गुर्जर आंदोलन ने दिखाए तेवर

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Gurjar Reservation Movement

राज एक्सप्रेस, भोपाल। राजस्थान में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति फिर सड़कों पर है (Gurjar Reservation Movement)। आंदोलन करना गलत नहीं है। आंदोलन शांति पूर्वक हो तो किसी को इसमें आपत्ति नहीं है। मगर अब यह समाज व देश के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। सरकार गुर्जरों से बात कर आंदोलन खत्म कराए।

राजस्थान में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति फिर सड़कों पर है। नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर उसने कई जगहों पर रेल व सड़क परिवहन को ठप कर रखा है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर चलने वाली अनेक ट्रेनें प्रभावित हुई हैं और उनके मुसाफिरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। गुर्जरों का यह आंदोलन पहली बार नहीं दिखा है। समय-समय पर गुर्जर समाज आरक्षण की मांग को लेकर आपे से बाहर दिखा है, क्योंकि अतीत में उनके लिए हुए आरक्षण के फैसले पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। स्टे इसलिए लगा था क्योंकि गुर्जरों के लिए पांच फीसदी सीटें आरक्षित करने से कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा लगा रखी है। अत: गुर्जरों को आश्वस्त करना सरकार के लिए अब आसान नहीं है। उन्हें 50 फीसदी कोटे के अंदर आरक्षण दिया जाता है, तो उससे वे जातियां नाराज होंगी, जिनके हिस्से से ये सीटें जाएंगी।

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गुर्जरों के आंदोलन की आंच वसुंधरा सरकार, उससे पहले गहलोत सरकार और अब फिर गहलोत सरकार को झुलसा रही है। इसी से पता चल जाता है कि गुर्जर कितने समय से अपनी मांग को लेकर नाराज हैं, मगर समाधान आज तक नहीं हो सका है। एक समय गुर्जरों ने खुद को अनुसूचित जनजाति घोषित करने तक की मांग की थी। इससे राजस्थान की मीणा जनजाति से उनका टकराव शुरू हो गया था। वैसे भी संविधान के तहत जनजाति की खास परिभाषा है। सरकारें मनमर्जी से इस प्रावधान में बदलाव नहीं कर सकतीं। इसीलिए पहले राजस्थान की भाजपा नीत वसुंधरा राजे सरकार और अब भाजपा नीत अशोक गहलोत सरकार के सामने गहरी उलझन है। अब यदि आंदोलन को सामाजिक नजरिए से देखें, तो जनता को भी आंदोलन का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। रेल व सड़क यातायात ठप होने से आम लोगों को इससे परेशानी हो रही है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों पर अच्छा खासा प्रभाव पड़ा है। सरकार को चाहिए कि वह गुर्जरों के साथ बातचीत करे और आंदोलन समाप्त कराए। नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जरों के आंदोलन का असर हर बार रेल और सड़क मार्ग पर ही पड़ता है।

किसी बात को लेकर आंदोलन करना गलत नहीं है, लेकिन यदि आंदोलन शांति पूर्वक हो तो किसी को इसमें आपत्ति भी नहीं है। लेकिन जिस तरह से गुर्जर संघर्ष समिति के पदाधिकारी इस आंदोलन को उग्र बनाते जा रहे हैं, उससे देश के साथ-साथ देश के लोगों को भी भारी नुकसान हो रहा है। गुर्जरों को चाहिए कि वह अपना आंदोलन शांति पूर्वक करें जिससे आमजन को तकलीफ न हो। वैसे आजादी के बाद से सभी जातियों का विकास हुआ है, लेकिन कुछ दल चुनाव से पहले इस तरह के आश्वासन दे देते हैं, जो चुनाव बाद पूरे नहीं हो पाते हैं और समाज के लोग राजनीतिक दलों पर दबाव डालना शुरू कर देते हैं। गुर्जरों का आंदोलन भी इसी का परिणाम है।

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