भारत के गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ (Somnath) मंदिर हैं। सोमनाथ मंदिर हिंदुओं का एक पवित्र स्थल हैं। क्योंकि पुराण- कथा के अनुसार इसे शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला माना जाता है। इस मंदिर की महिमा और प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है। देश-विदेश से कई लोग इस मंदिर को देखने आते है। ऐसा माना जाता हैं कि, इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव (चन्द्रमा) ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता हैं। इस मंदिर में करीब 17 बार हमला किया गया हैं। फिर भी इस मंदिर ने अपना अस्तित्व नहीं खोया।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास

सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत ही प्राचीन और समृद्ध हैं। इस मंदिर पर कई बार हमले हुए है। इस वजह से सोमनाथ मंदिर का कई बार निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है। मान्यता है कि, यहां एक मंदिर ईसा पूर्व से ही अस्तित्व में था। 7वीं सदी में इस स्थान पर द्वितीय बार मंदिर का पुनर्निर्माण वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने किया। 8वीं सदी में सिन्ध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इस मंदिर को ध्वस्त करने के लिए अपनी सेना भेजी। फिर 815 ईस्वी में प्रतिहार राजा नागभट्ट ने इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया। अरब यात्री अल-बरूनी ने अपने यात्रा विवरण में लिखा कि महमूद ग़ज़नवी ने सन 1024 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया।

1297 में मंदिर को 5वीं बार गिराया गया

सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्ज़ा किया तो इसे 5वीं बार गिराया गया। मंदिर का बार-बार खंडन और जीर्णोद्धार होता रहा पर शिवलिंग यथावत रहा। इसके बाद प्रतिष्ठित किए गए शिवलिंग को 1300 ई. में अलाउद्दीन की सेना ने खंडित किया। इसके बाद कई बार मंदिर और शिवलिंग खंडित किया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः सन् 1706 ई. में गिरा दिया। फिर राजा कुमार पाल द्वारा इसी स्थान पर अन्तिम मंदिर बनवाया गया था।

सौराष्ट्र के मुख्यमन्त्री उच्छंगराय नवल शंकर ढेबर ने 19 अप्रैल, 1940 को यहां उत्खनन कराया था। इसके बाद भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने उत्खनन द्वारा प्राप्त ब्रह्मशिला पर शिव का ज्योतिर्लिंग स्थापित किया। सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने 8 मई, 1950 को मंदिर की आधार शिला रखी और 11 मई, 1951 को भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिंग स्थापित किया। सोमनाथ मंदिर के मूल मंदिर स्थल पर मंदिर ट्रस्ट द्वारा निर्मित नवीन मंदिर स्थापित है।

Somnathसोमनाथ मंदिर से जुडी पौराणिक कथा

दक्ष प्रजापति की 27 कन्याएं थीं और उन सभी की शादी चंद्रदेव के साथ हुई थी। चंद्रदेव की 27 पत्नियां थी। लेकिन उनसब में से चन्द्रमा केवल रोहिणी को ही बहुत अधिक प्रेम और सम्मान करते थे। ये सब देखकर अन्य पत्नियां बहुत दुखी रहती थी। एक दिन उन सभी ने अपने पिता दक्ष को सारी बात बताई ये सब सुनकर दक्ष चंद्रदेव पर बहुत क्रोधित हुए और उन्हें समझाने के लिए उनके पास पंहुचे। दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को शान्तिपूर्वक समझाया की जो तुम पत्नियों के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हो वो उचित नहीं। मुझे आशा हैं कि, तुम दोबारा ऐसा नहीं करोगे। सभी पत्नियां तुम्हारे लिए समाना है। लेकिन चंद्रदेव दक्ष की बात नहीं समझे और ऐसा ही करते रहें। दक्ष प्रजापति के कई बार समझाने पर भी चंद्रदेव नहीं मानें तो दक्ष अत्यंत क्रोधित हुए और चंद्रदेव को क्षयग्रस्त हो जाने का श्राप दे दिया।

दक्ष प्रजापति के श्राप से चंद्रदेव को मिली मुक्ति

अगले ही दिन चन्द्रमा की चमक धीरे-धीरे कम होने लगी। उनके क्षयग्रस्त होते ही चारों ओर हाहाकार मच गई। चंद्रमा भी बहुत दुखी और चिंतित होने लगे। चन्द्रमा को चिंतित होता देख इंद्रादि देवता और वसिष्ठ ऋषिगण उनके उद्धार के लिए ब्रह्माजी के पास गए। उन्होंने ब्रम्हा जी को सारी गाथा सुनाई। फिर ब्रह्माजी ने कहा- ‘चंद्रमा अपने श्राप से मुक्ति पाने के लिए अन्य देवों के साथ पवित्र प्रभासक्षेत्र (सोमनाथ) में जाकर मृत्युंजय भगवान्‌ शिव की आराधना करें। उनकी ही कृपा से यह श्राप नष्ट होगा।

