शिक्षा के प्रति बनाएं माहौल

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Human Capital Index Report 2018

राजएक्सप्रेस, भोपाल। विश्व बैंक का ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स रिपोर्ट (Human Capital Index Report 2018) में कहा गया है कि प्रत्येक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने पर कमाई में आठ फीसदी का इजाफा हो जाता है। रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा हमारे लिए किस हद तक जरूरी है। अत: शिक्षा के प्रति हम सभी सजग हों।

हममें से कई को लगता है कि वे अपनी मेहनत का उचित फल नहीं पा रहे हैं। यह बात दिमाग में यूं ही नहीं आती। विश्व बैंक का ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में चार वर्ष की उम्र में स्कूल जाने की शुरुआत करने वाला बच्चा 18 वर्ष की उम्र तक सिर्फ 10.2 वर्ष की स्कूल शिक्षा ही प्राप्त करता है। रिपोर्ट कहती है कि प्रत्येक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने पर कमाई में 8 फीसदी का इजाफा हो जाता है। चूंकि, औसत भारतीय 14 वर्ष की अनिवार्य स्कूली शिक्षा के मुकाबले 10 वर्ष दो महीने की ही स्कूली शिक्षा प्राप्त करते हैं, इसलिए वह जितना कमाने के लायक होते हैं, उससे 30.4 प्रतिशत कम की कमा पाते हैं। यह विश्व बैंक की मानव पूंजी सूचकांक की पहली रिपोर्ट है। इसमें बच्चों के जीवित रहने की संभावना, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे पैमानों पर 157 देशों का आकलन किया गया है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस सूचकांक में भारत को मिला स्थान देश में मानव पूंजी के विकास के लिए उठाए गए प्रमुख मुहिमों को परिलक्षित नहीं करता है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में शिक्षा के अधिकार यानी आरटीई के तहत 2009 की तुलना में 2014 के अंत तक स्कूली शिक्षा से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में 26 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। 2009 में स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या 81.5 लाख थी जो साल 2014 के अंत में घटकर 60.6 लाख रह गई, जिसमें लड़कियों की संख्या 28.9 लाख और लड़कों की संख्या 31.6 लाख है। देशभर में स्कूलों में वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित लगभग 21 लाख सीटों में से केवल 29 प्रतिशत सीटें ही भरी जा सकी हैं। यह आंकड़ा सरकारी है। इसमें उन बच्चों का नाम नहीं है जिन्हें ट्रैक नहीं किया जा सका। स्कूली शिक्षा से वंचित या पढ़ाई पूरी न कर पाने वाले लोगों का प्रतिशत कम नहीं है। इसी वजह से देश में गरीबी, बेरोजगारी और कम आय वालों का प्रतिशत बढ़ रहा है। कम पढ़ाई के अभाव में आज भी बहुत सारे लोग शोषण का शिकार हो रहे हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट में जिस समस्या की तरफ संकेत किया गया है, अगर उस पर दशकों पहले अमल किया गया होता तो आज स्थिति कुछ और होती।

देश में मध्यम आय और निम्न आय वाले दो तरह के वर्ग हैं। दोनों ही वर्ग ज्यादा कमाने की चाह में इसलिए कुंठा का शिकार होते हैं क्योंकि वे पढ़ाई के अभाव में लक्ष्य सही दिशा में केंद्रित नहीं कर पाते और असफलता का शिकार बनते हैं। उनकी यह कुंठा उन्हें गलत रास्ते की तरफ ले जाती है और उनका सफलता का शुरू हुआ रास्ता जेल तक पहुंच जाता है। पढ़ाई की महत्ता हमें बचपन से ही सिखाई जाती है। जो लोग इस पर अमल कर लेते हैं, वे सफल हो जाते हैं और जो नहीं कर पाते वे संघर्ष करते रहते हैं।

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