कश्मीर की जिद छोड़ ही दे पाक

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Shahid Afridi’s Controversial Statement

राजएक्सप्रेस, भोपाल। पाक की कश्मीर की मांग के बीच पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने कहा है कि उससे अपने मुल्क के लोगों को संभाला नहीं जा सकता, कश्मीर क्या संभलेगा (Shahid Afridi’s Controversial Statement)। उनकी यह बात बिल्कुल सही है। बंटवारे के बाद पाकिस्तान और भारत की हालत क्या है? किसी से छिपा नहीं है।

अशांत और बदमिजाज पाकिस्तान को भारत न जाने कितनी बार आईना दिखा चुका है, मगर हर बार वह खुद को पाक-साफ बताने की पुरजोर कोशिश करता रहता है। लेकिन इस बार उसे आईना खुद उसके देश के रोल मॉडल और पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने दिखाया है। अफरीदी कश्मीर को लेकर जब तब बयान देते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अपने मुल्क पाकिस्तान को दो टूक सुनाई है। अफरीदी ने कहा कि कश्मीर को संभालना पाक जैसे मुल्क के बस की बात नहीं है। वह अपने मुल्क के लोगों को ही नहीं संभाल पा रहा है। वैसे, अफरीदी अपनी बात पर कब तक टिकेंगे, यह कोई नहीं जानता। लेकिन उनकी बात में पाकिस्तान की बेचारगी सामने आती है, जिसे लेकर वह भारत पर आगबबूला होता रहता है। पाकिस्तान कश्मीर को लेकर किस हद तक जा सकता है, यह हम और पूरी दुनिया देख चुकी है। पर बातचीत और शांति के जरिए वह कभी भी इस मुद्दे पर भारत के साथ नहीं बैठता, जबकि उसकी इस हरकत का फायदा आतंकी संगठन उठाते रहते हैं।

यह कोई छिपा तथ्य नहीं है कि कश्मीर में संवादहीनता की स्थिति से पैदा होने वाले असंतोष का फायदा पाकिस्तानी ठिकानों से काम करने वाले लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूह उठाते हैं और युवाओं के सामने भ्रम परोस कर उन्हें अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि वहां से कुछ उच्च शिक्षित नौजवानों के भी आतंकवादी समूहों में शामिल होने की खबरें आइर्ं। निश्चित रूप से यह चिंता को बढ़ाने वाली बात है, क्योंकि ऐसे युवा बाकी भ्रमित लोगों के सामने विकल्प पेश कर देते हैं। जबकि इन साधारण लोगों से मुख्यधारा की राजनीति अगर संवाद बनाए तो आतंकवादी समूहों को कमजोर किया जा सकता है। लेकिन जरूरत इन्हीं इक्का-दुक्का उदाहरणों को आम बनाने की है, ताकि समस्या के दीर्घकालिक समाधान का रास्ता तैयार हो सके। इसके लिए समस्या के दायरे में आने वाले सभी समूहों से बातचीत का माहौल बनाने और भरोसा पैदा करने की जरूरत है, लेकिन पाक यह नहीं समझ पा रहा।

कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का प्रपंच संयुक्त राष्ट्र से लेकर इस्लामाबाद तक दिखाई देता है। मगर कश्मीर की आड़ में भारत के साथ खुद उसके देश में आतंकी समूह क्या गुल खिला रहे हैं, उससे उसे कोई वास्ता नहीं। आजादी के बाद बंटवारे में पाकिस्तान के हिस्से जो भी गया, उसकी दुर्दशा किसी से छिपा नहीं है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति, वैश्विक मोर्चे पर फजीहत और घरेलू स्तर पर आतंकवाद और बेरोजगारी आज पाकिस्तान की पहचान है। भारत और पाक दोनों एक समय पर आजाद हुए। आज भारत की पहचान को पूरी दुनिया सम्मान से देखती है। वहीं पाकिस्तान के साथ एक-दो को छोड़ कोई भी देश रिश्ता नहीं रखना चाहता। अगर पाकिस्तान की मांग के अनुरूप उसे कश्मीर सौंप भी दिया जाए, तो क्या गारंटी कि पाक उसे धरती का स्वर्ग बनाए रखेगा जैसा अभी वह है।

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