जानियें महिलाओं को समस्त पापों से मुक्ति दिलाने वाले ऋषि पंचमी व्रत की महिमा

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Rishi Panchami

हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी (Rishi Panchami) व्रत का महत्व बहुत अधिक माना जाता हैं। क्योंकि यह व्रत माहवारी (मासिक धर्म, रजस्वला) के दौरान होने वाली गलतियों को सुधारने के लिए किया जाता हैं। यह व्रत कन्याओं और महिलाओं द्वारा किया जाता हैं। यह व्रत हर साल भाद्रपद शुक्ल पंचमी को किया जाता है। यह व्रत सामान्यतः अगस्त और सितंबर महीने में ही आता है। इस साल ऋषि पंचमी व्रत 14 सितंबर को है। कन्याएं और महिलाएं पुरे विधि विधान से सप्तर्षियों की पूजा करती हैं। इस बार ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त शुक्रवार को सुबह 11: 09 से दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगा यानी 2 घंटे 24 मिनट तक पूजा की जा सकती है।

ऋषि पंचमी व्रत का महत्व

इस व्रत को समस्त पापों को नष्ट करने वाला सर्वोत्तम व्रत माना जाता हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार माहवारी के दौरान महिलायें बहुत अधिक अपवित्र मानी जाती हैं। माहवारी के समय महिलाओं को रसोई घर में जाना और अन्य सामानों को छूना वर्जित माना जाता हैं। लेकिन महिलाएं इस दौरान कई समानों को गलती से हाथ लगा देती हैं। माहवारी में बहुत से नियमों का पालन करना होता हैं लेकिन गलती से कुछ भूल महिलाओं द्वारा हो जाती हैं और जिससे वे पाप की भागीदार बन जाती हैं। इस प्रकार के पापों से मुक्ति पाने के लिए महिलायें ऋषि पंचमी का व्रत करती हैं। कहा जाता हैं कि, जो भी स्त्रियां इस व्रत को करती हैं, उन सभी के माहवारी के दौरान हुए पापों से छुटकारा मिल जाता हैं।

ऋषि पंचमी व्रत की पुजा विधि

इस दिन महिलाएं घर की साफ-सफाई करके नदी या घर में स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। ऋषि पंचमी व्रत में महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करती हैं। इसके बाद हल्दी से चौकोर मंडल और गाय के गोबर से चैका बनाया जाता हैं। फिर लकड़ी के पाटे पर सफेद कपड़ा बिछाकर पान के ऊपर सप्त ऋषि बनाकर उनकी स्थापना की जाती हैं और इसके बाद हल्दी, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, जनेऊ, अक्षत, सफ़ेद वस्त्र, फल, मिठाई, नारियल आदि से सप्त ऋषियों का पूजन करते हुए उनसे क्षमा याचना मांगी जाती हैं। पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा पढ़ी और आरती की जाती हैं। नैवेद्य आदि का भोग लगाने के बाद प्रसाद सभी लोगों में बाँट दिया जाता हैं।

Rishi Panchami महिलायें इस दिन ऋषियों से क्षमा मांगती है

माहवारी को मासिक धर्म, रजस्वला आदि नामों से जाना जाता हैं। रजस्वला दोष से मुक्त होने के लिए महिलायें इस व्रत को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करती हैं और ऋषियों से क्षमा याचना मांगती है। यह व्रत ऋषियों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता, समर्पण और सम्मान की भावना को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण आधार माना जाता हैं। इस दिन सप्त ऋषि का आशीर्वाद प्राप्त करने, सुख शांति और समृद्धि की कामना से यह व्रत कुंवारी लड़कियों और स्त्रियों द्वारा रखा जाता है। ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं ऋषियों की पूजा कर उनसे धन-धान्य और संतान प्राप्ति की भी कामना करती हैं।

ऋषि पंचमी से जुड़े कुछ तथ्य

  • ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है। लेकिन यह अन्य व्रत की तरह सुहाग या मनवांछित वर पाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि इसका विशेष प्रयोजन होता है।
  • इस व्रत में अपामार्ग नामक पौधे का विशेष महत्व होता है, जिसके तने से 108 बार दातुन और स्नान करते समय 108 बार जल से भरें लौटे को सर पर डालने का विशेष महत्व हैं। इसके बिना ऋषि पंचमी का व्रत पूरा नहीं माना जाता।
  • ऋषि पंचमी का व्रत खास तौर से गलती या अनजाने में महिलाओं से हुए पाप कर्मों को नष्ट करने के लिए बहुत ही जरूरी है। यही कारण है कि इसे हर उम्र और वर्ग की महिलाएं करती हैं।
  • यह व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला अत्यंत पुण्य फलदायी माना जाता हैं।
  • ऋषि पंचमी के व्रत की सबसे विशेष बात यह है कि, इस व्रत में किसी देवी-देवता की पूजा नहीं की जाती, बल्कि इस दिन सप्तर्ष‍ियों का पूजन किया जाता है।
  • यह व्रत महिलाओं की अनजाने में हुई गलतियों और उससे मिलने वाले दोषों से रक्षा करने के लिए किया जाता है।
  • इस व्रत में हल की मदद से पैदा हुए अनाज को नहीं खाया जाता। इस व्रत में सिर्फ मोरधन के चावल या समा के चावल ही खाया जाता है।

 

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