डिजिटाइजेशन के चलते बंद ATM की संख्या काफी बड़ी

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद डिजिटाइजेशन को लेकर सरकार लगातार कदम उठा रही है। जिस तरह से सरकार डिजिटलीकरण की तरफ आगे बढ़ रही है, उसको देख कर ऐसा लगता है, आने वाले समय में ATM मशीन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। कहा एक समय था, जब लोग पेमेंट के नाम पर ATM को याद करते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट प्रचलन में आ गया है। जिसके कारण अब लोग ATM के इस्तेमाल के बारे में सोचते भी नहीं है। इसी के चलते लगातार ATM बंद होते जा रहे है।
बंद ATM की संख्या:
इस साल जून से अगस्त तक देशभर में करीब 358 ATM बंद कर दिये गये हैं। इस तरह देश में एटीएम की संख्या में 0.16% की कमी आई है। यही संख्या पिछले 4 सालों में 16.4 फीसदी तक बड़ी थी। पिछले एक साल में यह ग्रोथ कम होकर 3.6 फीसदी पर ही रह गई। 59,291 ATM के साथ देश में सबसे अधिक ATM SBI बैंक के है।
# स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जून में 91 ATM बंद किये है।
# अगस्त में पंजाब नेशनल बैंक ने करीब 400 ATM को बंद किये है और ATM की संख्या 10,502 से घटकर 10,083 कर दी है।
# HDFC बैंक के ATM की संख्या 12,230 से कम होकर 12,225 रह गई है।
ATM का खर्चा:
एक ATM के रखरखाव, सिक्योरिटी स्टाफ, एटीएम ऑपरेटर्स, मेंटनेंस चार्ज और इलेक्ट्रिसिटी बिल को मिलाकर महीने का कुल खर्चा 1 लाख रुपए तक होता है। खासतौर पर एटीएम के केबिन पर बिजली का खर्च काफी अधिक होता है। क्योंकि इसमें तापमान पूरे दिन 15 से 18 डिग्री सेल्सियस रखना होता है।

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