अमेरिका को पीछे छोड़ कर, सबसे ज्यादा चीन और भारत में बने अरबपति

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बीजिंग। अरबपतियों के मामले में भारत और चीन ने मिलकर अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। एशिया क्षेत्र में पहली बार अमेरिका से ज्यादा अरबपति हो गए हैं। भारत और चीन का दबदबा लगातार दुनिया में बढ़ता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अरबपतियों की संख्या के मामले में पहली बार एशिया ने अमेरिका को पछाड़ते हुए पहले नंबर पर जगह बना ली है। हाल में आई प्राइसवाटर हाउस कूपर्स और यूबीएस की खबरों के अनुसार 2016 में अरबपतियों की संपत्ति 17 प्रतिशत बढ़कर 6 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। खबरों के अनुसार एशिया में अरबपतियों की संपत्ति में बड़ी उन्नति देखने को मिली है। यही कारण है साल 2016 में एशिया में अरबपतियों की संख्या जहां 637 थी, वहीं अमेरिका में अरबपति केवल 563 ही थे। पिछले साल एशिया मे 117 नए अरबपति बने है ।
कुल संपत्ति में भी एशिया आगे होगा
अमेरिका के अरबपतियों की संपत्ति में 25 प्रतिशत की हुई है। खबरों के अनुसार कुल संपत्ति के मामले में भले ही अमेरिका अभी एशिया से काफी आगे चल रहा हो लेकिन जिस तेजी से एशिया में अरबपतियों की संख्या में वृद्धि हो रही है उससे चार साल में अमेरिका काफी पीछे जा सकता है। यूरोप में अमीरों की संख्या में किसी भी तरह की काई वृद्धि देखने को नहीं मिली है। यूरोप में अमीरों की संख्या 342 थी।
16 नए अरबपति मिले भारत को
खबरों के अनुसार साल 2016 में दुनिया भर में 142 नए अरबपति बने हैं। इसमें आधे से अधिक अरबपति भारत और चीन से हैं। खबरों के अनुसार 142 में से 67 अरबपति भारत और चीन से हैं। भारत में साल 2015 में 84 अरबपति थे जो अब एक साल में बढ़कर 100 के आंकड़े तक पहुंच गए हैं। इस अंदाज से देखा जाए तो भारत को साल 2016 में 16 नए अरबपति मिले हैं। चीन में अमीरों की तादाद 167 से बढ़कर 218 हो गई है। यानी एक साल में 51 बढ़ गए।
32 प्रतिशत लोग खुद की मेहनत से बने अमीर
अरबपतियों की संपत्ति के मामले में दो तरह की धारणाएं हैं। एक तो यह कि किसी को पैतृक रूप से संपत्ति मिल गई हो और दूसरा खुद की मेहनत से संपत्ति में इजाफा किया गया हो। रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में एशिया में खुद से बनाई गई संपत्ति में 32 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। एशिया में 2015 में पैतृक संपत्ति वाले अमीरों की संपत्ति 15.8 लाख करोड़ थी जबकि खुद से बढ़े अमीरों की कुल संपत्ति 81.3 लाख करोड़ रुपये थी।

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