जानियें कहाँ हुआ था गणेश जी का जन्म और उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारें में

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Shri Ganesh Birth Place

भगवान श्रीगणेश जी को बुद्धि और कौशल के देवता कहा जाता हैं। इन दिनों चारों ओर गणपति जी का उत्साह और धूमधाम लोगों के बीच दिखाई दे रहा हैं। गणपति जी की एक से बढ़ एक झांकियां बहुत ही मनमहोक लग रही हैं। ऐसा माना जाता हैं कि, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी में भगवान गणेश (Shri Ganesh Birth Place) कैलाश पर्वत को छोड़कर धरती पर अपने भक्तों के साथ कुछ दिनों के लिए रहने आते हैं। इसलिए सभी लोग बप्पा जी की पूजा भक्ति में डूबे रहते हैं।

गणेश उत्सव हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण उत्सव है। जिसे हर साल बहुत ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हर साल यह उत्सव, हिन्दू पंचांग के मुताबिक भाद्रपद मास की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यानी पुरे दस दिनों तक चलता है। इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 13 सितंबर से हो चुकी हैं जो 23 सितंबर तक चलेगी।

जानियें कहाँ हुआ था श्रीगणेश जी का जन्म

कहा जाता हैं कि, भगवान श्रीगणेश जी का जन्म उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में संगम चिट्टी से करीब 23 किलोमीटर दूर डोडीताल के पास हुआ है। माना जाता हैं कि, ये वही स्थान हैं जहां मां पार्वती स्नान करने के लिए आया करती थी और यहीं पर उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की प्रतिमा बनाकर उसमें प्राण डाल दिये थे। डोडीताल पर ही गणेश की उत्पत्ति हुई थी। इसका वर्णन स्कन्द पुराण के केदार खंड में किया गया है। आज भी डोडीताल पर मां पार्वती जी का मंदिर बना हुआ हैं। जहां लोग माँ पार्वती जी की पूजा करते हैं।

Doditalभगवान श्रीगणेश जी की महिमा 

शिवमहापुराण के अनुसार माता पार्वती को श्रीगणेश का निर्माण करने का विचार उनकी सखियां जया और विजया ने दिया था। जया-विजया ने पार्वती से कहा था कि नंदी आदि सभी गण सिर्फ महादेव की आज्ञा का ही पालन करते हैं। तुम्हारी आज्ञा का भी पालन करने वाला भी कोई होना चाहिए। तब अपनी सखियों की बात सुनकर मां पार्वती जी ने गणेश जी की प्रतिमा का निर्माण किया। श्रीगणेश को बुद्धि और कौशल के देवता माना जाता हैं। गणेश जी की जो भी व्यक्ति सच्चे दिल से आराधना करता हैं उसे विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, प्रसिद्धि, सिद्धि सहजता से प्राप्त हो जाती है। हिन्दुओं में खासतौर पर श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है।

