सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन मंदिर महाकाल के शिवलिंग में जलाभिषेक के लिए नए नियमों को लेकर निर्णय सुनाया है। कोर्ट के आदेशानुसार RO के पानी से उज्जैन के महाकाल शिवलिंग का अभिषेक किया जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि प्रति श्रद्धालु आधा लीटर जल अभिषेक के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके साथ ही सवा लीटर पंचामृत के प्रयोग का आदेश दिया है।
इससे पहले इस पर फैसला होना था कि अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, शहद, शकर और घी) से अभिषेक हो या नहीं और कितनी मात्रा में हो। दरअसल, चढ़ावे से शिवलिंग के आकार का छोटा (क्षरण) होने के चलते कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद जांच के लिए एएसआई की कमेटी सर्वे के लिए गई थी।
इससे पहले कोर्ट में अपना पक्ष रखने और अलग-अलग बिन्दुओं पर बातचीत करने के लिए गुरुवार को वैदिक शोध संस्था चिंतामन मंदिर के पास हुई। जिसमें उज्जैन कलेक्टर सहित आला अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कई फैसले लिए गए। इसमें सबसे अहम् श्रद्धालुओं के लिए एक आरओ पानी का फिल्टर प्लांट जल्द लगाने का निर्णय लिया गया। श्रद्धालु उस प्लांट से ही जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ा सकेंगे।
इससे पहले एक रिपोर्ट सामने आई जिसके मुताबिक देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर के शिवलिंग को खतरा है। ऐसे में शिवलिंग के क्षरण की बात सामने आई। ये रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भी सौंपी गई। ऐसा बताया जा रहा था कि उज्जैन के महाकाल को गंगाजल से ही नहीं दूध, दही, शहद, चीनी इत्यादि से भी परहेज करने की जरूरत है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि पुरातत्व विभाग की टीम ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है।

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