जहरीली शराब पर अंकुश कब

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Poisonous Liquor

राज एक्सप्रेस, भोपाल। तमाम दावों और घोषणाओं के बाद भी देश में जहरीली शराब (Poisonous Liquor) का कारोबार थमा नहीं है। यूपी, उत्तराखंड और बिहार में शराब पीने से कई लोग मारे गए हैं। जब तक हमारी सरकारों का नजरिया शराब के जरिए खजाना भरने तक सीमित रहेगा, तब तक समस्या बनी रहेगी।

लाख दावों के बाद भी राज्य में जहरीली शराब के कारोबार पर कोई अंकुश नहीं लग सका है। गांव-गांव कच्ची शराब बनती और बिकती है, पर आश्चर्य है कि पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती या यूं कहें कि समूचे तंत्र की शह पर ही मौत का यह कारोबार पनपता है। जिन राज्यों में पूर्ण शराबबंदी लागू है, वहां भी और जहां धड़ल्ले से शराब बिक रही है, वहां भी लोग बेमौत मारे जा रहे हैं। मगर हमारे नीति-नियंताओं की पेशानी पर बल नहीं दिख रहा है। सरकार और प्रशासन की लापरवाही का शिकार अब उत्तरप्रदेश, बिहार व उत्तराखंड के वे लोग हुए हैं, जो जहरीली शराब पीकर मर चुके हैं और उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। बता दें कि यूपी, उत्तराखंड व बिहार में जहरीली शराब का कहर देखने को मिला है। जहरीली शराब का सेवन करने से अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि कई लोगों की हालत गंभीर है। बताया जा रहा है कि इन सभी लोगों की मौत शराब पीने की वजह से हुई है। देखा जाए तो हर घटना के बाद सरकारें गंभीरता का जो दिखावा करती है, वह समय के साथ गायब हो जाता है। फिर अगली घटना तक कोई भी जहरीली शराब पर पाबंदी की बात तक नहीं करता।

जहरीली शराब को लेकर स्थिति इतनी विकट है कि समय-समय पर हर राज्य में किसी न किसी की मौत हो जाती है। वैसे, इस काले कारोबार के लिए सिर्फ पुलिस और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। राजनीतिक नेतृत्व भी इसके लिए खूब जिम्मेदार है। पार्टी और सरकार कोई भी हो, कभी किसी ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। कई नेता तो बाकायदा चुनाव में जीत के लिए अवैध शराब को हथियार बनाते हैं। गरीब-गुरबों को बहलाकर शराब पिलाई जाती है और इस आड़ में अनैतिक काम भी कराए जाते हैं। करने वाले यह नहीं सोचते कि वे देश का कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं। पीढ़ियां चौपट हो रही हैं, बच्चे स्कूल जाने के बजाय शराब बनवाते हैं और फिर वही उनका पेशा बन जाता है। वहीं इसे पीने वाले आसपास का माहौल खराब करते हैं और अपने घरों का माहौल भी बिगाड़ते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस समस्या पर अंकुश लगाए, ताकि लोगों को बेमौत मरने से रोका जा सके और समाज का भला हो।

जब तक सरकारों की मौजूदा नीतियां कायम रहेंगी, तब तक शराब की लत की चपेट में आने से लोगों को नहीं बचा सकते हैं। अगर हर गली नुक्कड़ पर शराब की दुकानें खोल देंगे, तो लोग ज्यादा सेवन करेंगे ही। जहां शराब बंदी करने का दिखावा किया जाता है, वहां अवैध बिक्री शुरू हो जाती है और फिर खराब गुणवत्ता वाली शराब बिकने लगती है, जो जानलेवा साबित होती है। शराब के आदी लोग ज्यादा दाम पर भी घटिया शराब पीने लगते हैं, जो मौत के करीब ले जाती है। वैसे भी हर सरकार की कोशिश रहती है कि राजस्व बढ़ाने के लिए शराब के धंधे का ज्यादा से ज्यादा दोहन कर ले। जाहिर है, ऐसे में लोगों को नशे या जहरीली शराब से बचा पाना संभव नहीं है।

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