हरकत में आई सरकार, सुरेश प्रभु ने मांगी रिपोर्ट

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Suresh Prabhu Reviewed Jet Airways

राज एक्सप्रेस, नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु (Suresh Prabhu Reviewed Jet Airways) ने वित्तीय संकट में फंसी विमान सेवा कंपनी जेट एयरवेज से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने और यात्रियों की परेशानी यथासंभव कम करने के निर्देश दिये हैं। श्री प्रभु ने शुक्रवार को बताया कि, उन्होंने नागर विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला को जेट एयरवेज से जुड़े मसलों की समीक्षा का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, मैंने उनसे यात्रियों की असुविधा को यथासंभव कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है।

जेट एयरवेज के पास नकदी की कमी:

उल्लेखनीय है कि लगातार चार तिमाहियों में नुकसान उठाने के कारण जेट एयरवेज के पास नकदी की भारी किल्लत हो गयी है। वह बैंकों का ऋण चुकाने में विफल रही है तथा फिलहाल समाधान प्रक्रिया के तहत उसकी हिस्सेदारी बेचने के लिए निविदा जारी की गयी है। विमानों का किराया नहीं चुकाने के कारण उसके कई विमान ग्राउंडेड हो चुके हैं और कुछ ही महीने पहले 120 विमानों का परिचालन करने वाली कंपनी का बेड़ा अब सिमट कर 15 से भी कम रह गया है।

बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने 16 बोइंग विमान लेगी स्पाइसजेट:

वित्तीय संकट में घिरी विमान सेवा कंपनी जेट एयरवेज की बड़ी संख्या में रद्द हो रही उड़ानों और बाजार में क्षमता में अचानक आयी कमी को भुनाने के लिए स्पाइसजेट ने 16 बोइंग विमान पट्टे पर लेने का फैसला किया है। वित्तीय संकट से पहले यात्रियों की संख्या के लिहाज से जेट एयरवेज की बाजार हिस्सेदारी 13 से 15 प्रतिशत के बीच थी और अब यह बेहद कम रह गयी है। अन्य विमान सेवा कंपनियां उड़ानों की कमी की खाई को भरकर बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा जमाने की ताक में हैं।

विमानन क्षेत्र में चुनौतिपूर्ण स्थिति:

इसी क्रम में किफायती विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट ने शुक्रवार को बताया कि, वह सोलह बोइंग 737-800 एनजी विमान पट्टेदारों से ड्राई लीज लंबी अवधि के लिए किराये पर लेगी। उसने विमानों के आयात के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए नागर विमानन महानिदेशालय के पास आवेदन दिया है। एयरलाइंस ने बताया कि नये विमान 10 दिन के भीतर उसके बेड़े में शामिल हो जायेंगे। स्पाइसजेट के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा, कंपनी पहली बार अपने बेड़े में इन विमानों को शामिल कर रही है। बाजार में सीट किलोमीटर क्षमता में अचानक आयी गिरावट से देश के विमानन क्षेत्र में चुनौतिपूर्ण स्थिति बन गयी है।

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