अप्रैल से आवासीय परियोजनाओं पर लागू होगी नई जीएसटी दर

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GST

राज एक्सप्रेस, नई दिल्ली। जीएसटी (GST) काउंसिल की 34वीं बैठक में घर खरीदने वालों और रियल एस्टेट डेवलपर्स को बड़ा तोहफा मिला है। सूत्रों के मुताबिक जीएसटी काउंसिल की बैठक में एक अप्रैल से अंडर कंस्ट्रक्शन पर पांच फीसदी जीएसटी लागू होगा। अंडर कंस्ट्रक्शन पर बिना इनपुट टैक्स क्रेडिटद्ध के पांच फीसदी जीएसटी लागू होगा। जीएसटी काउंसिल ने नए रियल प्रोजेक्ट पर 1 अप्रैल से 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। मौजूदा प्रोजेक्ट में इस बात की छूट रहेगी कि वो मौजूदा जीएसटी रेट दें और इनपुट टैक्स क्रेडिट लें या फिर नया जीएसटी चुकाएं लेकिन उस सूरत में इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा।

घर खरीदार व डेवलपर्स को राहत:

सरकार ने कहा कि, अब एक अप्रैल 2019 से बनने वाली नयी रियल एस्टेट आवासीय परियोजनाओं पर सिर्फ नयी दरें लागू होंगी, लेकिन 31 मार्च 2019 तक निर्माणाधीन परियोजनाओं पर डेलवपरों को नयी या पुरानी दर चुनने का अधिकार होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में परिषद की यहां वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुयी 34वीं बैठक में ये निर्णय लिये गये। बैठक के बाद राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय ने यह जानकारी देते हुये कहा कि, 31 मार्च तक जो परियोजनायें निर्माणाधीन रहेंगी, उनके डेवलपर को नयी या पुरानी दर चुनने का अधिकार होगा।

उन्होंने कहा कि, पुरानी दर में किफायती आवासों पर आईटीसी के साथ आठ प्रतिशत जीएसटी और अन्य पर आईटीसी के साथ 12 प्रतिशत जीएसटी प्रभावी है। नयी दर में किफायती आवासों के लिए बगैर आईटीसी के एक प्रतिशत और अन्य परियोजनाओं पर बगैर आईटीसी के पांच प्रतिशत जीएसटी है। उन्होंने कहा कि, डेवलपरों को नयी दर या पुरानी दर चुनने के लिए एक निर्धारित समय सीमा दी जायेगी जो, संबंधित राज्यों के साथ विचार विर्मश कर तय की जायेगी।

क्या होता है इनपुट टैक्स क्रेडिट:

अगर आसान शब्दों में समझें तो, जान लीजिए 100 रुपए का कच्चा माल बिस्किट बनाने के लिए कारोबारी खरीदने गया। इस पर कच्चा माल सप्लाई करने वाले ने 12 फीसदी टैक्स चुकाया तो, निर्माता को कच्चे माल के लिए 112 रुपए देने पड़े, लेकिन ये 12 रुपए जो टैक्स भरा गया वो लागत से अलग होगा। अब इस कच्चे माल से निर्माता ने बिस्किट बनाया और उस पर अपना मार्जिन रखा 8 रुपए। इसके बाद निर्माता बिस्किट को थोक विक्रेता को बेचेगा। निर्माता को 18 फीसदी जीएसटी लगेगाए, 108 रुपए पर 19 रुपए 44 पैसे तो, थोक विक्रेता को देने पड़ेंगे 127 रुपए 44 पैसे। अब तक चुकाए गए टैक्स के ऊपर टैक्स लगता था, यानी जो टैक्स भरा वो लागत बन जाती थी, लेकिन जीएसटी में लागत 100 रुपए ही रहेगी।

थोक विक्रेता ने निर्माता को जो 19 रुपए 44 पैसे चुकाए उसमें से 12 रुपए कम कर घट जाएंगे जो निर्माता ने 100 रुपए के साथ कच्चा माल खरीदने वक्त दिए थे और सरकार को जीएसटी चुकाना पड़ेगा, सिर्फ 7 रुपए 44 पैसे, यहां जो 12 रुपए बिस्किट बनाने वाले को बचे वही इनपुट टैक्स क्रेडिट है। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था का फायदा तभी मिल सकता है जब सभी ने यानी कच्चा माल मुहैया कराने वाले से लेकर बनाने वाले और ग्राहक को माल बेचने वाले ने रजिस्ट्रेशन करा रखा हो।

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