आरबीआई सभी क्षेत्रों के लिए पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा: शक्तिकांत दास

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RBI Governor Shaktikanta Das

राज एक्सप्रेस। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने गुरुवार को कहा कि, केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि, अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र के लिए नकदी की कमी नहीं हो। मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद होने वाली बैठक के बाद दास ने कहा कि, हम लगातार नकदी की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि, किसी भी क्षेत्र को नकदी की कमी नहीं हो। चालू वित्त वर्ष में अब तक खुले बाजार में हस्तक्षेप के जरिये डाली गयी नकदी 2.36 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है। साथ ही मौद्रिक नीति के बारे में अपना दृष्टिकोण को भी नपी-तुली कठोरता वाले से नरम कर तटस्थ कर दिया है।

अंतरिम लाभांश भुगतान:

डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि, आरबीआई वास्तविक ब्याज दर लक्ष्य नहीं रखता। अंतरिम लाभांश भुगतान के बारे में दास ने कहा कि, यह कानूनी प्रावधान है और निदेशक मंडल की 18 फरवरी को प्रस्तावित अगली बैठक में राशि तथा समय के बारे में निर्णय किया जाएगा तथा यह सरकार को तय करना है कि, वह उसे कैसे खर्च करती है। सरकार को बढ़े हुए राजकोषीय घाटे के संशोधित लक्ष्य को हासिल करने के लिये अंतरिम लाभांश की काफी जरूरत है। दास ने यह भी कहा कि, आरबीआई को बजट में जतायी गयी संभावना के अनुरूप जीएसटी संग्रह में तेजी की उम्मीद है। इसमें 18 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

नीतिगत दरों में कटौती का उद्योग ने किया स्वागत:

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति द्वारा नीतिगत दरों में एक चौथाई फीसदी की कटौती किए जाने को उद्योग जगत ने स्वागत योग्य कदम बताते हुये कहा कि, विकास गतिविधियों में तेजी लाने के लिय यह समय की जरूरत है। उद्योग संगठन फिकी के अध्यक्ष संदीप सोमानी ने यहां कहा कि, समिति का मौद्रिक नीति में सख्ती लाने के रूख को निष्पक्ष रूख में बदलने का निर्णय स्वागत योग्य शुरुआती कदम है।

मौद्रिक नीति और ब्याज दरों में बदलाव:

सीआईआई के अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने कहा कि, मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर रिजर्व बैंक के रूख में बदलाव स्वागत योग्य है। इससे कारोबारी धारणा को मजबूती प्रदान करने में बल मिलेगा। एसोचैम के अध्यक्ष बी डी गोयनका ने कहा कि, इस नीतिगत पहल की जरूरत थी और रिजर्व बैंक ने उद्योग की मांग को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है।

सरकार को अंतरिम लाभांश मांगने का अधिकार:

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि, आरबीआई से अंतरिम लाभांश मांगना और उसे अपनी इच्छानुसार उपयोग में लाना सरकार का अधिकार है। उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद आरबीआई के गवर्नर बने दास से 12 करोड़ किसान को सालाना 6000 रुपए नकदी दिए जाने से राजकोषीय स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सवाल पूछे गए थे। दास के आरबीआई गवर्नर का पदभार संभालने के बाद यह पहली मौद्रिक नीति समीक्षा है।

अंतरिम लाभांश का भुगतान आरबीआई कानून का हिस्सा:

पिछले साल मई में वित्त सचिव से सेवानिवृत्त होने वाले दास बजट के आंकड़ों को लेकर विश्वसनीयता के साथ-साथ बजट में की गई कई कल्याणकारी योजनाओं का राजकोषीय घाटे पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछे गए सवालों को भी टाल गए। दास ने कहा, अधिशेष राशि या अंतरिम लाभांश का भुगतान आरबीआई कानून का हिस्सा है। हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं, जो कानून से अलग हो। उल्लेखनीय है कि, इस बात को लेकर भी चिंता जताई गई है की सरकार राजकोषीय अंतर को पूरा करने के लिए लगातार दूसरे साल आरबीआई से लाभांश की मांग कर रही है। उच्च राजकोषीय घाटे को मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभाव के रूप में देखा जाता है। सरकार लाभांश राशि का कैसे उपयोग करती है, यह उसका अपना निर्णय होगा।

बैंकों की राय, भविष्य में ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है आरबीआई:

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक समीक्षा में अपने रुख को धीरे-धीरे सख्त करने से बदलकर तटस्थ करने के बाद बैंकों के शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि, केंद्रीय बैंक नीतिगत दर के मोर्चे पर कुछ और सुखद चमत्कार दिखा सकता है। भारतीय स्टेट बैंक के प्रमुख रजनीश कुमार ने कहा, नीति से यह संकेत मिलता है कि, आगे चलकर याज दरें और कम की जा सकती हैं। मुख्य मुद्रास्फीति के आंकड़े लगातार नीचे आ रहे हैं और मुद्रास्फीति की संभावनाएं नीचे की ओर आई हैं।

विदेश में रुपया मुद्रा बाजार बनाने पर विचार के लिए कार्यबल:

रिजर्व बैंक ने विदेश में रुपया मुद्रा बाजार बनाने से जुड़ी चुनौतियों के अध्ययन और सुझाव के लिए एक कार्यबल गठित करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने बयान में बताया गया है कि, विदेशों में भारतीय मुद्रा के प्रति रुचि बढ़ रही है। इसे देखते हुए रिजर्व बैंक ने इस दिशा में नीतिगत प्रयास किये हैं कि दूसरे देश में रहने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षित निवेश के लिए घरेलू बाजार में पैसा लगा सके। मुद्रा विनिमय दर में बदलाव के प्रति भी उन्हें सुरक्षित डेरिवेटिव निवेश के लिए विदेशों में रुपया मुद्रा बाजार शुरू करने के बारे में एक कार्यबल के गठन का प्रस्ताव है।

आरबीआई के अनुसार, कार्यबल इस दिशा में मौजूद चुनौतियों को गहन अध्ययन करेगा और नीतिगत उपायों के बारे में सुझाव देगा। वह दुनिया की दूसरी मुद्राओं की तुलना में रुपये स्थिरता सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार करेगा। कार्यबल के गठन तथा उसके कार्यक्षेत्र के बार में इस महीने के अंत तक जानकारी दी जायेगी।

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