अटलजी के सपनों को पूरा करें हम

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Atal Bihari Vajpayee

राजएक्सप्रेस, भोपाल। अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं। अब काया के रूप में वे हमारे बीच नहीं हैं, पर उनके आदर्श और विचार हमें उस भारत का निर्माण करने की प्रेरणा देते रहेंगे, जिसका स्वप्न अटलजी ने देखा था। अत: अब हम सभी उनके सपनों को पूरा करें।

युगपुरुष पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) पंचतत्व में विलीन हो गए। अब काया के रूप में वे हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनके कर्म उन्हें हम सभी के बीच हमेशा विद्यमान रखेंगे। अटलजी की छवि ही ऐसी थी, जिन्हें अंतिम विदाई देने सिर्फ देश ही नहीं दुनिया भी उमड़ी पड़ी थी। बीते 24 घंटे से चर्चा में सिर्फ अटलजी ही रहे। देश-दुनिया की सबसे बड़ी खबर भी अटलजी ही बने। अटलजी हमारे बीच भले ही न हों, मगर उनकी नीतियों और विचारों की गूंज हमें सदा सुनाई देती रहेगी और अगर हम उस पर रत्तीभर भी अमल कर पाए, तो भारत की तकदीर बदलते देर नहीं लगेगी। अटलजी की अभिलाषा थी कि भारत भय, भूख, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो। इसी को ध्यान में रख कर सरकार में रहते हुए उन्होंने नीतियां बनाईं। अटलजी भारतीय राजनीति में अजातशत्रु राजनेता माने जाते थे। वे ऐसे नेता थे, जिन्हें दूसरे दलों के लोग भी पसंद करते थे, उनकी वक्तृत्ता और सूझ-बूझ के सभी कायल थे। वे बहुत संतुलित, सधी हुई भाषा, रोचक शैली और तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बातें रखते थे।

प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने देश के आम लोगों की जरूरतों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने कई साहसिक कदम उठाए। नदियों को आपस में जोड़ कर जल संबंधी समस्याओं से निपटने का विचार दिया, कावेरी जल विवाद को सुलझाया। सभी को आवास संबंधी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शहरी सीलिंग को समाप्त किया। इन्हीं योजनाओं और उनकी सूझ-बूझ का नतीजा था कि अर्थव्यवस्था अपनी बेहतरी के दौर में प्रवेश कर सकी। सबसे उल्लेखनीय काम उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बना कर किया। दुनिया के तमाम देशों की कड़ी नजर के बावजूद उनके कार्यकाल में पोखरण परमाणु परीक्षण किया गया। हालांकि उसके बाद भारत को दुनिया के शक्तिशाली देशों की टेढ़ी नजर का सामना करना पड़ा, मगर अटल बिहारी वाजपेयी ने उसकी परवाह नहीं की और इस तरह भारत परमाणु शक्ति के रूप में दुनिया में पहचाना जाने लगा।

अटल बिहारी वाजपेयी की नीतियों में मानवता के सूत्र कहीं टूटते नजर नहीं आए। वे न सिर्फ कुशल और सफल राजनेता थे, दृढ़ निश्चयी प्रशासक और मन मोहने वाले वक्ता थे, बल्कि अच्छे कवि और सजग-विचारशील पत्रकार भी थे। उनके जाने से दक्षिण मार्गी राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। मगर अटलजी के विचार और आदर्शो का अंत नहीं हुआ है। सही मायने में कहें, तो उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाने काम अब शुरू हुआ है। स्मृति वन में आग की लपटों में घिरी अटलजी की पार्थिव देह के समक्ष हम सब को इस बात की शपथ लेनी होगी कि हम उस भारत का निर्माण करेंगे, जिसका स्वप्न अटलजी ने देखा था। ऐसा भारत जिसमें कोई बैर न हो, धर्म को लेकर कटुता न हो और समाज में किसी तरह की वैमनस्यता की जगह न हो।

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