फिर चंद्रदेव ने दस करोड़ बार मृत्युंजय मंत्र का जप किया। इससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अमरत्व का वरदान दे दिया। भगवान शिव जी ने चंद्रमा से कहा मेरे वरदान के साथ ही दक्ष प्रजापति के वचनों की भी रक्षा हो जाएगी। चंद्रमा तुम्हारा प्रतिदिन क्षय बढ़ता जायेगा और जबकि दूसरे पक्ष में प्रतिदिन वह कम होते जायेगा। ये सब सुनकर चंद्रदेव प्रसन्न हुए और अन्य देवताओं के साथ मिलकर शिव भगवान से प्रार्थना की कि, आप माता पार्वतीजी के साथ हमेशा के लिए प्राणों के उद्धारार्थ यहाँ निवास करें। शिव जी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार ली और ज्योतर्लिंग के रूप में माता पार्वतीजी के साथ यहाँ रहने लगे।

Somnathसोमनाथ मंदिर के आस-पास देखने लायक दर्शनीय स्थल

  • अहिल्या बाई का मंदिर
  • प्राची त्रिवेदी
  • वाड़ातीर्थ
  • यादवस्थली
  • शशिभूषण मंदिर
  • भीड़भंजन गणपति और बाणेश्वर मंदिर
  • चंद्रेश्वर-रत्नेश्वर
  • पांच पांडव गुफा
  • सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर
  • द्वारिकानाथ और बालाजी मंदिर
  • लक्ष्मीनारायण और रूदे्रश्वर मंदिर
  • सूर्य और गीता मंदिर,
  • नाग मंदिर और क्षेत्रपाल मंदिर
  • कामनाथ महादेव मंदिर
  • सोमनाथ समुद्र तट
  • त्रिवेणी संगम मंदिर
  • परशुराम मंदिर

सोमनाथ मंदिर की धार्मिक मान्यता

सोमनाथ मंदिर की धार्मिक मान्यता हैं कि, जो व्यक्ति क्षय और कोढ़ रोग से ग्रस्त होता हैं। वो व्यक्ति इस मंदिर में सोमनाथ भगवान की पूजा और उपासना करता हैं तो वह इस रोग से मुक्त होकर एकदम स्वस्थ हो जाता है। सोमनाथ में सभी देवताओं ने मिलकर एक सोमकुण्ड की भी स्थापना की है और मान्यता हैं कि, इस कुण्ड में ही शिव और ब्रह्मा सदा निवास रहते हैं। जो व्यक्ति इस चन्द्रकुण्ड में स्नान करता है, वह सब प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है।

इस कुण्ड में जो लगातार 6 महीने तक स्नान करता हैं वह क्षय आदि रोग से मुक्त हो जाता हैं। ऐसा भी कहा जाता हैं कि, स्थान पर कृष्ण जी ने देहत्याग किया था। जब श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे। तब एक शिकारी ने उनके पैर के तलवे पर हिरण की आंख जानकर तीर मार दिया था। जिस कारण कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुंठ चले गए। फिर इस स्थान पर कृष्ण का सुन्दर मंदिर बनवाया गया है।

Somnath1Somnath का तीर्थ स्थल त्रिवेणी

सोमनाथ में तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। जिसे त्रिवेणी के नाम से जाना जाता हैं। त्रिवेणी में स्नान करना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता हैं। यह तीर्थ पितृगण के साथ नारायण बलि आदि कर्मों के लिए भी प्रसिद्ध है। चैत्र, भाद्र, कार्तिक महीनों में यहाँ स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इन तीन महीनों में यहां श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ लगती है। सोमनाथ से पास प्रमुख तीर्थ श्रीकृष्ण की द्वारका जो सोमनाथ से करीब 200 कि.मी दूरी पर स्थित है। यहां भी प्रतिदिन द्वारिकाधीश के दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में भक्तगण पंहुचतें हैं। इस स्थान पर तीर्थयात्रियों के लिए गेस्ट हाउस, विश्रामशाला व धर्मशालाओं की भी व्यवस्था है।

सोमनाथ का प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक श्रध्दा

यह स्थल धार्मिक श्रध्दा और आस्था के साथ प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद लेने वालों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। हर साल कई पर्यटक छुट्टियों का भरपूर लुफ़्त उठाने के लिए दूर दूर से सोमनाथ आते हैं। संगम स्थल का प्राकृतिक सौंदर्य यहाँ आने वाले लोगों को बहुत ही आकर्षित करता हैं। संगम में लोग बोटिंग का भी आनंद लेते हैं। लेकिन यहाँ सुरक्षा और सुविधा की कमी होने के कारण कभी-कभी घटनाएं घटित हो जाती है। यहाँ कई सारे धार्मिक स्थल होने के कारण पर्यटकों को यहां बहुत शांत वातावरण लगता हैं। इस जगह पर कई मंदिर, संग्रहालय और स्मारक आदि पर्यटक स्थल हैं।

सोमनाथ कैसे पहुंचें जानियें

  • वायु मार्ग-: सोमनाथ से 55 किलोमीटर स्थित केशोड से सीधे मुंबई के लिए वायुसेवा है। फिर यहाँ से बस और टैक्सी की सेवा ले सकतें है।
  • रेल मार्ग-: सोमनाथ के सबसे पास वेरावल रेलवे स्टेशन है, जो वहां से मात्र 7 किमी दूरी पर स्थित है। यहाँ से अहमदाबाद व गुजरात के अन्य स्थानों का सीधा संपर्क है।
  • सड़क मार्ग-: सोमनाथ वेरावल से 7 किमी, मुंबई 889 किमी, अहमदाबाद 400 किलोमीटर, भावनगर 266 किमी, जूनागढ़ 85 और पोरबंदर से 122 किमी की दूरी पर स्थित हैं। यहाँ राज्य अन्य शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ भी है।

 

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