इराक में चालीस लाख बच्चों को राहत की जरूरत: यूनीसेफ

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इराक में चालीस लाख बच्चों को राहत की जरूरत: यूनीसेफ

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) ने आज कहा है कि पिछले चार वर्षों से इराक में जारी हिंसा का खामियाजा लोगों को सबसे अधिक भुगतना पड़ रहा है और इससे चालीस लाख बच्चे बेहद अमानवीय हालात में हैं जिन्हें राहत एवं मानवीय सहायता की सबसे अधिक जरूरत है। पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका मामलों के यूनीसेफ के क्षेत्रीय निदेशक गीरत कैपिएलिएरे ने आज इराक में एक कार्यक्रम में बच्चों के भविष्य’ के बारे में शिरकत करते हुए कहा है। बच्चों को लेकर इस हफ्ते कुवैत में जो कार्यक्रम हुआ था वह इस बात को दर्शाता है कि हम बच्चों का भविष्य किस प्रकार बेहतर बना सकते हैं।

अगर बच्चों का भविष्य अच्छा है। और उन्हे अच्छे अवसर दिए जाएं तो इससे इराक के पुनर्निर्माण में मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र पर्यावास के क्षेत्रीय निदेशक जेना अली अहमद ने कहा है कि किसी भी संकट का सबसे अधिक शिकार बच्चे होते हैं और उनके भविष्य को बेहतर बनाए जाने के कामों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इराक में कार्यरत यूनीसेफ के प्रतिनिधि पीटर हॉकिन्स ने अपने बयान में कहा है कि पूरे इराक में बच्चे भयावह और अकल्पनीय हिंसा का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा है कि हालिया इतिहास में यह सबसे क्रूरतम युद्ध में से एक है। वे मार दिए गए, घायल हुए, अगवा किए गए और उन्हें गोलाबारी करने और हत्या करने के लिए मजबूर किया गया है। हॉकिन्स ने बताया है कि मोसुल में यूनिसेफ ने ऐसे कई मामले देखे, जहां आईएस के कब्जे वाले इलाके से पलायन की कोशिश कर रहे परिवारों के बच्चों की आतंकवादियों ने हत्या कर दी है। उन्होंने कहा है कि लोगों को पलायन करने से रोकने के लिए आतंकवादी बच्चों का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के रूप में कर रहे हैं।

यूनीसेफ का कहना है कि लोगों को युद्धग्रस्त क्षेत्रों से पलायन या उन स्थानों पर लौटने की अनुमति दी जानी चाहिए, जहां संघर्ष समाप्त हो गए हैं। यूनीसेफ ने बताया है कि उसने इराक के बच्चों की सहायता और घरों से पलायन करने वाले परिवारों की वापसी पर उनके की तरफ से जीवन शुरू करने में उनकी मदद के लिए दाताओं से 10 करोड़ डॉलर की तत्काल सहायता की मांग की है।

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