आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

0
54
आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

हमने ब्लैक होल ( Black Holes ) के बारे में आपको हमारे पिछले भागो में विस्तार से बताया है। आज हम क्वांटम फिजिक्स की बात करेंगे कैसे ब्लैक होल में क्वांटम सिद्धांत का महत्व है। भाग -4 में हम Hawking Radiation की बात कर रहे थे। जब वैज्ञानिकों ने अपने शोधों से यह ज्ञात कर लिया कि, Black Holes रेडिएशन एमिट करते है साथ में उनका अपना खुद का एक तापमान होता है तब ब्लैक होल को लेकर एक समस्या आ गयी थी। ब्लैक होल कैसे रेडिएशन एमिट कर सकते है क्योकि Black Holes के प्रभाव से तो प्रकाश भी नहीं बच पता। लेकिन काफी शोध के बाद वैज्ञानिकों को इसका उत्तर क्वांटम विज्ञान के सिद्धांत से मिला। जहाँ वैज्ञानिकों ने पाया कि, कैसे Black Holes रेडिएशन एमिट करते है।

आईये जानते है, क्या है क्वांटम फिजिक्स सिद्धांत और इसका Black Holes पर प्रभाव –आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

क्वांटम फिजिक्स के सिद्धांत को लागू करके वैज्ञानिकों ने पाया कि, ब्लैक होल के अंदर से रेडिएशन नहीं निकलते है बल्कि Black Holes को घेरे जो इवेंट होराइजन है उस इवेंट होराइजन से रेडिएशन एमिट होता है।

क्वांटम फिजिक्स विज्ञान से क्या समझते है एवं उसके सिद्धांत – आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

अगर हम किसी चीज़ को खाली कहते है तब क्वांटम विज्ञान के द्वारा वो चीज़ पूरी तरह से खाली नहीं होती। यदि हम पुरे ब्रह्माण्ड को ही ले, तो वो भी पूरी तरह से खाली नहीं है। अगर कोई चीज़ पूरी तरह से खाली है तो इसका मतलब यह होगा कि, उस क्षेत्र का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्र आदि सभी शून्य हो जायेंगे।

अगर हम इसका अधिक अध्ययन करे तो पाएंगे :

“किसी भी क्षेत्र के मूल्य में एवं समय के मूल्य में आया बदलाव, स्थिति (पोजीशन), गति (मोमेन्टम) और संवेग (वेलोसिटी) की तरह है।”

हाइजनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त (Uncertainty Principle) के अनुसार

किसी गतिमान कण की स्थिति और संवेग को एक साथ एकदम ठीक-ठीक नहीं मापा जा सकता। यदि एक राशि अधिक शुद्धता से मापी जाएगी, तो दूसरी के मापन में उतनी ही अशुद्धता बढ़ जाएगी, चाहे इसे मापने में कितनी ही कुशलता क्यों न बरती जाए। इन राशियों की अशुद्धियों का ‘गुणनफल प्लांक नियतांक (h)’ से कम नहीं हो सकता। आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

ΔX.ΔP ≥ h/4π 

ΔX ↑ ΔP ↓

ΔP ↑ ΔX ↓

(जहाँ ΔX स्थिति को दर्शा रहा है, वही ΔP संवेग को दर्शा रहा है।)

साधारण शब्दों में

हाइजनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त हमें यह बताता है कि, हम किसी भी दी गयी दोनों वैल्यू को सही-सही शुद्धता से नहीं बता सकते है। अगर हमें स्थिति (Position) के बारे में सही ज्ञात है तब हम संवेग (Velocity) की वैल्यू के लिए अनिश्चित रहेंगे और यदि हमें संवेग (Velocity) के बारे में सब कुछ सही ज्ञात हो तब हम स्थिति (Position) की वैल्यू के लिए अनिश्चित रहेंगे।

इसलिए खाली जगह में क्षेत्र की वैल्यू शून्य नहीं हो सकती है। इसलिए क्षेत्र में अनिश्चितता या काम्प्लेक्स क्वांटम फ्लक्चुएशन ज़रूर होगा।

