इमरान के सामने चुनौतियां ढेरों

0
17
Imran Khan

राजएक्सप्रेस, भोपाल। इमरान खान पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री (Imran Khan) के रूप में शपथ ले चुके हैं। उनके सिर ऐसा कांटों भरा ताज है, जिसमें उन्हें अपनी सेना को भी खुश करना है व अमेरिका-चीन को भी साधे रखना है, तो भारत से भी संतुलन बनाकर चलना है। यह आसान नहीं होगा।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर इमरान खान ने अपना एक और सपना पूरा कर लिया। उनके नेतृत्व को लेकर पाकिस्तान के लोगों की राय कुछ भी हो, भारत में कम से कम राजनीतिक वर्ग को उनसे बहुत उम्मीदें नहीं हैं। ऐसा विरले ही देखने को मिलता है कि किसी मसले पर विभिन्न दलों के भारतीय नेताओं की राय एक सी हो। प्रधानमंत्री के रूप में इमरान की ताजपोशी के पहले ही अधिकांश भारतीय नेताओं ने एक स्वर में कहा कि इमरान का उभार पाकिस्तानी फौज की मेहरबानी से हुआ है। यह धारणा निराधार नहीं कि पाकिस्तानी सेना को इस पूर्व क्रिकेट कप्तान में एक लोकप्रिय, लेकिन आसानी से वश में किया जाने वाला प्रत्याशी दिखा। इस अंदेशे को नकारना मूर्खतापूर्ण ही होगा कि बतौर पीएम उनकी स्वायत्तता उनके पूर्ववर्तियों जितनी ही होगी। पाकिस्तान की सत्ता संभाल चुके इमरान खान ने भारत के साथ अच्छे रिश्ते की वकालत की है, लेकिन उन पर फौज के साथ मिलकर राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं तो सवाल यह उठता है कि अब भारत को लेकर उनका रुख क्या होगा?

इमरान खान अपने चुनावी भाषणों में कई बार बानगी पेश कर चुके हैं कि भारत को लेकर वह क्या सोचते हैं यहां तक की अपने धुर विरोधी नवाज शरीफ पर आरोप लगाने में भी वह भारत को घसीटते रहे हैं। जैसे ही भारत और पाकिस्तान के रिश्तों की बात आती है तो इमरान के तेवर काफी तल्ख होते हैं जिसमें कोई गुंजाइश नजर नहीं आती है। हालांकि सत्ता पर बैठने के बाद हर कोई अपने आपको थोड़ा ठीक करने की कोशिश करता है। इमरान खान कहते हैं कि भारत ने नवाज के साथ मिलकर पाक की फौज को कमजोर किया है यानी एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पाकिस्तान की फौज को पूरी तरह से सर आंखों पर बिठाते हैं तो दूसरी और नवाज पर आरोप भी लगाते हैं और पाकिस्तान में भारत विरोधी भावना को भड़काते हैं। अपने चुनावी भाषणों में वह प्रधानमंत्री मोदी को काफी भला बुरा कह चुके हैं। वह कभी नहीं चाहेंगे कि पाकिस्तान की आवाम के सामने उनकी छवि ऐसे बने जिससे लगे कि वह भारत के सामने झुक गए हैं। इसलिए ऐसा लगना स्वाभाविक है कि आने वाले दिनों में भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी बढ़ भी सकती है।

यह नई बात नहीं है कि इमरान और चीन के बीच आपसी गठजोड़ के आरोप लग रहे हैं। 2013 में भी कमोबेश स्थिति यही थी लेकिन तब इमरान सत्ता तक नहीं पहुंच पाए और अब जब वह पहुंच चुके हैं तो भारत के लिए चुनौती बड़ी है। चीन, पाकिस्तान को भारत के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी का नतीजा है। ऐसे में जब पाकिस्तान की प्रधानमंत्री ही चीन के हाथ का कठपुतली बन जाएगा तो भारत के लिए और चुनौती खड़ी हो सकती है। वहीं भारत को परेशान करने पर पाक में इमरान की छवि भी भारत विरोधी बनेगी।

No ratings yet.

Please rate this

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enter Captcha Here : *

Reload Image