Birthday Special : आज अपना 65वां जन्मदिन सेलीब्रेट कर रही हैं गायिका अनुराधा पौडवाल

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गीत और संगीत भारतीय फिल्मों की एक खास पहचान रहा है। यही कारण है कि हिंदी फिल्मों ने एक से बढ़कर एक गायक और संगीतकार पैदा किए हैं। 80 के दशक में जब कैसेट टेप का कल्चर बढ़ने लगा, बहुत से उद्योगपति इस बिजनेस में उतर आए। यही वो दौर था जब पुराने गायकों के गीत रीक्रिएट करने का कल्चर पनप रहा था।
ऐसे ही कल्चर की ‘क्वीन’ बनकर उभरीं गायिका अनुराधा पौडवाल। टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के साथ मिलकर अनुराधा ने अपनी गायकी से कंपनी को नए आयाम तक पहुंचाया। भक्ति गीतों में अनुराधा का कोई सानी ही नहीं था। लाइमलाइट से दूर रहने वाली अनुराधा आज अपना 65वां जन्मदिन सेलीब्रेट कर रही हैं।
80 के दशक में अनुराधा एक बेहतरीन गायिका बनकर उभरी थीं। उस दौर में लता मंगेशकर, आशा भोसले और अल्का याग्निक जैसी गायिकाएं झंडे गाड़ रही थीं। लेकिन अनुराधा जब आईं तो इन सभी को उन्होंने कड़ी टक्कर दी। अनुराधा को गुलशन कुमार और टी-सिरीज की खोज भी कहा जाता था। गुलशन कुमार उन्हें दूसरी लता मंगेशकर बनाना चाहते थे।
वैसे 27 अक्टूबर 1954 में जन्मीं अनुराधा साल 1976 से ही गायकी में सक्रिय रहीं। लेकिन उनको असली पहचान मिली टी-सीरीज से जुड़ने के बाद। अनुराधा पौडवाल ने ऐसे बहुत से गाने गाए हैं जो लता मंगेशकर के गाए हुए थे। इन गानों पुराने दिनों का दौर तो ताजा किया ही, साथ ही उन्हें एक नई पहचान दी। साल 1973 से लेकर अब तक अनुराधा 1500 से ज्यादा गाने गा चुकी हैं। हिंदी के अलावा उन्होंने कन्नड़ और मराठी जैसी अन्य भाषाओं में भी गाने गाए हैं। सफलता ने अनुराधा के ऐसे कदम चूमे कि ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘बेटा’ जैसी फिल्मों के लिए उन्हें लगातार तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड दिए गए। इस दौरान अनुराधा गुलशन कुमार की भी पसंदीदा गायिका बन गईं।

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