रूसी हथियार खरीदने पर चीनी सेना पर प्रतिबंध

0
14
Chinese army
कार्रवाई का मकसद किसी देश की क्षमताओं को कमजोर करना नहीं: Chinese army

वॉशिंगटन। अमेरिका ने रूस से सैन्य हथियार खरीदने के कारण चीन की सेना (Chinese army) के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि, इसका मकसद रूस को उसकी ‘अहितकारी गतिविधियों’ और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान दखल देने के लिए दंडित करना है। विदेश विभाग ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ‘आज की गई कार्रवाई का मकसद किसी देश की सैन्य क्षमताओं को या उसकी लड़ने की क्षमता को कमजोर करना नहीं है।’

विभाग ने कहा, ‘इसका मकसद अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया में दखल देने, पूर्वी यूक्रेन में अस्वीकार्य व्यवहार करने और अन्य अहितकारी गतिविधियों के जवाब में रूस को सबक सिखाना है।’ सीएनएन के मुताबिक, यह प्रतिबंध उस कानून के तहत लगाए गए हैं जिसमें अमेरिका को रूसी हथियार निर्माताओं सहित खुफिया एजेंसी या सैन्य सेवाओं से जुड़े कुछ निश्चित लोगों के साथ महत्वपूर्ण लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने भी ब्लैकलिस्ट में गुरुवार को 33 और रूसी लोगों के नाम जोड़ दिए। इससे अब सूची में कुल 72 लोग हो गए। पोंपियो ने वित्त मंत्री स्टीफन मनुचिन की सलाह से चीनी सेना के उपकरण विकास विभाग और इसके निदेशक ली शांगफू पर रूस से एसयू-35 लड़ाकू विमान और एक एस-400 (जमीन से हवा में वार करने वाली) मिसाइल सिस्टम खरीदने के चलते प्रतिबंध लगा दिया।

ब्रेग्जिट: टरीजा मे ने यूरोपीय संघ पर जताई नाराजगी

ब्रिटेन की PM टेरीजा मे ने यूरोपीय संघ को शुक्रवार को अल्टीमेटम दिया कि वह ब्रेग्जिट के लिए वैकल्पिक योजना लाए और वार्ता में ब्रिटेन के साथ सम्मानपूर्वक तरीके से पेश आए। यूरोपीय परिषद के प्रमुख डॉनल्ड टस्क ने ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग में घोषणा की थी कि ब्रिटेन की ब्रेग्जिट योजना व्यावहारिक नहीं है। इसके एक दिन बाद मे ने डाउनिंग स्ट्रीट से टेलीविजन पर यह बयान दिया। मे ने उनकी योजना को खारिज करने के लिए यूरोपीय संघ के नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि, यह ‘स्वीकार्य नहीं है।’ ब्रिटिश PM ने कहा, ‘मैं जनमत संग्रह के नतीजे को नहीं पलटने वाली और ना ही मैं अपने देश को तोडूंगी।’ उन्होंने कहा, ‘कल डॉनल्ड टस्क ने कहा था कि, हमारे प्रस्तावों से एकल बाजार कमजोर होगा। उन्होंने विस्तार से इसके बारे में नहीं बताया या कोई जवाबी प्रस्ताव पेश नहीं किया। इसलिए वार्ता में गतिरोध है।

दूसरे पक्ष के प्रस्ताव को खारिज कर देना स्वीकार्य नहीं:

’उन्होंने कहा, ‘इस प्रक्रिया के दौरान मैंने यूरोपीय संघ के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया। ब्रिटेन भी ऐसी ही उम्मीद रखता है, इस प्रक्रिया के अंत में अच्छे संबंध इस पर निर्भर करते हैं।’ मे ने कहा, ‘वार्ता के इस स्तर पर विस्तृत स्पष्टीकरण और जवाबी प्रस्ताव दिए बगैर किसी दूसरे पक्ष के प्रस्ताव को खारिज कर देना स्वीकार्य नहीं है। हमें यूरोपीय संघ से जानने की जरूरत है कि असल मुद्दे क्या है और उनके विकल्प क्या हैं ताकि हम उन पर चर्चा कर सकें। तब तक हम उन पर प्रगति नहीं कर सकते।’ उन्होंने ब्रेग्जिट पर अपने रुख को दोहराया कि ‘बुरे समझौते से बेहतर है कि कोई समझौता न हो।’

5/5 (1)

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image