‘सबक देगी नानी’ में बच्चों के लिए संदेश है – किरण अग्रवाल

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Kiran Agarwal

राज एक्सप्रेस। बदलते वक्त के साथ अब यूट्यूब भी मनोरंजन का अच्छा साधन बन गया है। बड़ों के साथ-साथ अब बच्चों के लिए भी यूट्यूब पर कई मनोरंजक कार्यक्रम उपलब्ध हैं। इन्हीं में से एक है, किरन अग्रवाल (Kiran Agarwal) का ‘सबक देगी नानी’ और यह बच्चों में खूब लोकप्रिय भी है। यूट्यूब पर वर्ल्ड ऑफ किरन अग्रवाल के तहत अपने शो में वे एनिमेटेड किरदारों के जरिए दिलचस्प कहानियां प्रस्तुत करती हैं। शो के पहले सीजन में किरन द्वारा 24 कहानियां प्रस्तुत की गई थी और तब इसे 20 लाख से अधिक की दर्शक संख्या प्राप्त हुई थी। पहले सीजन की सफलता से उत्साहित होकर अब वे शो का दूसरा संस्करण ले आई हैं और यहां शेर, भालु, गधा और हाथी आदि एनिमेटेड किरदारों तहत कहानियां प्रस्तुत की जाएंगी।

किरन अग्रवाल ने कहा:

अपने शो के बारे में किरन कहती हैं, “मैं जॉइंट फैमिली के कल्चर से अच्छी तरह से परिचित हूं। संयुक्त परिवार सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि, यहां नानी और दादी द्वारा बच्चों में संस्कारों का सिंचन किया जाता है। मैंने पत्रकारिता का कोर्स किया है साथ ही मनोरंजन की दुनिया का भी हिस्सा रही हूं। यानी मुझे बाहरी दुनिया को करीब से देखने का मौका मिला है।” मैंने देखा कि, टूटते परिवारों की वजह से बच्चों को काफी सहना पड़ जाता है। आज के अभिभावकों के पास इतना समय नहीं है कि, वे अपने बच्चों के साथ ढंग से समय बिताएं वह उन्हें कहानियां सुनाएं।

'सबक देगी नानी' में बच्चों के लिए संदेश है - किरण अग्रवाल (Kiran Agarwal) यहीं से मुझे कहानियों पर आधारित शो बनाने का खयाल आया और उसका नाम रखा ‘सबक देगी नानी’। नाम से ही यह साफ है कि, इस शो में बच्चों के लिए संदेश है। दूसरी बात यह है कि, आजकल के बच्चे विदेशी कार्यक्रम खूब देखते हैं और इसी वजह से वह विदेशी कल्चर से प्रभावित होते जा रहे हैं। उन्हें इस प्रभाव से बचाने के लिए ‘सबक देगी नानी’ में हमारी संस्कृति व धरोहर को ध्यान में रख कहानियां प्रस्तुत की जाती है। शो की बढ़ती लोकप्रियता को देख या कहानियां हिंदी व अंग्रेजी में होती हैं और इनकी अवधि 5 से 7 मिनट की होती है, ताकि बच्चे बोर न हो जाएं।

देख सकते हैं किरन का पर्सनल टच:

किरन का पर्सनल टच भी इस शो में देखने को मिल जाता है। वे स्वयं नानी के किरदार के लिए डबिंग करती हैं और वे खुद कहती हैं कि डबिंग स्टूडियो के माइक्रोफोन के समक्ष नानी बन जो सुखद अनुभूति प्राप्त होती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। अपने इस शो के तहत किरन लाखों बच्चों में हमारे संस्कारों का सिंचन कर रही हैं और साथ ही हमारी धरोहर की भी रक्षा कर रही हैं, उनका यह काम वाकई सराहनीय है।

5/5 (2)

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