स्वामी विवेकानंद के भाषण को आज 125 साल

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Swami Vivekananda Chicago Speech

राज एक्सप्रेस। भारत को विश्व गुरु बताने वाले स्वामी विवेकानंंद (Swami Vivekananda Chicago Speech) का जन्म कलकत्ता (पं. बंगाल) में 12 जनवरी 1863 को हुआ। उनका पूरा नाम नरेंद्रनाथ विश्वनाथ दत्त था। मठवासी बनने के बाद उनका नाम स्वामी विवेकानंद पड़ा। उनके नो भाई बहन थे। स्वामी विवेकानंद के पिता का नाम विश्वदत्त व माता भुवनेश्वरी देवी थी। उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस थे।

स्वामी जी के द्वारा अनेक महत्वपूर्ण काम किये गए जैसे कि कैलिफोर्निया में शांति आश्रम, भारत में ”अद्धैत आश्रम”, न्यूयार्क में वेदांत सिटी की स्थापना आदि। साहत्यिक कार्य भी स्वामी जी द्वार किये जैैसे कि कर्म योग, राज योग, भक्ति योग, आदि। उन्होंने सन 1884 मे B.A. की परीक्षा पास की थी। स्वामी ने राजयोग, ज्ञानयोग और योग, जैसे ग्रंथों की रचना की जिसका प्रभाव हमेशा जनमानस पर रहेगा।

स्वामीजी रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ के संस्थापक भी थे। वे हमेशा कर्म पर भरोसा रखने वाले महापुरुष थे। वे जातिवाद और भेदभाव के सख्त खिलाफ थे। 39 वर्ष की आयु में बीमारी के चलते 4 जुलाई 1902 को बेलूर, पश्चिम बंगाल, भारत में उनकी मृत्यु हो गई। जिसकी भविष्वाणी वह पहले कर चुके थे। स्वामी विवेकानंंद वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे।

शिकागो में धर्म सम्मलेन पर स्वामी विवेकानंद के जोरदार भाषण

सन 1893 में स्वामी विवेकानंद शिकागो गए थे। जहां उन्होनें विश्व धर्म सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसके बाद एक जगह पर अनेक धर्मगुरुओ ने अपनी किताब रखी वहीं स्वामी विवेकानंंद ने भारत के धर्म के वर्णन के लिए श्री मद भागवत गीता रखी थी जिसका लोगो ने बहुत मजाक उड़ाया, लेकिन जब विवेकानंद में अपने अध्यात्म और ज्ञान से भरे भाषण की शुरुआत की तब सभागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

प्रेरणा के अपार स्रोत स्वामी विवेकानंद की कही एक-एक बात हमें ऊर्जा से भर देती है। अपने अल्प जीवन में ही उन्होंने पूरे विश्व पर भारत और हिंदुत्व की गहरी छाप छोड़ दी। विवेकानंद के भाषण में जहां वैदिक दर्शन का ज्ञान था वहीं उसमें दुनिया में शांति से जीने का संदेश भी छुपा था, भाषण में स्वामी जी ने कट्टरतावाद और सांप्रदायिकता पर जमकर प्रहार किया था।

स्वामी विवेकानंद के विचार
  • कभी किसी की निंदा ना करें: अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।
  • कभी ये मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ भी करना असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।
  • अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।
  • एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो।
  • उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता।
  • सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
  • विश्व एक व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
  • ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है।
  • जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है।
  • हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा, और परमात्मा उसमे बसेंगे।
  • इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, ना कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है।

स्वामीजी संत के साथ ही एक अच्छे विचारक और लेखक भी थे। कर्मकांड, अंधश्रध्दा और आत्यंतिक ग्रंथ को छोड़ो और बुद्धि से धर्म का अभ्यास करो। इन्सान की सच्ची सेवा ही सच्चा धर्म है।

स्वामी विवेकानंद जातिवाद, धार्मिक आडम्बरों का जमकर विरोध करते थे। उन्होंने मानवतावाद और विश्वबंधुत्व को महत्व दिया। हिंदू धर्म और संस्कृति का महत्व भी विवेकानंद ने इस दुनिया को समझाया। उन्होंने हिंदुत्व को बढ़ावा दिया देश को दूसरे देशो के समक्ष गौरन्वित महसूूस कराया। आज भी देश को स्वामी जी के नाम से ही जाना जाता है। 12 जनवरी को उनके जन्मदिवस को नेशनल यूथ डे के नाम से जाना जाता है।

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