रामपाल का भी हो गया हिसाब

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Rampal Baba

राजएक्सप्रेस, भोपाल। हत्या के दो मामलों में दोषी करार दिए गए रामपाल (Rampal Baba) को हिसार की कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। रामपाल को सजा समाज के लिए कड़ा संदेश है। समय आ गया है कि हम ढोंगी बाबाओं के जाल में कतई न फंसे और गलत-सही को समझें।

हत्या के दो मामलों में दोषी करार दिए गए रामपाल को हिसार की कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। रामपाल को चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या के आरोप में दोषी पाया गया था, बीते 11 अक्टूबर को ही उसे दोषी करार दिया गया था। हिसार की एक विशेष अदालत ने रामपाल समेत कुल उसके 26 अनुयायियों को दोषी करार दिया था। सजा के ऐलान को देखते हुए जेल के आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। आजीवन कारावास के अलावा रामपाल पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। बता दें कि रामपाल को गिरफ्तार करने में हरियाणा पुलिस के पसीने छूट गए थे। 18 दिन की लुकाछिपी के बाद पुलिस ने रामपाल को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन इस पूरे ऑपरेशन पर राज्य पुलिस का 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च हुआ था। इस दौरान छह लोगों की जान गई थी और 250 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। इसी से साबित होता है कि संत और आस्था के नाम पर रामपाल ने खुद को कितना ताकतवर बना लिया था और आश्रम के अंदर कुकर्मो को अंजाम दे रहा था। जब रामपाल की कुंडली सामने आई थी, तब देश स्तब्ध रह गया था।

रामपाल के रूप में एक और पाखंडी बाबा के सामने आने के बाद इस बात पर बहस फिर शुरू हो गई है कि आखिर कब तक भोले-भाले लोग अपनी जमापूंजी और आबरू गंवाते रहेंगे। लोगों को अपने जाल में फंसाकर मालामाल होने वाले बाबाओं की संख्या में रोज बढ़ोतरी हो रही है। फिर भी उनके चाहने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही। पिछले दो दशक में जिस तरह से एक के बाद एक बाबाओं का अवतरण हुआ, उसने हिंदू समाज की फजीहत तो कराई, लोगों में आपाधापी भी मचाई कि किस बाबा के पास जाने से मोक्ष मिलेगा और कौन बाबा उनके सारे दुख मिनटों में हर लेगा। बाबा भी अपने चमत्कार से एक-दूसरे को परास्त करते रहे। किसी की दुकान सड़क के किनारे झोपड़ी में लगी, तो किसी की सड़क किनारे महलनुमा डेरे में। लेकिन लूट तो हर जगह मची रही। जो जगह जितनी बड़ी, लूट भी उतनी ही ज्यादा।

आसाराम, रामरहीम और अब रामपाल आज बाबाओं की जिस तरह बाढ़ आई हुई है, उसे रास्ता हमने दिया है। अब इस बाढ़ को देश और समाज से बाहर करने का रास्ता भी हमें ही बनाना होगा। दरअसल, किसी ढोंगी को संत या बाबा हम बनाते हैं, बाद में वह हमारा शोषण करता है। आसाराम से लेकर राम रहीम तक जितने भी बाबा आए, सबका स्वार्थ पैसा, शोहरत और सेक्स तक ही सीमित रहा। दुनिया को मोह-माया का ज्ञान देने वाले ये बाबा खुद को कड़े पहरे में रखते हैं। प्रवचन हाल में एसी सामान्य बात है। यह सब देखकर भी भक्तों की आंखें नहीं खुलतीं, क्योंकि उनकी आंखों पर वे डर का चश्मा पहना देते हैं। लेकिन अब वक्त आ गया है कि डर के चश्मे को उतार फेंका जाए।

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