BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- वैश्विक आर्थिक प्रगति का स्रोत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था

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Sambit Patra

नई दिल्ली। भाजपा ने कांग्रेस पर रविवार को आरोप लगाया कि उसकी अगुआई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने भारी कर्ज़, ऊंची महंगाई दर और नीतिपंगुता के हालात तैयार करके देश की अर्थव्यस्था को दुनिया की पांच सर्वाधिक अस्थिर अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना दिया था जो मोदी सरकार की कड़ी मेहनत के कारण आज विश्व की आर्थिक प्रगति का स्रोत बन कर उभरी है।

कांग्रेस के पास जनता को बताने के लिए कुछ भी नहीं बचा

भाजपा के प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा (Sambit Patra) ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, कांग्रेस के पास जनता को बताने के लिए कुछ नहीं बचा है इसलिए उसके नेता पुराने दिनों को याद कर रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि, उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की विशेषताएं बेतरतीब ऋण बांटना, ‘टेलीफोन बैंकिंग’ के जरिए मनमाने ढंग से लोगों को अरबों रुपए दिलवाना, मुद्रास्फीति की ऊंची दर और सब्सिडी भुगतान नहीं करना था। वृहद अर्थव्यवस्था की अस्थिरता का कारण महंगाई दर का आसमान पर पहुंचना और नीतियों की पंगुता बनी और विश्व बैंक ने भारत को दुनिया की पांच सर्वाधिक अस्थिर अर्थव्यवस्थाओं में से एक के तौर पर निरूपित किया।

आगे डॉ. संबित पात्रा ने यह भी कहा कि….

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के रूप में महंगाई दर को दहाई के अंक से नीचे 4.7 के अंक तक नियंत्रित किया गया और वृद्धि दर को ऊंचा बनाये रखा गया। कर सुधारों के माध्यम से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मज़बूत हुई। इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय अर्थव्यवस्था चार साल में ही सर्वाधिक तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गयी। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अगले 30 साल तक दुनिया की आर्थिक प्रगति का इंजन बनी रहेगी। उन्‍होंने कहा कि, संप्रग सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम आज अपनी पीठ खुद थपथपाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन देश की जनता को सब पता है। उनके कृत्यों के कारण कांग्रेस को वर्ष 2014 में 44 सीटें मिलीं थीं और इस बार उससे भी कम मिलेंगी।

देश की अर्थव्यवस्था ‘सही’ हाथों में नहीं : चिदंबरम

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदम्बरम ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की दोनों सरकारों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पुरानी एवं मौजूदा सरकारों के कार्यकाल में आर्थिक विकास दर (जीडीपी) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि, मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था और प्रबंधन ‘सही’ हाथों में नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था और प्रबंधन दोनों ही सही हाथों में था। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन यह सरकार उन्हें ढूंढ नहीं पायी। विदेशों से कई बेहतरीन अर्थशास्त्री भारत आ चुके हैं और थोड़े-थोड़े कार्यकाल के बाद किसी न किसी कारण वापस लौट चुके हैं।

पी चिदम्बरम ने आरोप लगाया कि…..

मोदी सरकार में नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किये जाने से लोग ‘कर आतंकवाद’ का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कर आतंकवाद को परिभाषित करते हुए कहा कि, जीएसटी की खामियों के कारण एक व्यक्ति को महीने में तीन-तीन और साल में 37 आयकर विवरणी भरनी पड़ रही है। यदि उस व्यक्ति का कारोबार देश के विभिन्न हिस्सों में हो तो आयकर विवरणी की यह संख्या सैकड़ों में होगी। उन्होंने सवाल किया कि यह कर आतंकवाद नहीं तो और क्या है? एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि देश में तीन वित्त मंत्री हैं- डिफैक्टो (वास्तविक), डिजुरे (कानूनी) एवं इनविजिबल (अदृश्य)। उनका इशारा क्रमश: अरुण जेटली, पीयूष गोयल और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर था।

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