घर-घर में विराजेंगे गणपति बप्पा

0
43
Ganesh Festival 2018
 13 से 23 सितम्बर तक रहेगी धूम

भोपाल। भाद्रपद शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी गुरुवार 13 सितम्बर से 11 दिवसीय पर्व गणेशोत्सव (Ganesh Festival 2018) का शुभारंभ होगा। चतुर्थी शाम 5.40 तक रहेगी। उदयातिथि एवं भद्रा के कारण गोधूलि से यह त्यौहार रात्रि में 11.27 तक रहेगा। व्रत सूर्योदय से पूजा तक रहेगा। गणेश महोत्सव का 230वां वर्ष सार्वजनिक स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाएगा। मां चामुण्डा दरबार के पुजारी गुरु पं. रामजीवन दुबे एवं ज्योतिषाचार्य विनोद रावत ने बताया कि, हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्थी को हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जायेगा।

अमृत चौघड़िया:

गणेश पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार इसी दिन समस्त विघ्न बाधाओं को दूर करने वाले, कृपा के सागर तथा भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी का जन्म हुआ। भगवान विनायक-रिद्धि सिद्धि के दाता का जन्मदिवस 13 सितम्बर को शहर, प्रदेश एवं देश में धूमधाम से मनाया जायेगा। भद्रा 13 सितम्बर को प्रात: 6.00 से 5.34 शाम तक रहेगी। भद्रा रहित-शुभ समय पूजा का शाम गौधूलि 5.35 से 9.00 तक शुभ, अमृत, चर चौघड़िया, स्थिर लगन कुंभ रात्रि 9.30 से 11.27 स्थिर लगन वृषभ भी रहेगा।

भारत की कुंडली में कालसर्प योग 7 सितम्बर से 21 सितम्बर तक रहेगा। 13 सितम्बर- गणेश चतुर्थी व्रत, 14 सितम्बर-ऋषि पंचमी, 15 सितम्बर-मोरछठ-चम्पा सूर्य षष्ठी, 16 सितम्बर- संतान सप्तमी, 17 सितम्बर-राधाष्टमी, 20 सितम्बर-पदमा डोल ग्यारस, 22 सितम्बर-प्रदोष व्रत, 23 सितम्बर- अनंत चतुथदर्शी के साथ गणोश महोत्सव का समापन होगा। सुहागिन महिलाओं द्वारा 12 सितम्बर को हरितालिका तीज व्रत किया जायेगा एवं 13 सितम्बर को गणेश चतुर्थी का व्रत सुहागिन महिलाएं, पुरुष एवं बालकों द्वारा व्रत रखकर पूजा-पाठ किए जायेंगे।

गणेश चतुर्थी की कथा :

कथानुसार एक बार मां पार्वती स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक सुंदर बालक को उत्पन्न किया और उसका नाम गणेश रखा। फिर उसे अपना द्वारपाल बना कर दरवाजे पर पहरा देने का आदेश देकर स्नान करने चली गई। थोड़ी देर बाद भगवान शिव आए और द्वार के अन्दर प्रवेश करना चाहा तो, गणेश ने उन्हें अन्दर जाने से रोक दिया। इसपर भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपने त्रिशूल से गणेश के सिर को काट दिया और द्वार के अन्दर चले गए। जब मां पार्वती ने पुत्र गणेश जी का कटा हुआ सिर देखा तो अत्यंत क्रोधित हो गई। तब ब्रह्मा, विष्णु ने उनकी स्तुति कर उनको शांत किया और गणेश को जिंदा करने का अनुरोध किया। अनुरोध को स्वीकारते हुए एक गज के कटे हुए मस्तक को श्री गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।

गणेश चतुर्थी पूजा विधि

इस महापर्व पर लोग प्रात: काल उठकर सोने, चांदी, तांबे अथवा मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार विधि से उनका पूजन करते हैं। पूजन के पश्चात् नीची नज़र से चंद्रमा को अघ्र्य देकर ब्राह्मणों को दक्षिणा देते हैं। इस पूजा में गणपति को 21 लड्डुओं का भोग लगाने का विधान है। मान्यता के अनुसार श्रीमद् भागवत में भाद्र शुक्ल चतुर्थी पर चन्द्र दर्शन के कारण भगवान श्रीकृष्ण पर मणि चोरी के आरोप की कथा आती है, जिससे यह साबित होता है कि इस दिन चन्द्र दर्शन के कुप्रभाव से जब भगवान नहीं बच सके तो फिर सामान्यजन की क्या बात है?

5/5 (2)

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image