Coca-Cola इंडिया फोकस अब देसी फ्लेवर्स पर

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नई दिल्ली। विदेशी पेय पदार्थ निर्माता कम्पनी Coca-Cola इंडिया अपनी प्रॉडक्ट रेंज बढ़ाने जा रहा है। क्षेत्रीय ब्रांडों की चुनौती से निपटने के लिए कंपनी का फोकस अब देसी फ्लेवर्स से युक्त ड्रिंक बनाने पर होगा क्योंकि लोग अब स्थानीय और हेल्थी ड्रिंक्स की ओर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
Coca-Cola इंडिया के नए प्रेजिडेंट टी कृष्णकुमार ने कहा
टी कृष्णकुमार ने कहा, हमने इस वर्ष की पहली तिमाही में स्थिति का आकलन किया और यह महसूस किया कि कहीं हम उपभोक्ता की समझ को समझने में हमारी कार्यवाही सही नहीं करने की कोशिश कर रहे थे। उपभोक्ता बहुत अनुकूलन में आगे बढ़ रहा था। उपभोक्ताओं को अनुकूलन देने वाले छोटे खिलाड़ी थे। हम अभी भी राष्ट्रीय ब्रांड बनाने के युग में थे उपभोक्ता जातीयता की तलाश में थे इतने छोटे ब्रांडों की पेशकश और बढ़ रही थी। नए दृष्टिकोण के साथ, Coca-Cola उपभोक्ताओं के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने की उम्मीद कर रहा है। अभी हम राइट ट्रैक पर हैं। उन्होंने बताया कि भारत में हमारा काम जारी है। Coca-Cola जूस की बड़ी श्रृंखला लेकर आया है। कंपनी के जूस कई स्थानीय फ्लेवर्स और अलग-अलग पैकेजिंग में उपलब्ध है। तीसरे क्वॉर्टर के प्रदर्शन से हम संतुष्ट हैं। कोकाकोला फलों पर आधारित ड्रिंक्स पेश करने में हुए फायदे से उत्साहित है।
जूस की बड़ी रेंज
आपको बता दें कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कोका कोला जूस की बड़ी रेंज लेकर आया है। कंपनी के जूस कई स्थानीय फ्लेवर्स और अलग-अलग पैकेजिंग में उपलब्ध है। Coca-Cola ने 180 ml का कैन और 250 ml की बोतल भी पेश की है। कंपनी अलग-अलग स्वाद जैसे जीरा, रिम-झिम, अंगूर आदि में जूस लेकर आई है। फलों के रस के अलावा कंपनी फ्रोजन डेजर्ट और लो शूगर उत्पाद भी जल्द पेश करने की तैयारी में है। अब देखना यह है कि यह विदेश कम्पनी फलों के देसी स्वाद से मुकाबला करने में कितनी सफल होती है।
तो इसलिए भारत में बड़ा रिस्क लेने का तैयार हैं कोका कोला
फूड और पेय पदार्थों को समझना और उसके अनुसार प्रॉडक्ट लाना सबसे मुश्किल बिजनस माना जाता है। दरअसल कृत्रिम पेय पदार्थों को अक्सर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया जाता है। इनकी अन्य कई वजहों से भी आलोचना होती हैं। इसी वजह से अब पेय कंपनियां कम से कम कैलोरी वाले प्रॉडक्ट मार्केट में लाना चाहती हैं। Coca-Cola के एटलांटा हेडक्वार्टर के सूत्रों की मानें तो वह अपने सबसे सक्सेस ड्रिंक माजा में 30 से 50% तक शुगर कम कर सकती है। यह बदलाव अलग-अलग देशों में उनके मार्केट के अनुसार किए जाएंगे।

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