क्वांटम फ्लक्चुएशन – आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

हम क्वांटम फ्लक्चुएशन को ऐसे समझ सकते है मेटर और एंटीमेटर इसमें जोड़े की तरह आते है, थोड़े से वक़्त के लिए यह दोनों एक दूसरे से अलग होते है बाद में आपस में मिलने के बाद खुद ही नष्ट हो जाते है। इनको “वर्चुअल पार्टिकल” कहा जाता है। इसी कारण साधारण कर्ण (पार्टिकल) डिटेक्टर से डिटेक्ट नहीं किया जा सकता है। लेकिन हम जानते है यह उपस्थित होते है। क्योंकि इनके अप्रत्यक्ष प्रभाव जैसे कि – इलेक्ट्रान के ऑर्बिट की एनर्जी में आये, छोटे-छोटे बदलावों को पकड़ सकते है। सिद्धान्तिक द्वारा दी गयी वैल्यू के यह सही तरीके से मेल खाते है। अनिश्चितता सिद्धान्त यह भी बतलाता है कि, मेटर पार्टिकल जैसे – इलेक्ट्रान, प्रोट्रोन, हाइड्रोजन आदि अप्रत्यक्ष रूप से वर्चुअल पार्टिकल की तरह मौजूद रहते है।

मेटर (पदार्थ) और एंटी मेटर (अपदार्थ) होता क्या हैआकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

इनमे एक मेटर (पदार्थ, कर्ण) होता है एवं दूसरा एंटी मेटर (अपदार्थ, प्रतिकर्ण) होता है। जो कही से ऐसे ही नहीं बन सकते है। यह सबसे पहले बिगबैंग के बाद बने, वैज्ञानिकों द्वारा ऐसा माना जाता है। जब हमारे ब्रह्माण्ड में बिगबैंग हुआ, तभी मेटर और एंटी मेटर की भी उत्पत्ति हुई और कुछ वैज्ञानिक बिगबैंग के सिद्धांत के विरुद्ध है उनका मानना है, ब्रह्माण्ड में मेटर और एंटी मेटर पहले से ही उपस्थित था। जैसा कि, हमने आपको बताया था, मेटर और एंटी मेटर जब आपस में टकराते है तब यह फट जाते है अर्थात नष्ट हो जाते है।
जाहिर सी बात है कि, मेटर एवं एंटी मेटर की दोनों संख्या में मेटर ज़्यादा रहा होगा। इसलिए हमारा अस्तित्व है।

वैज्ञानिक सिद्धांत के अनुसार, सोचो अगर मेटर एवं एंटी मेटर को बिगबैंग ने समान संख्या में बनाया होता या बिगबैंग द्वारा न बनकर मेटर और एंटी मेटर ब्रह्माण्ड में पहले से समान संख्या में उपस्थित होते तो क्या होता? आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

यह सभी मेटर एवं एंटी मेटर आपस में मिलकर नष्ट हो जाते तथा साथ में ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं को नष्ट कर देते यानि की ब्रह्माण्ड में कुछ भी शेष नहीं रह जाता अर्थात ब्रह्माण्ड बिगबैंग के बाद शून्य हो जाता। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसका मतलब यह हुआ कि, मेटर और एंटी मेटर में किसी एक की संख्या दूसरे से ज़्यादा थी। जिसके फलस्वरूप यह हुआ होगा, मेटर और एंटी मेटर आपस में टकराये और मिले, बाद में नष्ट भी हुए लेकिन जो शेष बचा वो बचा ही रह गया। जिससे ब्रह्माण्ड में तारे, सितारे, ग्रह, खगोलीय पिंड, सौर मंडल, आकाशगंगायें एवं Black Holes जैसी चीज़ो का निर्माण हुआ। जिससे हम बने जिससे यह आकाशगंगायें बनी वो मेटर ही था।

इसका अर्थ यह हुआ कि, एंटी मेटर ब्रह्माण्ड से नष्ट हो गया जो शेष बचा रहा वो मेटर था। लेकिन प्रश्न उठता है। क्या कारण था कि, बिगबैंग के बाद एंटी मेटर की तुलना में मेटर ज़्यादा बना?

