युवाओं को प्रेरित करते वाले आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद जी का आज 156वां जन्मदिन

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Swami Vivekananda Birth Anniversary

राज एक्‍सप्रेस। आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद जी का आज 156वां जन्मदिन (Swami Vivekananda Birth Anniversary) है, उनका जन्‍म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था, उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। हालांकि, नरेंद्र की बुद्धि बचपन से ही बड़ी तीव्र और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। भारत में स्वामी विवेकानंद की जयंती, अर्थात 12 जनवरी को प्रतिवर्ष उनके जन्मदिवस को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद जी का परिचय-

जन्म :            12 जनवरी 1863
जन्म स्थान :      कलकत्ता
गुरु :               रामकृष्ण परमहंस
पिता का नाम :    विश्वनाथ दत्त (कलकत्ता हाईकोर्ट के प्रसिद्ध वकील थे)
माता का नाम :    भुवनेश्वरी देवी
मृत्यु :              4 जुलाई 1902 (उम्र 39)

शिक्षा एवं रामकृष्ण मठ की स्थापना

स्वामी विवेकानंद ने 16 वर्ष की आयु में कलकत्ता से एंट्रेस की परीक्षा पास की और कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि प्राप्त की। स्वामी विवेकानंद (नरेंद्र) नवंबर,1881 ई. में रामकृष्ण से मिले और उनकी आंतरिक आध्यात्मिक चमत्कारिक शक्तियों से नरेंद्र नाथ इतने प्रभावित हुए कि, वे उनके सर्वप्रमुख शिष्य बन गए और स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन और 9 दिसंबर 1898 को कलकत्ता के निकट गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की।

विवेकानंद शब्द का अर्थ-
  • विवेकानंद 2 शब्दों से मिलकर बना हैं… विवेक+आनंद= विवेकानंद
  • विवेक संस्कृत मूल का शब्द है।
  • विवेक का शब्दिक अर्थ होता है- बुद्धि
  • आनंद का शब्दिक अर्थ होता है- खुशियां
नई ऊर्जा फूंक देते हैं विवेकानंद के मंत्र

हमारे देश में कई ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिनके मुंह से निकले शब्द जीवन में सफलता के मंत्र बन जाते हैं। इसके अलावा ये शब्द कई बार एक निराश व्यक्ति के अंदर भी एक नई ऊर्जा फूंक देते हैं। स्वामी विवेकानंद भी ऐसी ही महापुरुष थे, जिनके वचन युवाओं में एक नई जान फूंक सकते हैं। स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के एक महान चिंतक, दार्शनिक, युवा संन्यासी, युवाओं के प्रेरणास्रोत और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे।

39 साल की उम्र में हो गया था निधन

स्वामी विवेकानंद का निधन महज 39 साल की उम्र में हो गया था। बांग्ला लेखक शंकर की पुस्तक ‘द मॉन्क एस मैन’ में कहा गया है कि, निद्रा, यकृत, गुर्दे, मलेरिया, माइग्रेन, मधुमेह एवं दिल सहित 31 बीमारियों से स्वामी विवेकानंद को जूझना पड़ा था। 4 जुलाई 1902 को बेलूर में रामकृष्ण मठ में उन्होंने ध्यानमग्न अवस्था में महासमाधि धारण कर प्राण त्याग दिए।

 1893 के भाषण से दुनिया भर में मिली पहचान

स्वामी विवेकानंद भारतीय संस्कृति एवं हिंदू धर्म के प्रचारक-प्रसारक एवं उन्नायक के रूप में जाने जाते हैं। विश्वभर में जब भारत को निम्न दृष्टि से देखा जाता था, ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर, 1883 को शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म पर प्रभावी भाषण देकर दुनियाभर में भारतीय आध्यात्म का डंका बजाया। विश्व धर्म सम्मेलन में जब उन्होंने अपना संबोधन ‘अमेरिका के भाइयों और बहनों’ से प्रांरभ किया तब काफी देर तक तालियों की गड़गड़ाहट होती रही। स्वामी विवेकानंद के प्रेरणात्मक भाषण की शुरुआत मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों के साथ करने के संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था। स्वामी जी ने शिकागो की धर्म संसद में भाषण देकर दुनिया को ये एहसास कराया कि, भारत विश्व गुरु है।

विवेकानंद जी के अनमोल विचार-
  • उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक अपने लक्ष्य तक न पहुंच जाओ।
  • जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते।
  • एक समय में एक काम करो, ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
  • लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।
  • ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।
  • किसी की निंदा न करें। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो जरूर बढ़ाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िए, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिए और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिए।
  • कभी मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यही है, तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।
  • एक शब्द में यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।
  • उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता।
  • सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
  • विश्व एक व्यायामशाला है, जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
  • दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, न कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है।
  • हम जितना ज्यादा बाहर जाएं और दूसरों का भला करें, हमारा हृदय उतना ही शुद्ध होगा और परमात्मा उसमे बसेंगे।
  • बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।
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