पाकिस्तान पर छाया आर्थिक संकट

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Pakistan Economy Crisis

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी गिर चुकी है (Pakistan Economy Crisis)। चीन अमेरिका और अन्य देशो का कर्ज पाकिस्तान पर बढ़ रहा है। पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थति से उभरने के लिए आईएमएफ या पडोसी देशो से कर्ज ले सकता हैं। एक डॉलर की कीमत पाकिस्तानी रुपए 131.72 तक पहुंच चुकी हैं ।

1980 के दशक के अंत से पाकिस्तान आईएमएफ में कई बार गया है। सबसे हालिया 2013 में, जब इस्लामाबाद को इसी तरह के संकट से निपटने के लिए $ 6.6 बिलियन का ऋण मिला।

प्रधान मंत्री इमरान खान ने कहा

प्रधान मंत्री इमरान खान ने बुधवार को देश को एक बढ़ते असंतुलन के संकट से बाहर करने की कसम खाई और कहा कि पाकिस्तान को 10-12 अरब डॉलर की जरूरत है। “हम इससे बाहर निकल जाएंगे, मैं इस संकट से देश को बाहर ले आऊंगा।”

आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीन लागर्ड ने कहा

वह गुरुवार को पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलेंगे, उम्मीद है कि इस्लामाबाद अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था के बकाया का अनुरोध करेगा। लागर्डे ने आगे कहा कि आईएमएफ को अभी तक इस्लामाबाद से औपचारिक कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन वह और अन्य आईएमएफ अधिकारी गुरुवार दोपहर बाली में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगे।

बाली में फंड की वार्षिक बैठक में भाग लेने वाले पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद उमर ने इस हफ्ते के शुरू में घोषणा की थी कि सरकार “स्थिरीकरण वसूली कार्यक्रम” पर आईएमएफ के साथ बातचीत करेगी।

उन्होंने एक प्रेस ब्रीफिंग को बताया, “मुझे लगता है कि उनके हिस्से पर एक कार्यक्रम अनुरोध हो सकता है, लेकिन इस पर चर्चा नहीं की गई है।”

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा  

पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। एक न्यूज़ चैनल के साथ बात करते हुए पोम्पेओ ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार के साथ काम करने का इच्छुक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आईएमएफ से कर्ज मिल जाएगा।

माइक पोम्पेओ ने आगे कहा, “कोई गलती न करें- हम इस पर नजर रखेंगे कि आईएमएफ क्या करता है? यह तार्किक नहीं है कि आईएमएफ डॉलर दे, अमेरिकी डॉलर भी आईएमएफ की फंडिंग का हिस्सा हैं।

आखिर क्यों अमेरिका नहीं चाहत की पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिले

अमेरिका नहीं चाहता की आईएमएफ पाकिस्तान को वित्तीय सहायत प्रदान करे इसके पीछे वजह यह है कि अगर आईएमएफ पाकिस्तान को वित्त देता है तो वह वित्त (डालर) अप्रत्यक्ष रुप से चीन के पास जाएगा। जो अमेरिका  बिलकुल नहीं चाहता।

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