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है वो नहीं जानते ऐसा क्यों हुआ लेकिन उन्हें यह ज़रूर पता है कि, एंटी मेटर ख़त्म कैसे हुआ? बहुत से वैज्ञानिक ऐसे भी है जो यह मानते है, हमारे ब्रह्माण्ड में अभी भी एंटी मेटर उपस्थित है जो समय समय पर मिलता रहता है जैसा कि, कुछ साल पहले मिला। 2011 में, वैज्ञानिकों को ऐसा ही एंटी मेटर मिला था और कुछ वैज्ञानिक शोध करता अभी भी आर्टिफिशियल एंटी मेटर बनाने में जुटे हुए है और कई हद तक सफल भी हो रहे है।

विचार – “हमारा विचार कहता है, आज भी ब्रह्माण्ड में एंटी मेटर उपस्थित है लेकिन उस मात्रा में उपस्थित नहीं है जितनी मात्रा में मेटर उपस्थित है। क्योंकि एंटी मेटर जल्दी से नष्ट हो जाते है जैसे ही वो मेटर के संपर्क में आते है। इसलिए इनको ढूंढ़ना और इन पर शोध करना थोड़ा सा कठिन है।”

हम मेटर और एंटी मेटर को ऐसे भी समझ सकते है – 

मेटर में पाए जाने वाले गुणों में प्रोटोन, इलेक्ट्रान एवं हाइड्रोजन होता है। इनसे ही एक मेटर का निर्माण होता है। वही जब हम एंटी मेटर की बात करते है तो, उसमें पाए जाने वाले गुणों में, एंटी प्रोटोन, पॉज़िट्रान एवं एंटी हाइड्रोजन है। यानि कि, मेटर और एंटी मेटर एक-दूसरे से एक दम विपरीत होते है।

वैज्ञानिकों द्वारा, मेटर की तीन तरह की अवस्था भी बताई गयी है। जो ठोस, द्रव्य, गैस है। वैसे ही एंटी मेटर के साथ भी है। अगर हम मान ले, ब्रह्माण्ड में मेटर की जगह एंटी मेटर होता तो, हम सब एंटी मेटर से बने होते। हमारा पूरा ब्रह्माण्ड एंटी मेटर से बना होता। लेकिन यह इतना सरल नहीं है। अगर मेटर के कुछ अपने गुण है तो, एंटी मेटर के भी अपने कुछ अलग ही गुण है जो मेटर से खुद को भिन्न बनाता है।आकाशगंगाओं के अंत की है ये शुरुआत : ब्लैक होल ( Black Holes ) क्वांटम फिजिक्स – भाग 5

मेटर

प्रोटोन = धनात्मक आवेश (पॉजिटिव चार्ज)
इलेक्ट्रान = ऋणात्मक आवेश ( नेगेटिव चार्ज)
हाइड्रोजन = धनात्मक आवेश (पॉजिटिव चार्ज)

[मेटर 2 धनात्मक आवेश, 1 ऋणात्मक आवेश]
एंटी मेटर

एंटी प्रोटोन = ऋणात्मक आवेश (नेगेटिव चार्ज)
पॉज़िट्रान = धनात्मक आवेश (पॉजिटिव चार्ज)
एंटी हाइड्रोजन = ऋणात्मक आवेश (नेगेटिव चार्ज)

[एंटी मेटर 1 धनात्मक आवेश, 2 ऋणात्मक आवेश]
हम इसको गणित की भाषा से समझाने का प्रयास करेंगे।

आप मान लीजिये x = (+2) मेटर है। वही y = (-2) एंटी मेटर है।

सूत्र के अनुसार, {x +y}= 0

x और y का मान सूत्र में रखने पर,

{(+2) + (-2)}= 0
{2 – 2} = 0
{0} =0 
0 = 0

अगर मेटर और एंटी मेटर आपस में मिलते है तो स्वयं को शून्य कर लेते हैं।

आपने जाना कि, मेटर और एंटी मेटर क्या होते है? अब आप से हम कहे, क्या हो अगर यह मेटर और एंटी मेटर का जोड़ा, किसी Black Holes के इवेंट होराइजन के पास जा कर बने? तो क्या होगा। हम इसके बारे में अगले भाग-6 में बात करेंगे।

 

5/5 (3)

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image