एनबीएफसी की श्रेणियों का होगा विलय

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NBFC

राज एक्सप्रेस, मुंबई। रिजर्व बैंक ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों एनबीएफसी (NBFC) के संचालन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इनकी विभिन्न श्रेणियों के विलय का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने संपन्न छठी द्विमासिक बैठक के बाद विकास एवं नियामक नीतियों पर जारी बयान में कहा है कि, खास क्षेत्रों और एसेट के आधार पर एनबीएफसी की कई श्रेणियां अस्तित्व में आयीं। एनबीएफसी की हर श्रेणी के लिए नियम भी अलग-अलग रहे। वर्तमान में एनबीएफसी की 12 ऐसी श्रेणियां हैं।

एनबीएफसी की बड़ी श्रेणियों का एक श्रेणी में विलय:

डॉ. नचिकेत मोर की अगुवाई वाली छोटे कारोबारों और कम आमदनी वाले परिवारों के लिए गठित व्यापक वित्तीय सेवा समिति ने जनवरी 2014 और जी पद्मनाथन की अगुवाई वाली आंतरिक समिति ने अप्रैल 2014 में पेश अपनी रिपोर्ट में एनबीएफसी के विभिन्न श्रेणियों के विलय की सिफारिश की थी। आरबीआई ऐसे विलय और एनबीएफसी क्षेत्र के लिए वर्तमान समय के संस्थान आधारित नियमों की जगह गतिविधि आधारित नियमों के पक्ष में है। आरबीआई ने इसी वजह से यह निर्णय लिया है कि, ऋण मध्यस्थतता से जुड़ी एनबीएफसी की बड़ी श्रेणियों जैसे एसेट फाइनेंस कंपनी, लोन कंपनी और इनवेस्टमेंट कंपनी का एक श्रेणी में विलय कर दिया जायेगा। इस विलय के दायरे में 99 फीसदी से अधिक एनबीएफसी आ जायेंगी। इस माह के अंत तक इस संबंध में दिशानिर्देश जारी कर दिये जायेंगे।

शहरी सहकारी बैंकों के लिए बनेगा केंद्रीय संगठन:

रिजर्व बैंक ने प्राथमिक यानी शहरी सहकारी बैंकों को वित्तीय रूप से सुदृढ़ करने और उसके ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने के लिए एक केंद्रीय संगठन अंब्रेला आर्गेनाइजेशन के गठन का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने कहा है कि, शहरी सहकारी बैंक अपने ढांचे, आकार और पूंजी जुटाने के कम अवसर तथा संचालन के सीमित दायरे के कारण वित्तीय रूप से असुरक्षित होते हैं।

सहकारी बैंकों के लिए केंद्रीय संगठन का प्रचलन:

शहरी सहकारी बैंकों के लिए केंद्रीय संगठन का प्रचलन कई देशों में है। यह तरलता बढ़ाने के साथ सदस्य बैंकों को पूंजीगत मदद भी प्रदान करता है। यह सदस्य बैंकों के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी ढांचा भी तैयार करेगा, ताकि बैंक अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ा सकें। संगठन फंड प्रबंधन और परामर्श सेवायें भी दे सकता है। यूसीबी क्षेत्र के लिए केंद्रीय संगठन का विचार सबसे पहले वर्ष 2006 में सामने आया था। नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन कॉपरेटिव बैंस एंड क्रेडिट सोसाइटिज लिमिटेड ने रिजर्व बैंक के समक्ष इसके गठन का प्रस्ताव पेश किया है।

दोगुनी हुई खुदरा सावधि जमा की सीमा:

रिजर्व बैंक ने खुदरा सावधि जमा की सीमा बढ़ाकर दोगुनी करने का निर्णय लिया है, जिससे दो करोड़ रुपए या उससे ज्यादा का जमा थोक जमा की श्रेणी में आ जायेगा और दो करोड़ रुपये से कम का सावधि जमा अब खुदरा जमा माना जायेगा। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति बैठक के बाद विकास एवं नियामक नीतियों पर जारी बयान में बताया गया है कि, वर्तमान में एक करोड़ रुपए या उससे ज्यादा का सावधि जमा थोक जमा माना जाता है। अब इस सीमा को बढ़ाकर दो करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।

इसके बाद बैंक दो करोड़ रुपए या उससे ज्यादा के जमा के लिए अलग-अलग ब्याज दर तय कर सकेंगे। बयान में कहा गया है कि, इस आशय का दिशा-निर्देश फरवरी के अंत तक जारी किया जायेगा। थोक जमा पर पहले से ही अलग-अलग ब्याज दर निर्धारण की छूट है। इसका मतलब यह होता है कि, बैंक एक ही दिन एक ही अवधि के लिए जमा कराई गयी समान राशि की दो जमाओं पर अलग-अलग ब्याज दे सकता है।

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