यही नहीं वैसाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध ने गोरखपुर से 50 किमी दूर स्थित कुशीनगर में महानिर्वाण की ओर प्रस्थान किया था। दुनिया भर में फैले हुए बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन बौद्ध अपने घरों को फूलों से सजाकर दीपक जलाते हैं। इस दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया जाकर विशेष प्रार्थना करते हैं। इस दिन मांसाहार वर्जित है।

बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं

माना जाता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु ने अपने नौवें अवतार के रूप में जन्म लिया। इसी दिन को सत्य विनायक पूर्णिमा के तौर पर भी मनाया जाता है, मान्यता है कि आज के दिन भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा गरीबी के दिनों में उनसे मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान जब दोनों दोस्त साथ बैठे तब कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था। सुदामा ने इस व्रत को विधिवत किया और उनकी गरीबी नष्ट हो गई। इस दिन धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है। कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं। माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं, इसलिए उनके प्रसन्न होने से अकाल मौत का डर कम हो जाता है।

  • माना जाता है कि इस दिन पुण्य कर्म करने से कई फलों की प्राप्ति होती है।
  • कहते हैं कि अगर बुद्ध पूर्णिमा के दिन धर्मराज के निमित्त जलपूर्ण कलश और पकवान दान किए जाएं तो सबसे बड़े दान गोदान के बराबर फल मिलता है।
  • हिंदू मान्यता के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन पांच या सात ब्राrाणों को मीठे तिल दान करने चाहिए, ऐसा करने से पापों का नाश होता है।
  • मान्यता तो यह भी है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन अगर एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चंद्रमा या सत्यनारायण का व्रत किया जाए, तो जीवन में कोई कष्ट नहीं होता।
जिंदगी जीने का तरीका बदल देंगे गौतम बुद्ध के ये 15 विचार

बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार सत्य, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यहां पर हम आपको गौतम बुद्ध के ऐसे 15 अनमोल विचारों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी जिंदगी और बेहतर ढंग से जी सकते है।

  1. तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छिप सकतीं- सूर्य, चंद्रमा और सत्य।
  2. हजारों खोखले शब्दों से अच्छा वह शब्द है जो शांति लाए।
  3. स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफादारी सबसे बड़ा संबंध है।
  4. मैं कभी नहीं देखता कि क्या किया जा चुका है, मैं हमेशा देखता हूं कि क्या किया जाना बाकी है।
  5. बुराई होनी चाहिए, ताकि अच्छाई उसके ऊपर अपनी पवित्रता साबित कर सके।
  6. सबसे अंधेरी रात अज्ञानता है।
  7. शांति अंदर से आती है, इसे बाहर मत ढूंढो।
  8. शरीर को अच्छी सेहत में रखना हमारा कर्तव्य है, नहीं तो हम अपना मन मजबूत और स्पष्ट नहीं रख पाएंगे।
  9. जो आप सोचते हैं वो आप बन जाते हैं।
  10. आप केवल वही खोते हैं जिससे आप चिपक जाते हैं।
  11. पहुंचने से अधिक जरूरी ठीक से यात्र करना है।
  12. जुनून जैसी कोई आग नहीं है, नफरत जैसा कोई दरिंदा नहीं है, मूर्खता जैसा कोई जाल नहीं है, लालच जैसी कोई धार नहीं है।
  13. पवित्रता या अपवित्रता अपने आप पर निर्भर करती है, कोई भी दूसरे को पवित्र नहीं कर सकता।
  14. जो जगा है, उसके लिए रात लंबी है, जो थका है उसके लिए दूरी लंबी है, जो मूर्ख सच्चा धर्म नहीं जानता उसके लिए जीवन लंबा है।
  15. एक मोमबत्ती से हजारों मोमबत्तियां जलाई जा सकती हैं और उस मोमबत्ती का जीवन घटेगा नहीं। खुशी कभी भी बांटने से घटती नहीं।
आज के दिन शुभ माने जाते हैं ये काम

बुद्ध पूर्णिमा बौैद्ध धर्म से जुड़े लोगों का प्रमुख त्यौहार है, लेकिन आज ही के दिन भगवान विष्णु के नौवें अवतार के रूप में जन्म लेने की वजह से इसका महत्व और बढ़ जाता है। बौध धर्म को मानने वाले भगवान बुद्ध के उपदेशों का पालन करते हैं। बुद्ध भगवान बौद्ध धर्म के संस्थापक थे, यहां जानें आज के दिन कौन-से काम आपको करने चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन क्या करें

1. सूरज उगने से पहले उठकर घर की साफ-सफाई करें।
2. गंगा में स्नान करें या फिर सादे पानी से नहाकर गंगाजल का छिड़काव करें।
3. घर के मंदिर में विष्णु जी की दीपक जलाकर पूजा करें और घर को फूलों से सजाएं।
4. घर के मुख्य द्वार पर हल्दी, रोली या कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं और गंगाजल छिड़कें।
5. बोधिवृक्ष के आस-पास दीपक जलाएं और उसकी जड़ों में दूध विसर्जित कर फूल चढ़ाएं।
6. गरीबों को भोजन और कपड़े दान करें।
7. अगर आपके घर में कोई पक्षी हो तो आज के दिन उन्हें आजाद करें।
8. रोशनी ढलते के बाद उगते चंद्रमा को जल अर्पित करें।

भूलकर भी न करें ये 4 काम

1. बुद्ध पूर्णिमा के दिन मांस न खाएं।
2. घर में किसी भी तरह का कलह न करें।
3. किसी को भी अपशब्द न कहें।
4. झूठ बोलने से बचें।

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