आरबीआई गवर्नर से मिले अर्थशास्त्री, ब्याज दर में कटौती की मांग

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Indian Economy RBI Governor

राज एक्सप्रेस, नई दिल्ली। तेजी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy RBI Governor) की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग जाने पर कई प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने रिजर्व बैंक के प्रमुख से मिलकर चिंता जताई है। अर्थशास्त्रियों ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास से मुलाकात कर कहा है कि, ऐसी मौद्रिक नीति लानी होगी, जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार में फिर से तेजी आए। बता दें कि, चार अप्रैल को रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति कमेटी की बैठक होगी, जिसमें नए वित्त वर्ष के लिए मौद्रिक नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार पर चिंता:

सूत्रों के अनुसार, रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इसके पहले करीब एक दर्जन अर्थशास्त्रियों से मुलाकात की है और उनकी राय को सुना है। ज्यादातर अर्थशास्त्रियों की राय यही है कि, रिजर्व बैंक फिर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी चौथाई फीसदी की कटौती करे और उसे 6 फीसदी तक ले आए। इसके पहले रेपो रेट का यह स्तर अगस्त 2017 में था। रिजर्व बैंक अपनी पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में चौथाई फीसदी की कटौती कर चुका है। गौरतलब है कि, अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था सिर्फ 6.6 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो पिछली पांच तिमाहियों में सबसे कम वृद्धि दर है। कमजोर उपभोक्ता मांग और कम निवेश को इसकी वजह माना जा रहा है।

टैक्स कलेक्शन कम होने की आशंका:

अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटने को चिंता का बिंदु माना जा रहा है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटने से टैक्स कलेक्शन लक्ष्य से कम हो सकता है और सरकारी खर्च में कटौती आ सकती है। इस बैठक में शामिल एक अर्थशास्त्री ने कहा, बैठक में शामिल ज्यादातर अर्थशास्त्रियों की राय यही थी कि, ग्रोथ में तेजी लाने के लिए मौद्रिक नीति में ही कुछ बड़ा कदम उठाना पड़ेगा, क्योंकि वित्तीय विस्तार की बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि, अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ने से भारत के निर्यात पर चोट पड़ सकती है, जिसकी रफ्तार पहले से सुस्त है। फरवरी में भारत का निर्यात महज 2.4 फीसदी और जनवरी में 3.7 फीसदी बढ़ा है।

आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने का प्रस्ताव खारिज:

बैंकिंग क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक ने आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी एलआईसी द्वारा आईडीबीआई बैंक में सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के बाद बैंक का नाम बदलने का प्रस्ताव किया गया था। आईडीबीआई बैंक के निदेशक मंडल ने पिछले महीने बैंक का नाम बदलकर एलआईसी आईडीबीआई बैंक या एलआईसी बैंक करने का प्रस्ताव किया था। आईडीबीआई बैंक ने नियामकीय सूचना में कहा, निदेशक मंडल ने 19 मार्च 2019 को हुई बैठक में आरबीआई से मिली सूचना पर गौर किया।

सूचना में कहा गया है कि, केंद्रीय बैंक आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने के आग्रह को स्वीकार करने में असमर्थ है। हालांकि बैंक ने यह नहीं बताया कि, नियामक ने किन कारणों से नाम बदलने के प्रस्ताव को खारिज किया है। उल्लेखनीय है कि, इस महीने की शुरूआत में आरबीआई ने आईडीबीआई बैंक को सरकारी बैंक की जगह निजी क्षेत्र के बैंक में वर्गीकृत कर दिया। इसका कारण एलआईसी द्वारा आईडीबीआई बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण है।

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