गणेश जी से जुड़े रोचक तथ्य
  • वैदिक मान्यताओं के अनुसार, श्री गणेश जी करीब 10,000 साल पहले प्रकट हुए। वेदों में उन्हें ‘नमो गणेभ्यो गणपति’ के साथ पुकारा गया।
  • श्री गणेश जी के अनेक नाम हैं जैसे- सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्ण, लम्बोदर, विकट, विघ्न विनाशन, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन, विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति, व्रकतुंड आदि।
  • पिता भगवान शंकर जी ने गणेश जी को वरदान दिया हैं कि, सभी देवताओं के पूजन में सबसे पहले तुम्हारी ही पूजा होगी।
  • पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ‘ॐ’ को साक्षात गणेश जी का स्वरुप माना गया है। जिस प्रकार प्रत्येक मंगल कार्य से पहले गणेश-पूजन होता है, उसी प्रकार प्रत्येक मन्त्र से पहले ‘ॐ’ लगाने से उस मन्त्र का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
  • शिवमहापुराण के अनुसार श्रीगणेश के शरीर का रंग लाल और हरा है। श्रीगणेश को जो दूर्वा चढ़ाई जाती है वह जड़ रहित, बारह अंगुल लंबी और तीन गांठों वाली होना चाहिए।
  • गणेश भगवान के कानों में वैदिक ज्ञान, मस्तक में ब्रह्म लोक, आंखों में लक्ष्य, दाएं हाथ में वरदान, बाएं हाथ में अन्न, सूंड में धर्म, पेट में सुख-समृद्धि, नाभि में ब्रह्मांड और चरणों में सप्तलोक है।
  • गणेश जी की दो पत्नियां हैं रिद्धि और सिद्धि और उनके पुत्रों का नाम शुभ और लाभ हैं।
    कुछ और रोचक तथ्य
  • कई मान्यताओं के अनुसार गणेश जी कभी भी विवाह नहीं करना चाहते थे। एक दिन गणेश जी गंगा नदी के किनारें तपस्या कर रहें थे, तभी वहां से तुलसी जी जा रही थी तभी उनकी नजर गणेश जी पर पड़ी और वे उन पर मोहित हो गई और तुलसी जी ने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। लेकिन गणेश जी ने तुलसी के इस प्रस्ताव को ठुकारा दिया। इससे तुलसी जी अत्यंत क्रोधित हुई और गणेश जी को श्राप देते हुआ कहा तुम जिस विवाह बंधन से बचना चाहतें हो उसी विवाह बंधन में शीघ्र ही बंध जाओगे। फिर गणेश जी ने भी तुलसी को अगले जन्म पेड़ पौधा बनने का श्राप दे दिया।
  • हिंदू धर्म में प्रचलित कथाओं के अनुसार एक बार जब भगवान परशुराम गणेश के पिता शिव जी से मिलने के लिए कैलाश पर्वत पर आए, तो गणेश जी ने उन्हें शिव जी से मिलने से रोक दिया, क्योंकि शिव जी ध्यान में मग्न थे और गणेश जी नहीं चाहते थे कि कोई भी उनके ध्या‍न में विघ्न डालें। लेकिन इस बात पर परशुराम को गुस्सा आ गया और उन्होंने गणेश पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। इस वार में भगवान गणेश का एक दांत टूट गया और तभी से वे एकदंत कहलाने लगे।
    Ganesh Jiकुछ महत्वपूर्ण तथ्य 
  • ऐसी भी मान्यता हैं कि, महर्षि व्यास की महाभारत गणेशजी ने लिखी थी। वे बोलते गए, गणेशजी लिखते रहे। लिखने के लिए उनके पास कुछ नहीं था, तो उन्होंने अपना एक दंत तोड़कर महाभारत लिखी, जिससे वे एकदंत कहलाए।
  • कुण्डलिनी योग के अनुसार, सात कुण्डलिनी चक्रों में से पहला चक्र, जो हमारी रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले भाग या आधार में स्थित मूल चक्र गणेशजी का निवास स्थान है।
  • लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1893 में गणेशोत्सव का जो सार्वजनिक पौधारोपण किया था, वह अब विराट वट वृक्ष का रूप ले चुका है।
  • सबसे अधिक गणेश जी की प्रतिमाओं का निर्माण महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे में होता हैं।
  • जब भी गणेशजी की मूर्ति की स्थापना करें तब उनकी सूंड बाएं हाथ की ओर घूमी हुई हो और उनके दोनों पैर दिखाई देते हो ऐसी मूर्ति शुभ मानी जाती हैं।
  • घर में गणेशजी का फोटो लगाते समय ध्यान दें कि फोटो मे मोदक व चूहा ज़रूर हो। इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं।
  • जीवन में शांति बनी रहे, इसके लिए स़फेद गणपति की पूजा-अर्चना करें।
  • एक घर में 3 गणपति की पूजा न करें। मुख्यद्वार पर गणेशजी की दो मूर्ति लगाएं, जिनकी पीठ आपस में मिली हो। इससे सभी तरह के वास्तु-दोष दूर हो जाते हैं।
  • जापान में श्रीगणेश को ‘कंजीटेन’ के नाम से जाना जाता है। गणेशजी की मूर्तियां अफगानिस्तान, ईरान, म्यान्मार, श्रीलंका, नेपाल, थायलैंड, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, चाइना, मंगोलिया, जापान, इंडोनेशिया, ब्रुनेई, बुल्गारिया, मेक्सिको और अन्य लेटिन अमेरिकी देशों में मिल चुकी हैं। इंडोनेशिया के करेंसी के नोटों पर भी श्रीगणेश की तस्वीर होती है।
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