विश्‍वकर्मा जयंती पर पूजा करने से व्यापार में होती हैं बढ़ोत्तरी जानियें कैसे करें पूजा

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Vishwakarma Jayanti

हिन्दू धर्म में सभी त्यौहार पंचाग तिथियों के अनुसार ही मनायें जातें हैं। लेकिन विश्वकर्मा जयंती (Vishwakarma Jayanti) ही सिर्फ एक ऐसी जयंती हैं जो प्रत्येक साल 17 सितम्बर को मनाई जाती हैं। भारत में सभी पर्वों में जो पूजा की जाती हैं वो घर की सुख समृद्धि के लिए की जाती हैं। लेकिन विश्वकर्मा जयंती की पूजा में ऐसा नहीं होता हैं। बल्कि इस पूजा को इसलिए किया जाता हैं ताकि व्यापार आदि कामों में बरकत, तरक्‍की हो।

इस पूजा में भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा की जाती हैं, क्योंकि  भगवान विश्वकर्मा जी को मशीनों का देवता माना जाता हैं। इस पूजा में औजारों, गाड़ी, कम्प्यूटर, ऑफिस और फैक्टरी की मशीनों की पूजा की जाती हैं ताकि काम में अच्छे से बरकत और नुमाफा हो। विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त इस साल वृश्चिक लग्न जो कि सुबह 10:17 बजे से 12:34 तक है। यह पूजा विशेष लाभकारी व सफलतादायी है, क्योंकि मंगल पराक्रम भाव में उच्च बैठा है।

क्यों कहा जाता हैं विश्वकर्मा जी को मशीनों का देवता

हिन्दू धर्म में भगवान विश्वकर्मा जी को मशीनों का देवता माना जाता हैं। क्योंकि उन्होंने ने ही रावण की लंका से लेकर कृष्‍ण जी की द्वारिका नगरी, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्‍थ नगरी, हस्तिनापुर, दानवीर कर्ण के कुंडल ,पुष्‍पक विमान आदि बनायें थे। भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्‍णु का सुदर्शन चक्र, यमराज का कालदंड, भगवान जगन्नाथ सहित, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण भगवान विश्वकर्मा जी ने अपने हाथों से किया था। इस कारण उन्हें प्रथम इंजीनियर के नाम से भी जाना जाता हैं। विश्वकर्मा जी ऐसे पहले इंसान थे जिन्होंने बड़े-बड़े महल, आलीशान भवन, सिंघासन, महाशक्तिशाली अस्त्र शास्त्रों और हथियारों का निर्माण किया हैं। इसलिए उन्हें मशीनों का देवता माना जाता हैं।

कौन थे भगवान विश्वकर्मा

भगवान विश्वकर्मा जी सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्मपुत्र थे। विश्वकर्मा जी के जन्म उत्सव को विश्वकर्मा जयंती के रूप में मनाई जाती हैं। भगवान विश्‍वकर्मा जी को ‘देवताओं का शिल्‍पकार’, ‘वास्‍तुशास्‍त्र का देवता’, ‘प्रथम इंजीनियर’, ‘देवताओं का इंजीनियर, मशीन का देवता और देव बढ़ई कहा जाता हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा का जन्म माघ शुल्क त्रयोदशी को हुआ था इन्हें शिव जी का भी अवतार माना जाता हैं। ऐसी मान्यता हैं कि ,एक बार असुरों से परेशान देवताओं की गुहार पर विश्‍वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों से देवताओं के राजा इंद्र के लिए वज्र बनाया। यह वज्र इतना शक्तिशाली था कि असुरों का सर्वनाश हो गया। असुरों के सर्वनाश से देवता गण बहुत अधिक प्रसन्न हुए। यही वजह है कि, सभी देवताओं में भगवान विश्‍वकर्मा जी का भी विशेष स्‍थान है।

कहाँ की जाती हैं विश्वकर्मा जी की पूजा

भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा अधिकतर दफ्तर, कंपनी, कारखाने, फैक्टरी और घरों में भी की जाती है। इस दिन अधिकतर ऑफिस, फैक्टरी में काम नहीं किया जाता और कर्मचारियों की छुट्टी भी रहती है। अधिकारी और कर्मचारी पूजा करने के लिए सिर्फ ऑफिस आते हैं। जो लोग इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर, चित्रकारी, वेल्डिंग और मशीनों के काम से जुड़े हुए वे खास तौर से इस दिन को बड़े उत्‍साह के साथ मनाते हैं। इस दिन मशीनों, दफ्तरों और कारखानों की सफाई की जाती है। विश्वकर्मा जयन्ती भारत के कर्नाटक, असम, पश्चिमी बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा और त्रिपुरा आदि प्रदेशों में मनायी जाती है। यह उत्सव प्रायः कारखानों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में मनाया जाता है।

विश्‍वकर्मा पूजा विधि

  • सबसे पहले औजारों,गाड़ी, मोटर और फैक्ट्री की मशीनों को साफ किया जाता हैं।
  • फिर जरूरी सामग्री जैसे-अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी, रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि की व्यवस्था करें।
  • इसके बाद फैक्ट्री, वर्कशॉप, ऑफिस, दुकान, घर आदि में स्नान करके साफ कपडे पहनकर आसन पर बैठ जायें और कलश को स्थापित करें
  • फिर विश्‍वकर्मा की मूर्तियों को सजाया जाता है। घरों में लोग अपनी गाड़‍ियों, कंम्‍प्‍यूटर, लैपटॉप व अन्‍य मशीनों की पूजा करते हैं।
  • विधि-विधान से पंडित जी के माध्यम से पूजा की जाती हैं।
  • अंत में हवन करने के बाद भगवान विश्‍वकर्मा की आरती की जाती हैं।
  • फिर भगवान विश्‍वकर्मा जी को हलवा,मिठाई,फल आदि का भोग लगाने के बाद प्रसाद सभी लोगों को बाँट दिया जाता हैं।
  • भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा प्रत्येक व्यक्ति को करनी चाहिए। इनकी पूजा करने से व्यवसाय में होती हैं उन्नति।

 

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