भारत-चीन की जोर-आजमाइश में श्रीलंका पर राजनीतिक संकट

0
43
Political Crisis

राज एक्सप्रेस | श्रीलंका में राजनीतिक संकट (Political Crisis) के पीछे चीन और भारत के बीच आपस में खींचतान नजर आ रहा है| दोनों देश श्रीलंका में बंदरगाह, एयरपोर्ट जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट के लिए जबर्दस्त जोर-आजमाइश कर रहे है| चीन की कंपनी ने श्रीलंका में 1.5 अरब डॉलर से एक नए कॉमर्शिल डिस्ट्रिक्ट का निर्माण किया है| जिसमें होटल और मोटर रेसिंग ट्रैक जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल है| इसके अलावा चीन श्रीलंका के दक्षिण में एक विशाल कंटेनर टर्मिनल भी बना चुका है|

अब भारत की तरफ से भी बंदरगाह समेत अन्य प्रॉजेक्ट्स में चीन को चुनौती मिल रही है| भारत को चिंता है कि, उसके दक्षिणी तट के नजदीक बसा दुनिया का सर्वाधिक व्यस्त शिपिंग रूट वाला यह मुल्क चीन का मिलिटरी आउटपोस्ट न बन जाए| अब चीन और भारत की यह जोर-आजमाइश श्रीलंका में राजनीतिक संकट की वजह बन रही है| श्रीलंका में राष्ट्रपति श्रीसेना और पूर्व पीएम रानिल विक्रमसिंघे के बीच के विवाद को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है|

सरकारी अधिकारियों और विदेशी डिप्लोमैट्स का कहना है कि श्रीलंका में भारतीय हित को सुरक्षित करने के मसले पर ही यहां की सरकार में विवाद पैदा हुआ| श्रीलंका सेना ने 26 अक्टूबर को रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर चीन समर्थक राजनेता माने जाने वाले महिंदा राजपक्षे को पीएम बनाया था|

विक्रमसिंघे ने बताया है कि, पिछले महीने राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली कैबिनेट बैठक में तीखी बहस हुई| यह बहस कोलंबो बंदरगाह के प्रॉजेक्ट को जापान-भारत के जॉइंट वेंचर को देने के प्रस्ताव पर हुई| हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि, कैबिनेट बैठक में इसे भारत-जापान को नहीं देने का पेपर पेश किया गया था| उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि, अंतिम फैसले में भारत, जापान और श्रीलंका के बीच हुए एमओयू का सम्मान होना चाहिए|

नहीं दिया जवाब

विक्रमसिंघे ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया कि, कहीं उन्हें हटाने के पीछे चीन और भारत के बीच का संघर्ष तो नहीं था| इस बैठक में श्रीलंका के पूर्व मंत्री रजीता सेनार ने इस बात की पुष्टि की है कि, राष्ट्रपति और पीएम के बीच बहस हुई थी| हालांकि राष्ट्रपति के दफ्तर ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया| सोमवार को श्रीलंका सेना ने एक जनसभा में कहा था कि, उनके राजनीतिक विरोधी उन्हें एंटी इंडिया बता उनके और भारत सरकार के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे है|

भारत के विदेश मंत्रलय ने कहा कि, श्रीलंका के विकास में सहयोग देने के लिए उसकी प्रतिबद्धता है| पिछले हफ्ते जारी एक बयान में चीन ने भी उन आरोपों को खारिज किया था कि, वह श्रीलंका में राजनीतिक परिवर्तन करने की साजिश में शामिल था| भारत चाहता है कि, श्रीलंका कोलंबो में बनने वाले करीब 1 अरब डॉलर के दूसरे फॉरेन ऑपरेटेड कंटेनर टर्मिनल बनाने का ठेका उसे सौंपे| इसे एमओयू में भी शामिल किया गया है जिसपर श्रीलंका ने अप्रैल 2017 में हस्ताक्षर किया था| ऐसा माना जा रहा था कि, श्रीलंका कैबिनेट की बैठक बंदरगाह प्रॉजेक्ट को अनुमति देने लिए बुलाई गई थी|

No ratings yet.

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image